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बैंकिंग सुधार समिति की रूपरेखा जल्द, बीमा में 100% FDI को वैश्विक दिलचस्पी: एम नागराजू

उन्होंने कहा कि बजट में प्रस्तावित बैंकों की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति की रूपरेखा अगले महीने तक स्पष्ट हो जाएगी

Last Updated- February 02, 2026 | 11:06 PM IST
M Nagaraju, secretary, Department of Financial Services, Ministry of Finance
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू

बीमा क्षेत्र में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दिए जाने के निर्णय के बाद अमेरिका और यूरोप की कंपनियों ने भारत के बीमा क्षेत्र में काफी दिलचस्पी दिखाई है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने हर्ष कुमार से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बजट में प्रस्तावित बैंकों की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति की रूपरेखा अगले महीने तक स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी बैंकों में एफडीआई की सीमा को 49 फीसदी तक बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। मुख्य अंश:

बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए बजट में एक उच्चस्तरीय समिति गठित किए जाने का जिक्र है। इसकी रूपरेखा और समय-सीमा क्या होगी?

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए बैंकों से भारी ऋण लेने की जरूरत होगी। मगर हमारे लिए एक अहम सवाल यह है कि ऋण की उपलब्धता को कैसे सुनि​श्चित किया जाए। अब हमारे पास करीब 20 साल का समय बचा है और इस दौरान हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त पूंजी हो और वह उचित नियामकीय ढांचे के साथ दमदार हो। इसके लिए हमें बड़े बैंकों की जरूरत है। मगर सवाल यह है कि हमें पूंजी कैसे मिलेगी, हम मौजूदा बैंकों को बड़ा कैसे बड़ा करें, किन बदलावों की जरूरत है और उनकी रूपरेखा क्या होगी? ये महत्त्वपूर्ण मुद्दे हैं। इसलिए विशेषज्ञ समिति रूपरेखा तैयार करने की बेहतर स्थिति में होगी ताकि देश विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ सके।

क्या विलय और एफडीआई पर भी विचार किया जाएगा?

मैं समझता हूं कि यह सब टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) पर निर्भर करता है, जिसे सरकार अगले महीने तक अंतिम रूप दे सकती है। उसके बाद हम यह पता लगाएंगे कि इस समिति का दायरा क्या होना चाहिए। हम तमाम हितधारकों के साथ परामर्श के बाद टीओआर को अंतिम रूप देने की कोशिश करेंगे। टीओआर को अंतिम रूप दिए जाने के बाद सरकार विशेषज्ञ समिति के सदस्यों का चयन करेगी और उसमें वित्तीय क्षेत्र के लोग शामिल होंगे।

क्या यह समिति बोर्डों के पुनर्गठन पर भी विचार करेगी?

नहीं, बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति और प्रबंध निदेशकों के चयन का मौजूदा तरीका ठीक है। हमारे पास वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो (एफएसआईबी) नाम की एक स्वतंत्र समिति है जो साक्षात्कार करती है, उम्मीदवारों की सिफारिश करती है और सरकार हमेशा उसकी सिफारिशों को स्वीकार करती है।

सरकारी बीमा कंपनियों के लिए क्या योजना है?

सरकार ने संसद के पिछले सत्र में बीमा सुधारों को आगे बढ़ाया है। पिछले साल तक सरकारी बीमा कंपनियों में विनिवेश की बात थी। मगर कंपनियां घाटे में चल रही थीं और इसलिए सरकार ने कदम आगे नहीं बढ़ाया। सरकार का मानना है कि पहले पर्याप्त पूंजी उपलब्ध कराते हुए उनकी सेहत दुरुस्त की जाए और उसके बाद विनिवेश की पहल की जा सकती है। हालांकि इस साल सभी चार कंपनियों ने मुनाफा कमाया है और मुझे लगता है कि अच्छा रिटर्न देने के लिए उन्हें थोड़ा वक्त दिया जाए। मगर फिलहाल इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।

बीमा में 100 फीसदी एफडीआई पर वैश्विक बाजार से कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है?

जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। विदेशी बीमा कंपनियां भारत की बीमा कंपनियों में 100 फीसदी स्वामित्व हासिल करने की योजना बना रही हैं। वे भारतीय बाजार को सबसे ताकतवर मानते हैं क्योंकि अन्य बाजार अब परिपक्व हो चुके हैं। वास्तव में अमेरिका और यूरोप की कंपनियां हमसे संपर्क कर रही हैं। उनमें से कुछ तो अल्पांश हिस्सेदारी के लिए करार पहले ही कर चुकी हैं। तो वे अब जानना चाहती हैं कि क्या उन्हें 100 फीसदी की अनुमति है।

क्या सरकारी बैंकों के लिए एफडीआई नियमों में संशोधन पर विचार हो रहा है?

हम सरकारी बैंकों में पूंजी बढ़ाने के लिए एफडीआई को मौजूदा 20 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि अभी हम केवल विचार कर रहे हैं और एफडीआई सीमा बढ़ाने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी परामर्श जारी है।

विलय के बाद क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के लिए क्या योजना है?

अब हमारे पास 28 आरआरबी हैं यानी हर राज्य में एक आरआरबी। सभी आरआरबी का विलय सुचारु रहा है और सभी ने इसकी सराहना की है। फिलहाल एक को छोड़कर सभी बैंकों ने मुनाफा कमाया है। वे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, उनकी परिचालन दक्षता में सुधार हुआ है, पूंजी का स्तर बेहतर हुआ है और ऋण वितरण में सुधार हुआ है। अब हमने तीन आरआरबी- हरियाणा ग्रामीण बैंक, केरल ग्रामीण बैंक और तमिलनाडु ग्राम बैंक- को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए शॉर्टलिस्ट किया है। इनके आईपीओ इस साल के आ​​खिर तक बाजार में आने की संभावना है।

First Published - February 2, 2026 | 10:59 PM IST

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