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Defence Jobs: डिफेंस सेक्टर में नौकरियों की बहार, 30% तक बढ़ी सैलरी

रक्षा तकनीक में नौकरियों की बाढ़, सैलरी भी बढ़ी

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उदिशा श्रीवास्तव   
Last Updated- January 29, 2026 | 9:10 AM IST

देश के रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों में भर्तियां लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। सीआईईएल एचआर के एक अध्ययन से पता चला है कि विभिन्न पदों पर 2022 में लगभग 3,500 लोगों को रखा गया था, यह संख्या वर्तमान अवधि में बढ़कर लगभग 7,000 हो गई है।

अध्ययन के अनुसार रक्षा क्षेत्र में भर्तियों का रुझान अचानक या अल्पकालिक नहीं है, बल्कि यह सालाना आधार पर लगातार बढ़ रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में दीर्घकालीन अवधि के लिए आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण से जुड़े कार्यक्रम मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि लगभग 60 फीसदी कुशल पेशेवरों की मांग रडार सिस्टम, आरएफ इंजीनियरिंग और सुरक्षित संचार प्रौद्योगिकियों से जुड़ी है। यही नहीं, उच्च-तकनीकी रक्षा विशेषज्ञों की भूमिकाओं के लिए मेहनताना भी 2022 के मुकाबले लगभग 30 प्रतिशत बढ़ चुका है।

अध्ययन यह भी कहता है कि रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सबसे ज्यादा एक तिहाई नौकरियां एयर और एरोस्पेस सिस्टम में निकल रही हैं, क्योंकि यह क्षेत्र स्वदेशी लड़ाकू कार्यक्रमों, विमान उन्नयन में तेजी और विनिर्माण तथा एविओनिक्स यानी विमानों के इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के कारण खूब फलफूल रहा है।

पेशेवरों की कुल मांग में साइबर, सी4आईएसआर (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर्स, इंटेलिजेंस, सर्विलांस ऐंड रिकोनिसेंस), इलेक्ट्रॉनिक युद्धक सामग्री और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षेत्र की हिस्सेदारी 26 फीसदी है। नौसेना और समुद्री प्रणाली से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों की मांग 19 फीसदी है जबकि लैंड सिस्टम में 14 फीसदी और मानवरहित प्लेटफॉर्म से संबंधित कार्यों में कुशल पेशेवरों की भर्ती कुल मांग का 10 फीसदी है।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विशेषज्ञों की मांग को पूरा करने के लिए लगभग 20-25 फीसदी रक्षा संगठन आंतरिक स्तर पर कर्मचारियों को आगे बढ़ाने और उन्हें जरूरत के हिसाब से जिम्मेदारी सौंपने जैसी रणनीति अपना रहे हैं। इसमें कहा गया है, ‘मिशन-क्रिटिकल टेक्निकल और प्रोग्राम लीडरशिप भूमिकाओं में लगभग आधे पद उत्तराधिकार योजना के माध्यम से भरे जाते हैं। कंपनियों की यह रणनीति लंबी अवधि के रक्षा कार्यक्रमों में कुशलता और निरंतरता बनाए रखने में मदद करता है।’

सीआईईएल एचआर के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा, ‘भारत के लिए रक्षा क्षेत्र हमेशा से महत्त्वपूर्ण रहा है, लेकिन अब हम इस क्षेत्र में रोजगार की प्रकृति में संरचनात्मक बदलाव देख रहे हैं। युद्ध में अब तेजी से तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। इस कारण क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञों की मांग बढ़ रही है। पूरे रक्षा क्षेत्र में रडार, आरएफ और सुरक्षित संचार बुनियादी कौशल माने जा रहे हैं, जबकि एयरोस्पेस क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र अब उच्च-कौशल, विश्वसनीय और विश्व स्तर पर प्रासंगिक नौकरी के स्रोत के रूप में उभर रहा है।’

First Published : January 29, 2026 | 9:10 AM IST