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Economic Survey 2026: फाइनैंशियल सेक्टर के लिए SMC Bill बन सकता है नया रेगुलेटरी गवर्नेंस मॉडल

यदि इस विधेयक को उसकी भावना और प्रावधानों के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे नियामकों, बाजार सहभागियों और निवेशकों के बीच भरोसा दोबारा मजबूत हो सकता है

Last Updated- January 29, 2026 | 8:48 PM IST
SMC Bill
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

Economic Survey 2026: प्रस्तावित सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल (SMC Bill) प्रतिभूति बाजार से आगे बढ़कर व्यापक वित्तीय और प्रशासनिक क्षेत्रों में नियामक व्यवस्था के लिए एक मिसाल बन सकता है। संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 में यह बात कही गई। आर्थिक समीक्षा के अनुसार, यदि इस विधेयक को उसकी भावना और प्रावधानों के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे नियामकों, बाजार सहभागियों और निवेशकों के बीच भरोसा दोबारा मजबूत हो सकता है।

SMC बिल में क्या हैं?

इस कोड में बोर्ड की संरचना, स्वतंत्रता, हितों के टकराव का प्रबंधन, पारदर्शिता, रेगुलेटरी सैंडबॉक्सिंग, निवेशकों की सुरक्षा, मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थाओं (MIIs) का शासन और बिजनेस करने में आसानी जैसे विषय शामिल हैं। इन सुधारों को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा जा सकता है: सेवाओं की डिलीवरी के तरीके, नियामक शासन, और मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थाएं।

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तीन कानूनों की जगह लेगा SMC बिल

SMC बिल को दिसंबर में लोकसभा में पेश किया गया था। इसका मकसद तीन पुराने प्रतिभूति कानूनों को एक साथ लाकर उन्हें सरल और समझने में आसान बनाना है। ये कानून हैं- सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1956; सेबी एक्ट, 1992; और डिपॉजिटरीज एक्ट, 1996। अब इस बिल को और विचार-विमर्श के लिए संसद की एक स्थायी समिति के पास भेजा गया है।

सेबी बोर्ड में बढ़ेगी सदस्यों की संख्या

कोड लागू होने के बाद सेबी के बोर्ड में सदस्यों की संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी, जो अभी 9 हैं। इससे बोर्ड में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की संख्या बढ़ेगी। कोड के तहत सेबी को अपनी नियमावली की प्रभावशीलता और संतुलन समय-समय पर जांचना होगा। इसे बेहतर तरीके से स्वतंत्र बाहरी विशेषज्ञों द्वारा किया जा सकता है। सेबी पहले ही यह तरीका मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थाओं (MIIs) पर लागू करता है।

नियामक शासन का बन सकता है नया मॉडल

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि SMC बिल का ढांचा सिर्फ प्रतिभूति बाजार तक सीमित नहीं है। यह पूरे भारत के वित्तीय और प्रशासनिक क्षेत्रों में नियामक शासन के लिए एक मॉडल बन सकता है। इसके सिद्धांत- पारदर्शिता, सलाह-मशवरा, संतुलन और जवाबदेही- अन्य नियामकों के निर्माण या मौजूदा नियामकों के सुधार में मार्गदर्शन कर सकते हैं।

समीक्षा में यह भी कहा गया कि सेबी के अग्रणी नियामक मॉडल को कानून में बदलकर, SMC बिल भारत को आधुनिक वित्तीय निगरानी ढांचे के डिजाइन में नेतृत्व देने वाला बना रहा है।

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सेबी को जांच के लिए मिलेंगे 180 दिन

इस विधेयक के तहत, सेबी को किसी भी मामले में निरीक्षण या जांच का आदेश देने से रोक दिया गया है, यदि उस मामले की मूल वजह उस आदेश की तारीख से आठ साल से ज्यादा पुरानी हो।

समय-सीमा तय करने के उद्देश्य से, विधेयक में जांच को 180 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य किया गया है। यदि जांच में देरी होती है, तो सेबी को इसके कारण लिखित रूप में दर्ज करने होंगे और किसी पूर्णकालिक सदस्य से समय बढ़ाने की मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा, अंतरिम आदेशों की वैधता 180 दिनों तक सीमित होगी, हालांकि यदि न्यायिक प्रक्रिया, निरीक्षण या जांच लंबित रहती है, तो ऐसे आदेशों को अधिकतम दो साल तक बढ़ाया जा सकता है।

(PTI इनपुट के साथ)

First Published - January 29, 2026 | 8:48 PM IST

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