Economic Survey 2026: संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 में कहा गया कि व्यापक रुझानों के आधार पर केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.4 फीसदी तक सीमित रखने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अच्छी तरह आगे बढ़ रही है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन और उनकी टीम द्वारा तैयार इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने राजकोषीय अनुशासन (fiscal consolidation) और ग्रोथ के लिए टिकाऊ निवेश दोनों को संतुलित किया जिसकी वजह से उसका राजकोषीय मार्ग अन्य से अलग और प्रभावशाली दिखता है।
इस प्रतिबद्धता के चलते इस वर्ष तीन रेटिंग एजेंसियों ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को बढ़ाया है। इसके मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 के दौरान कुल केंद्रीय व्यय में पूंजीगत खर्च (Capex) का हिस्सा 12.5 फीसदी से बढ़कर 22.6 फीसदी हो गया जबकि जीडीपी के अनुपात में प्रभावी पूंजीगत व्यय लगभग 2.6 फीसदी से बढ़कर 4 फीसदी हो गया।
इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया कि राज्यों का राजस्व घाटा बढ़ने के बावजूद केंद्र सरकार ने राज्यों को पूंजीगत व्यय बनाए रखने के लिए विशेष सहायता देकर प्रोत्साहित किया। इसके अलावा कई राज्यों में बिना-शर्त नकद हस्तांतरण का विस्तार राजस्व व्यय बढ़ाने का कारण बना, जिससे राज्यों के स्तर पर राजकोषीय गुंजाइश और सार्वजनिक निवेश प्रभावित हुआ।
इकोनॉमिक सर्वे कहता है, “वित्त वर्ष में दिखे व्यापक रुझानों के आधार पर केंद्र सरकार फिस्कल कंसोलिडेशन के अपने निर्धारित मार्ग पर है और वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा लक्ष्य को जीडीपी के 4.4 फीसदी पर रखने का लक्ष्य हासिल करने की राह पर है।” नवंबर, 2025 तक, केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 62.3 फीसदी था।
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, बाजारों ने सरकार की राजकोषीय अनुशासन की प्रतिबद्धता को मान्यता दी है, जिससे सरकारी बॉन्ड यील्ड घटा है और भारत के सरकारी बॉन्ड पर अमेरिकी बॉन्ड के मुकाबले ब्याज दर का अंतर आधे से अधिक घट गया है। घटता यील्ड खुद ही वित्तीय प्रोत्साहन का काम करेगा। इकोनॉमिक सर्वे में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने 4.8 फीसदी राजकोषीय घाटे का आंकड़ा हासिल कर 4.9 फीसदी के बजट लक्ष्य को भी पार कर लिया। वित्त वर्ष 2020-21 में राजकोषीय घाटा 9.2 फीसदी था।
(PTI इनपुट के साथ)