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Netflix के भारत में 10 साल: कैसे स्ट्रीमिंग ने भारतीय मनोरंजन उद्योग की पूरी तस्वीर बदल दी

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नेटफ्लिक्स और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स द्वारा बीते दस वर्षों में मनोरंजन उद्योग का स्वरूप बदला गया है और भारतीय कहानियों को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाया गया है

Last Updated- January 11, 2026 | 10:38 PM IST
Netflix
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ब्यू विलिमन की फिल्म ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ (नेटफ्लिक्स, 2013) की शुरुआत गुस्से में भरे केविन स्पेसी से होती है। वह सांसद फ्रैंक अंडरवुड का किरदार निभाते हैं। नव निर्वाचित राष्ट्रपति उन्हें विदेश मंत्री पद के लिए नहीं चुनते हैं। अंडरवुड और उनकी पत्नी क्लेयर, जिनका किरदार रॉबिन राइट ने बखूबी निभाया है, सत्ता हासिल करने के लिए क्रूर रवैया अपनाते हैं। छल, झूठ, विश्वासघात और हत्या जैसे तरीकों से वह उपराष्ट्रपति और फिर राष्ट्रपति पद तक पहुंचते हैं।

हाउस ऑफ कार्ड्स (6 सीजन) एक बेहद दिलचस्प श्रृंखला रही, जिसने कई एमी और गोल्डन ग्लोब पुरस्कार जीते। वह नेटफ्लिक्स की पहली ओरिजिनल सीरीज थी। यह मीडिया और मनोरंजन जगत पर नेटफ्लिक्स के प्रभाव को बयां करने का सबसे सटीक तरीका भी है। वह पहली पेड स्ट्रीमिंग सेवा ऐसी उत्प्रेरक साबित हुई जिसने वैश्विक मीडिया व्यवस्था को हाउस ऑफ कार्ड्स (ताश के पत्तों) की तरह ही ढहा दिया। 

हाल ही में नेटफ्लिक्स ने भारत में 10 साल पूरे कर लिए हैं। ऐसे में पूरी दुनिया और भारत में मीडिया मॉडल के चरमराने और उसके बाद उसे दुरुस्त करने के प्रयासों पर विचार करने का यह एक उपयुक्त समय है। 

वर्ष 1990 के दशक में नेटफ्लिक्स डीवीडी किराये पर देता था। उसने यूट्यूब आने के चार साल बाद 2010 में स्ट्रीमिंग शुरू की। हालांकि, ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ सीरीज के निर्माण ने सब कुछ बदल दिया। पहले दो सीजन के 26 एपिसोड बनाने में 10 करोड़ डॉलर का खर्च आया, जो एक पूरी फिल्म के बजट के बराबर था। एक सीजन के सभी एपिसोड एक साथ रिलीज किए गए और इसे देखने के लिए 8 से 12 डॉलर प्रति माह शुल्क देना होता था, जबकि केबल टीवी का शुल्क 50 डॉलर या उससे अधिक था। यह मनोरंजन जगत में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव था, खासकर 1990 के दशक के उत्तरार्ध में एमपी3 जैसी कंप्रेशन तकनीकों ने संगीत उद्योग को झकझोर दिया था।

नेटफ्लिक्स ने ऑन-डिमांड, भुगतान-आधारित स्ट्रीमिंग की संभावनाओं को प्रदर्शित किया, जो एक ही समय में लीनियर टेलीविजन, थिएटर रिलीज और समाचार चैनलों को प्रतिस्थापित कर सकती थी। और उसने उस क्षमता को साकार भी किया। अब वह 39 अरब डॉलर के राजस्व और 30 करोड़ से अधिक ग्राहकों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी भुगतान-आधारित स्ट्रीमिंग सेवा है।

ये वो दर्शक थे जिनके लिए दूसरे भी तरस रहे थे। चाहे बात ज्यादा उत्पाद बेचने की हो (एमेजॉन) या लोगों को ज्यादा खोज करने के लिए प्रेरित करने की (गूगल), कई बड़ी तकनीकी कंपनियों को भौगोलिक क्षेत्रों, तकनीकों और उपकरणों में फैले विशाल दर्शकों की जरूरत थी। इनमें से ज्यादातर, जैसे एमेजॉन और ऐपल, फॉक्स, डिज्नी, वार्नर जैसी पुरानी मीडिया कंपनियों के साथ वीडियो स्ट्रीमिंग में हाथ आजमा रहे थे। लेकिन नेटफ्लिक्स के बाद स्ट्रीमिंग एक गंभीर क्षेत्र बन गया और एमेजॉन प्राइम वीडियो, ऐपल और कई अन्य कंपनियों ने भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली। जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि जिनके पास सबसे ज्यादा संसाधन और प्लेटफॉर्म होंगे उनकी सौदेबाजी की शक्ति सबसे ज्यादा होगी।

