कमोडिटी

Gold Price Surge: फेड के फैसले के बीच सोना-चांदी बेकाबू, क्या यह आखिरी तेजी है? एक्सपर्ट से जानें

सोना और चांदी में रिकॉर्ड तेजी ने बढ़ाई निवेशकों की धड़कन, विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

Published by
देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- January 29, 2026 | 11:32 AM IST

Gold Price: दुनिया के बुलियन बाजार में इस समय ऐसा उबाल है, जिसने निवेशकों और विशेषज्ञों दोनों को चौंका दिया है। सोना और चांदी की कीमतें इतिहास के ऐसे मोड़ पर पहुंच गई हैं, जहां तेजी सामान्य नहीं बल्कि असाधारण मानी जा रही है। बाजार के जानकार इसे ‘एक सदी में एक बार दिखने वाली तेजी’ बता रहे हैं, जहां लालच, डर और अनिश्चितता- तीनों एक साथ बाजार को चला रहे हैं।

जनवरी ने बदला इतिहास का रिकॉर्ड

जनवरी 2026 ने बुलियन बाजार के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। सोने की कीमतों में एक ही महीने में करीब 27 प्रतिशत की छलांग लगी है, जो पिछले 100 वर्षों की दूसरी सबसे बड़ी मासिक तेजी मानी जा रही है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली चाल चांदी ने दिखाई, जहां कीमतें लगभग 66 प्रतिशत तक उछल गईं। बाजार के रिकॉर्ड बताते हैं कि इतनी तेज मासिक बढ़त बेहद दुर्लभ होती है और अक्सर बाजार के निर्णायक दौर का संकेत देती है।

क्यों बेकाबू हुई कीमतों की रफ्तार

केडिया एडवाइजरी के मुताबिक सोना-चांदी की इस बेकाबू रफ्तार के पीछे वैश्विक डर की गूंज साफ सुनाई दे रही है। डॉलर की कमजोरी, दुनिया भर में मौद्रिक नीतियों को लेकर बढ़ती बेचैनी, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों का जोखिम भरे निवेश से भागना- इन सभी ने मिलकर बुलियन को सबसे सुरक्षित ठिकाना बना दिया है। जैसे-जैसे अनिश्चितता बढ़ी, वैसे-वैसे सोना-चांदी पर दांव और भारी होता चला गया।

इतिहास गवाह है कि जब सोना-चांदी इस तरह उफान पर होते हैं, तो बाजार अक्सर भावनाओं के हवाले हो जाता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह तेजी आखिरी दौर की तेजी भी हो सकती है, जहां उतार-चढ़ाव बेहद तेज हो जाता है। ऐसे समय में जरा-सी चूक भारी नुकसान में बदल सकती है। अचानक गिरावट और तेज करेक्शन का खतरा इस दौर में हमेशा बना रहता है।

फेड का फैसला और बाजार की धड़कन

इसी बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों को 3.5 से 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है। Axis Securities के हेड ऑफ रिसर्च राजेश पलविया के अनुसार, यह कदम फेड के उस भरोसे को दिखाता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था फिलहाल संतुलित स्थिति में है। 2025 के अंत में तीन बार दरें घटाने के बाद फेड अब रुककर हालात को परख रहा है।

पॉवेल का संदेश: अर्थव्यवस्था मजबूत है

फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने साफ कहा है कि अमेरिका 2026 में मजबूत आधार के साथ कदम रख रहा है। आर्थिक विकास स्थिर है, रोजगार बाजार में सुधार दिख रहा है और महंगाई अभी ऐसी नहीं है कि तत्काल और राहत की जरूरत पड़े। इस बयान ने बाजारों को यह संकेत दिया है कि सस्ती पूंजी का दौर फिलहाल थम सकता है।

भारत पर भी पड़ेगा असर

फेड के इस रुख का असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारत में भी महसूस किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी और सेंसेक्स कुछ समय तक सीमित दायरे में घूम सकते हैं। विदेशी निवेशक सतर्क रह सकते हैं और ब्याज दरों से जुड़े सेक्टरों पर दबाव दिख सकता है। हालांकि घरेलू कंपनियों की मजबूत कमाई बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

आखिरी सच

सोना-चांदी की चमक फिलहाल आंखें चौंधिया रही है, लेकिन केडिया एडवाइजरी के अजय केडिया साफ कहते हैं कि यह दौर अंधी दौड़ का नहीं, बल्कि समझदारी का है। लंबी अवधि में बुलियन मजबूत रह सकता है, लेकिन मौजूदा उफान में अनुशासन और सतर्कता ही सबसे बड़ा निवेश साबित हो सकती है।

First Published : January 29, 2026 | 11:07 AM IST