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दक्षिण के राज्य मालामाल, उत्तरी राज्यों को झटका! टैक्स बंटवारे के नए फॉर्मूले से किस स्टेट को कितना मिला?

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16वें वित्त आयोग ने राज्यों का टैक्स हिस्सा 41% रखा, लेकिन फॉर्मूला बदलने से दक्षिण-पश्चिम के राज्यों को फायदा और उत्तर के कुछ राज्यों को नुकसान हुआ है

Last Updated- February 02, 2026 | 12:09 PM IST
Rupees
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

16th Finance Commission Report: देश के 16वें वित्त आयोग ने अगले पांच सालों के लिए राज्यों को केंद्र के टैक्स पूल से मिलने वाले हिस्से को 41 फीसदी पर ही रखा है। ये फैसला 2026-27 से 2030-31 तक लागू होगा। लेकिन हिस्सेदारी तय करने का फॉर्मूला बदल दिया गया है, जिससे कई अमीर और औद्योगिक राज्यों को ज्यादा फायदा मिला है। खासकर दक्षिण और पश्चिम के कुछ राज्य खुश हैं, जबकि उत्तर के बड़े और गरीब राज्यों को थोड़ा झटका लगा है। आयोग की रिपोर्ट बजट में पेश की गई और ये बदलाव वित्त वर्ष 27 के बजट अनुमानों में दिख रहे हैं।

राज्यों ने ज्यादा हिस्सा क्यों मांगा और केंद्र ने क्यों ठुकराया?

कई राज्यों ने आयोग से अपनी हिस्सेदारी 41 से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की जोरदार मांग की। कुल 28 में से 18 राज्यों ने ये बात कही। उनका कहना था कि उन्हें विकास के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत है। लेकिन आयोग ने ये मांग नामंजूर कर दी।

आयोग का कहना था कि राज्य पहले से ही देश के कुल गैर-कर्ज राजस्व का दो-तिहाई ले रहे हैं। अगर हिस्सा और बढ़ाया गया, तो केंद्र के पास राष्ट्रीय जरूरतों जैसे डिफेंस और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए पैसे कम पड़ेंगे। आयोग ने कहा कि संतुलन बनाए रखना जरूरी है, नहीं तो केंद्र की भूमिका कमजोर हो जाएगी।

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किन राज्यों को हुआ सबसे ज्यादा फायदा?

नए फॉर्मूले से कुछ राज्यों की हिस्सेदारी में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। सबसे ऊपर है कर्नाटक, जिसका हिस्सा वित्त वर्ष 26 के रिवाइज्ड अनुमानों से वित्त वर्ष 27 में 0.48 पर्सेंट पॉइंट्स बढ़कर 4.13 फीसदी हो गया। पहले ये 3.64 फीसदी था। पैसे की बात करें तो कर्नाटक को अब 63,049.58 करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि पहले 50,801.65 करोड़ थे।

कर्नाटक के बाद केरल का नंबर है। यहां हिस्सा 0.45 पर्सेंट पॉइंट्स बढ़कर 2.38 फीसदी पहुंच गया, जो पहले 1.92 फीसदी था। केरल को अब 36,355.39 करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि पहले 26,814.70 करोड़ थे। गुजरात भी पीछे नहीं रहा। उसका हिस्सा 0.27 पर्सेंट पॉइंट्स बढ़कर 3.75 फीसदी हो गया, पहले 3.47 फीसदी था। गुजरात को वित्त वर्ष 27 में 57,310.86 करोड़ मिलेंगे, जो वित्त वर्ष 26 से 48,447.57 करोड़ से ज्यादा है।

हरियाणा ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। उसका हिस्सा 0.26 पर्सेंट पॉइंट्स बढ़कर 1.361 फीसदी हो गया, पहले 1.09 फीसदी था। पैसे में ये 20,772.32 करोड़ बनते हैं, जबकि पहले 15,225.18 करोड़ थे। ये राज्य ज्यादातर अमीर और इंडस्ट्री से भरे हैं, इसलिए नए फॉर्मूले ने इन्हें फायदा पहुंचाया।

16th Finance Commission report में किन राज्यों की हिस्सेदारी घटी?