टेक्नॉलजी और मीडिया क्षेत्र की बड़ी कंपनियों का राजस्व 160 अरब डॉलर से 600 अरब डॉलर के बीच है। सबसे बड़े पुराने स्टूडियो का राजस्व 30 अरब डॉलर से 80 अरब डॉलर के बीच है। यही कारण है कि 2017 में रूपर्ट मर्डोक ने ट्वेंटी-फर्स्ट सेंचुरी फॉक्स की मनोरंजन परिसंपत्तियों, जिनमें स्टार इंडिया भी शामिल थी, को वॉल्ट डिज्नी कंपनी को बेचने का फैसला किया। लगभग उसी समय, ज़ी कंपनी प्रमोटरों द्वारा उत्पन्न ऋण संकट से जूझ रही थी और उसने अपने हिस्से की बिक्री करने का निर्णय लिया।

सोनी-ज़ी का विलय तो नहीं हो पाया, लेकिन पीवीआर-आईनॉक्स और जियोस्टार (स्टार इंडिया और वायाकॉम 18) जैसे अन्य विलय हो गए। जिस तरह वैश्विक मानचित्र में बदलाव आया, उसी तरह भारतीय मानचित्र में भी बदलाव आया। यह एकीकरण वैश्विक स्तर पर और भारत में भी जारी है। 

यह तो व्यापारिक कहानी है। उपभोक्ता पक्ष को समझने के लिए नेटफ्लिक्स पर कुछ देखें।

बाल्टासर कोर्माकुर की नेटफ्लिक्स सीरीज़ ‘ट्रैप्ड’ की शुरुआत आइसलैंड के रेक्याविक के उत्तर में स्थित एक छोटे से कस्बे में एक शव मिलने से होती है। जैसे-जैसे शवों का ढेर लगता जाता है और बर्फीले तूफान से कस्बा कट जाता है, भारी-भरकम, लेकिन दयालु पुलिस प्रमुख एंड्री ओलाफसन और उनके डिप्टी हिनरिका और आसगीर पर मामले की तह तक जाने का जिम्मा आ जाता है। कड़ाके की ठंड, बर्फबारी, हिमस्खलन, फंसे हुए यात्रियों से भरा जहाज, बिजली गुल होना, ये सब मिलकर फंसे होने के एहसास को और भी बढ़ा देते हैं। जैसे-जैसे यह आइसलैंडिक ड्रामा आपको अपनी दुनिया में खींचता जाता है, आप एक नजर और लंबे मौन को पढ़ना सीख जाते हैं और कैमरे की बेबाक और ईमानदार प्रस्तुति से कतराना बंद कर देते हैं। बीस एपिसोड और दो सीजन देखने के बाद, मैं इस ‘नॉर्डिक नॉयर’ (जैसा कि आलोचक इसे कहते हैं) की दीवानी हो गई।

दस साल पहले, किसी आइसलैंडिक शो को ढूंढना, उसका आनंद लेना और बार-बार देखने की इच्छा रखना कितना संभव था? स्ट्रीमिंग वीडियो या ओटीटी द्वारा दुनिया भर से पेश की जाने वाली कहानियों का भंडार असाधारण है और नेटफ्लिक्स ने हमें इनसे परिचित कराया। फिर अन्य प्लेटफॉर्म्स ने भी इसका अनुसरण किया।

जिस तरह आप और मैं कोलंबियाई, स्पैनिश, जर्मन, तुर्की या कोरियाई शो और फिल्में खोज-देख रहे हैं, उसी तरह दुनिया भर में लाखों लोग कोहरा, पाताल लोक, मिर्जापुर, फैमिली मैन या दिल्ली क्राइम जैसी भारतीय फिल्मों और शो को खोज रहे हैं। ये स्थानीय कहानियां हैं, जिन्हें भारतीय कहानीकारों ने भारतीय भाषाओं में सुनाया है। स्ट्रीमिंग के जरिये इन्हें वैश्विक स्तर पर पहुंचाया जा रहा है, जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी। नेटफ्लिक्स या एमेजॉन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने वाला हर भारतीय शो 200 देशों में उपलब्ध है। इनमें से कई शो की समीक्षा दुनिया भर के कुछ प्रमुख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और टीवी चैनलों में की जाती है। विदेश में रिलीज हुई कुछ सबसे बड़ी भारतीय फिल्में- फॉक्स स्टूडियो की माई नेम इज खान (2010) या डिज्नी की दंगल (2016)- को यह लोकप्रियता नहीं मिली।

दशकों से ‘क्रॉसओवर फिल्म’ की चर्चा के बाद, भारतीय कहानियां आखिरकार क्रॉसओवर कर रही हैं। उन्हें नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय एमी पुरस्कारों के लिए नामांकित किया जा रहा है। वर्ष 2020 में दिल्ली क्राइम और 2023 में वीर दास की लैंडिंग ने पुरस्कार जीते। ये दोनों नेटफ्लिक्स पर थे। दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म निर्माण उद्योग अब अपनी कहानी कहने की कला को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर रहा है। नेटफ्लिक्स (औ​र स्ट्रीमिंग) के 10 वर्षों ने भारत को जो सबसे अच्छी चीजें दी हैं, उनमें से यह एक है।

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First Published - January 11, 2026 | 10:38 PM IST

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