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Tradeable weather index: ट्रेडिंग योग्य मौसम सूचकांक लाएंगे NCDEX और Skymet!

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आधिकारिक बयान में कहा गया कि NCDEX और Skymet के बीच समझौता किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मौसम से जोड़ने की दिशा में हुई अहम पहल है

Last Updated- August 14, 2023 | 11:26 PM IST
Suicides by farmers drop 2.1% in 2022, farm labourers rise by 9.3%

देश के अग्रणी कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स और मौसम का अनुमान लगाने वाली निजी कंपनी स्काईमेट ने कृषि जिंसों पर मौसम के असर के बारे में अपनी समझ बेहतर बनाने के लिए आज एक समझौते पर दस्तखत किए। यह देश में ट्रेडिंग योग्य पहला मौसम सूचकांक जारी करने की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है।

आधिकारिक बयान में कहा गया कि एनसीडीईएक्स और स्काईमेट के बीच समझौता किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मौसम से जोड़ने की दिशा में हुई अहम पहल है। सूत्रों ने कहा कि स्काईमेट और एनसीडीईएक्स किसानों को जागरूक बनाने के लिए देश भर में संगोष्ठी और कार्यशालाएं आयोजित करेंगे। इनमें किसानों को बताया जाएगा कि जोखिम से बचने के लिए वे मौसम के पूर्वानुमान का वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं।

दुनिया भर में बाजार प्रतिभागी मौसम सूचकांकों का इस्तेमाल करते हैं ताकि जलवायु परिवर्तन बढ़ने के कारण मौसम में बार-बार हो रहे बदलाव से उन्हें कोई वित्तीय जोखिम नहीं हो।

इससे पहले इसी 9 जून को एनसीडीईएक्स और स्काईमेट ने राष्ट्रीय स्तर के 2 वर्षा-आधारित सूचकांक- भारतीय मॉनसून सूचकांक (संचयी मॉनसून सूचकांक) और भारतीय वर्षा सूचकांक (मासिक संचयी वर्षा सूचकांक)- जारी किए थे। ये सूचकांक देश में बारिश के तरीके पर नजर रखने के लिए जारी किए गए थे। मगर ये दोनों सूचकांक वर्षा के प्रतिनिधि सूचकांक भर हैं और इनकी ट्रेडिंग नहीं की जा सकती।

सूत्रों ने कहा कि पिछले तीन साल में मिले ज्ञान और प्रतिभागियों द्वारा दिखाई गई गहरी दिलचस्‍पी के कारण एनसीडीईएक्‍स अब स्काईमेट के साथ मिलकर मौसम सूचकांकों में औपचारिक तौर पर ट्रेडिंग शुरू कराने की तैयारी में है। अभी इसके लिए कोई मियाद तय नहीं की गई है क्योंकि इसके लिए बाजार नियामक सेबी जैसे विभिन्‍न नियामकों से मंजूरी लेनी होगी।

स्काईमेट वेदर सर्विसेज के प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं संस्थापक जतिन सिंह ने एक बयान में कहा, ‘मौसम संबंधी जोखिम का कृषि क्षेत्र पर बहुत अधिक असर पड़ता है। इसलिए हमें लगता है कि देश में मौसम डेरिवेटिव्‍स जैसे साधनों की फौरन जरूरत है। ये साधन किसानों, प्रोसेसरों, निर्यातकों आदि को मूल्य जोखिम कम करने की कारगर सुविधा देंगे। करीब तीन साल पहले हमने दो मौसम सूचकांक जारी कर इस दिशा में अहम कदम उठाया था। पिछले तीन साल में मिली प्रतिक्रिया से पता चलता है कि बाजार में ट्रेडिंग के लिए मौसम सूचकांक की जबरदस्‍त मांग है। यह समझौता उसी दिशा में ठोस कदम है।’

एनसीडीईएक्स के एमडी एवं सीईओ अरुण रास्ते ने कहा कि इस गठजोड़ का लक्ष्य बाजार प्रतिभागियों को गहरी और कारगर जानकारी प्रदान करना है ताकि उन्हें बेहतर निर्णय लेने, जोखिमों से अच्छी तरह निपटने और कृषि उद्योग में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

दुनिया के अन्य देशों की ही तरह भारत में भी खेती पर अनिश्चित मौसम का काफी असर पड़ रहा है। खेती ही नहीं उस पर निर्भर तमाम क्षेत्रों को भी मौसम की मार झेलनी पड़ती है। इनमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भी शामिल है। कभी अत्‍यधिक बारिश तो कभी सूखा जैसे अनिश्चित मौसम के कारण इन क्षेत्रों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।

इस साल अप्रैल से जून तक गर्मियों के मौसम में उत्तर भारत के लोगों ने बेमौसम बारिश का आनंद लिया तो पूर्वी और दक्षिण भारत में लोगों को जबरदस्‍त लू का सामना करना पड़ा। मौसम में इस प्रकार के उलटफेर से कृषि, पेय पदार्थ और कंज्‍यूमर ड्यूरेबल जैसे क्षेत्रों का व्यापार चक्र ही बिगड़ गया।मौसम में बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव कृषि उपज पर पड़ा, जिससे गर्मी में आने वाले खाद्य पदार्थों की कीमतों आसमान छूने लगीं।

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First Published - August 14, 2023 | 11:16 PM IST

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