Editorial: फेड की आजादी पर ट्रंप का दबाव, वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए बढ़ता खतरा
बड़े केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों का बिना पूर्व नियोजित कार्यक्रम के सामने आना या बयान देना सामान्य बात नहीं है। यदि वे ऐसा करते हैं (भले ही कम समय के नोटिस पर) तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत होता है कि हालात सामान्य नहीं हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल […]
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भारत की डिमांड स्टोरी ‘मास बनाम क्लास’ से आगे, कई ‘मिनी इंडिया’ से चल रही है उपभोग अर्थव्यवस्था
भारत में घरेलू उपभोग को लेकर पिछले 20 वर्षों से बहस कुछ ही मुद्दों पर अटकी हुई है और उनके जवाब भी किसी से छुपे नहीं हैं। अब थोड़ा साहस दिखाने और यह कहने का समय आ गया है कि ‘यह वह धारणा या आंकड़े नहीं हैं जो हम पसंद करते हैं मगर आइए इन्हें […]
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वित्तीय बाजारों में असली सुधार नियम बनाने से नहीं, बल्कि उनके सख्त अमल से होगा
इस बात से सभी सहमत होंगे कि देश के वित्तीय क्षेत्र के कानून प्रवर्तन में जबरदस्त सुधार की आवश्यकता है। अक्सर इस बात की अनदेखी कर दी जाती है कि गलत काम करने वालों पर समय पर और सख्त कार्रवाई अपने आप में एक मजबूत निरोधक का काम करती है। ऐसी प्रभावी कार्रवाई से कई […]
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Netflix के भारत में 10 साल: कैसे स्ट्रीमिंग ने भारतीय मनोरंजन उद्योग की पूरी तस्वीर बदल दी
ब्यू विलिमन की फिल्म ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ (नेटफ्लिक्स, 2013) की शुरुआत गुस्से में भरे केविन स्पेसी से होती है। वह सांसद फ्रैंक अंडरवुड का किरदार निभाते हैं। नव निर्वाचित राष्ट्रपति उन्हें विदेश मंत्री पद के लिए नहीं चुनते हैं। अंडरवुड और उनकी पत्नी क्लेयर, जिनका किरदार रॉबिन राइट ने बखूबी निभाया है, सत्ता हासिल करने […]
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