दूसरी तरफ, उत्तर के बड़े राज्यों को अपनी हिस्सेदारी में थोड़ी गिरावट झेलनी पड़ी। सबसे ज्यादा आबादी वाला उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा लाभार्थी है, लेकिन उसका हिस्सा 17.93% से घटकर 17.61% हो गया। हालांकि, रकम बढ़कर अब 2,68,910.76 करोड़ रुपये हो गई है, पहले यह 2,49,885 करोड़ थी।

बिहार का हिस्सा थोड़ा गिरकर 9.94% रह गया, पहले यह 10.05% था। फिर भी रकम बढ़कर 1,51,831.80 करोड़ रुपये हो गई, पहले 1,40,105.01 करोड़ थी। राजस्थान में भी हिस्सा थोड़ा कम होकर 5.92% रह गया, पहले 6.02% था, लेकिन पैसे बढ़कर अब 90,445.85 करोड़ रुपये हो गए, पहले 83,940.45 करोड़ थे।

मध्य प्रदेश को सबसे बड़ा झटका लगा। इसका हिस्सा 7.85% से घटकर 7.34% रह गया, लेकिन पैसे थोड़ा बढ़कर 1,12,133.93 करोड़ रुपये हो गया, जो पहले 1,09,348.21 करोड़ रुपये था। ये राज्य गरीब और अधिक आबादी वाले हैं, इसलिए पुराने फॉर्मूले में उन्हें ज्यादा मदद मिलती थी।

हिस्सेदारी तय करने के फॉर्मूले में क्या-क्या बदला?

आयोग ने हॉरिजॉंटल डिवोल्यूशन फॉर्मूले में कई बदलाव किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब राज्यों के GDP में योगदान को भी शामिल किया गया है, जिसे 10% का वेट दिया गया है। इसका मतलब है कि जो अमीर राज्य देश की अर्थव्यवस्था में ज्यादा योगदान देते हैं, उन्हें फायदा मिलेगा।

राज्यों के टैक्स प्रयासों को अब 2.5% का वेट नहीं दिया जाएगा। इसके बदले आबादी के वेट को 2.5 पर्सेंट पॉइंट बढ़ाया गया है। क्षेत्रफल, डेमोग्राफिक प्रदर्शन और प्रति व्यक्ति GSDP दूरी का वेट कम कर दिया गया है। प्रति व्यक्ति GSDP दूरी गरीब राज्यों को ज्यादा पैसा दिलाती है, क्योंकि यह दिखाती है कि कोई राज्य अमीर राज्यों के औसत से कितना पीछे है।

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ग्रांट्स और आपदा फंड्स में क्या प्रावधान?

आयोग ने अब राज्य-विशेष या सेक्टर-विशेष ग्रांट्स के बजाय लोकल बॉडीज पर ध्यान दिया है। 2026-31 के दौरान ग्रामीण और शहरी लोकल बॉडीज को कुल 7.91 ट्रिलियन रुपये मिलेंगे, जिसमें 60% ग्रामीण और 40% शहरी क्षेत्रों के लिए रखा गया है। पैसों का इस्तेमाल मुख्य तौर पर पानी, सफाई और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर होगा।

आपदा प्रबंधन के लिए भी बजट बढ़ाया गया है। राज्यों को आपदा रिस्पॉन्स और मिटिगेशन के लिए 2.04 ट्रिलियन रुपये मिलेंगे, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 79,000 करोड़ रुपये का फंड रखा गया है। यह सब नए डिजास्टर रिस्क इंडेक्स पर आधारित है, जिससे राज्यों को प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में मदद मिलेगी।

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First Published - February 2, 2026 | 11:52 AM IST

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