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भूराजनीतिक तनाव और IPO की चिंता के बीच IT शेयरों में गिरावटनिर्यात प्रोत्साहन मिशन की योजनाओं की समीक्षा संभव, कई योजनाओं को नहीं मिल रही पर्याप्त प्रतिक्रियाआशा भोसले का नया नगमा और खामोश सुरों की वापसी, निधन के बाद बढ़े डिजिटल व्यूजबिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने पर जोर, चार दिन में रेक लोडिंग 370 से बढ़कर 444 हुईअगस्त में वित्तीय क्षेत्र को मिला एफपीआई निवेश का एक तिहाई से ज्यादा हिस्साभारत को तेज विकास के लिए निर्यात, निवेश और विनिर्माण पर देना होगा जोर: आचार्यभारत के यात्री वाहन बाजार में पहली बार वैकल्पिक ईंधन वाहनों की बिक्री पेट्रोल से आगेबड़े कारोबारी समूह के निवेश से पश्चिम बंगाल में औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगी रफ्ताररिश्वत के आरोपों पर PVR आईनॉक्स की शुरुआती जांच पूरी, कोई सबूत नहीं मिलामिंडा कॉर्प की वैश्विक बाजार में पकड़ मजबूत करने की तैयारी, निर्यात लक्ष्य 1,500 करोड़ रुपये

लेखक : अजय त्यागी

आज का अखबार, लेख

भारत को ESG डिस्क्लोजर ग्लोबल रिपोर्टिंग मानकों के अनुरूप करने चाहिए

पांच वर्ष पहले 2021 में जब बाजार नियामक ने 2022-23 से भारत में सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों के लिए कारोबार जवाबदेही एवं स्थायित्व रिपोर्टिंग (बीआरएसआर) खुलासों को अनिवार्य बनाया था तब इसे कंपनियों द्वारा गैर वित्तीय प्रकटीकरण को अनिवार्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना गया था। इस मामले में भारत अग्रणी देशों में […]

आज का अखबार, लेख

FPI को लुभाने से ज्यादा FDI बढ़ाने पर हो फोकस, निवेश नीति में पारदर्शिता है जरूरी

विदेशी निवेश को बढ़ावा देना हमेशा से सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। हाल के वर्षों में यह विषय और भी महत्त्वपूर्ण हो गया है क्योंकि भारतीय मुद्रा (रुपये) को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। विदेशी पूंजी भारत में कई माध्यमों से आ सकती है। इनमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश […]

आज का अखबार, लेख

पेट्रोलियम मूल्य निर्धारण की उलझी पहेली: बाजार आधारित कीमतों को लागू करने में क्यों हिचक रही सरकार?

कितने लोगों को याद है कि सरकार ने वर्ष 2002 में पेट्रोलियम उत्पादों के लिए प्रशासित मूल्य निर्धारण तंत्र (एपीएम) खत्म कर दिया था और उसी वर्ष 1 अप्रैल से पेट्रोल एवं डीजल के लिए बाजार आधारित मूल्य निर्धारण का ऐलान किया था? तब से दो दशक गुजर जाने के बाद भी सरकार यह निर्णय […]

आज का अखबार, लेख

गैस मोनोपोली पर चोट: सरकारी ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन वर्चस्व से दब रही प्रतिस्पर्धा

पश्चिम एशिया संकट के कारण देश में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी की जो कमी बनी हुई है उसने आम परिवारों का प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल की ओर ध्यान आकर्षित किया है। भारत प्राकृतिक गैस और एलपी​जी दोनों के मामले में आयात पर निर्भर है। घरेलू खपत के मामले में हम क्रमश: 50 से 60 […]

आज का अखबार, लेख

सरकार को कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार के नियमन के लिए SMC बिल में संशोधन करना चाहिए

वित्तीय क्षेत्र में सबसे जरूरी सुधारों की बात की जाए तो ‘बॉन्ड बाजार का एकीकरण’ उनमें एक होगा। इससे सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) और कॉरपोरेट बॉन्ड के लिए नियामक व्यवस्था का एकीकरण हो जाएगा। इससे निवेशकों, कारोबारियों एवं अन्य हितधारकों को काफी सहूलियत होगी, साथ ही जी-सेक में खुदरा भागीदारी बढ़ेगी और कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार का […]

आज का अखबार, लेख

जब व्यावसायिक हितों से टकराती है प्रवर्तन शक्ति, बाजार का भरोसा कमजोर होता है

बाजार अधोसंरचना संस्थान (एमआईआई) यानी स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन और डिपॉजिटरी आदि की देश के पूंजी बाजारों के विकास और नियमन में अहम भूमिका है। प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक 2025 का पांचवां अध्याय एमआईआई के पंजीयन और नियमन से संबंधित है। यह केवल इस बात की पुष्टि नहीं करता है कि मौजूदा कानून के तहत […]

आज का अखबार, लेख

वित्तीय बाजारों में असली सुधार नियम बनाने से नहीं, बल्कि उनके सख्त अमल से होगा

इस बात से सभी सहमत होंगे कि देश के वित्तीय क्षेत्र के कानून प्रवर्तन में जबरदस्त सुधार की आवश्यकता है। अक्सर इस बात की अनदेखी कर दी जाती है कि गलत काम करने वालों पर समय पर और सख्त कार्रवाई अपने आप में एक मजबूत निरोधक का काम करती है। ऐसी प्रभावी कार्रवाई से कई […]

आज का अखबार, लेख

सेबी के सरप्लस पर सीमा क्यों? बाजार नियामक की ताकत कमजोर होने का खतरा

संसद के हाल ही में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र में सरकार ने प्रतिभूति बाजारों से संबंधित कानूनों को समेकित और संशोधित करने के लिए प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025, विधेयक पेश किया। यह लेख विधेयक के खंड 124 पर केंद्रित है, जो भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के वार्षिक अधिशेष सामान्य कोष को भारत की […]

आज का अखबार, लेख

लिस्टिंग नियम में ढील की जरूरत नहीं, नियमों में नरमी से कॉर्पोरेट गवर्नेंस में नहीं मिलेगी मदद

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हाल ही में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) की अनिवार्यता शिथिल करने और बड़े इश्यूअर्स को नियामकीय सीमा पूरी करने के लिए अधिक समय देने का निर्णय लिया है। इस फैसले के उद्देश्य तथा तर्क को सार्वजनिक निवेशकों और कॉरपोरेट संचालन के दृष्टिकोण से परखा […]

आज का अखबार, लेख

महंगाई पर RBI की कड़ी नजर जरूरी, संसद की निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने मुद्रास्फीति-लक्ष्यीकरण ढांचे की समीक्षा के लिए एक परिचर्चा पत्र जारी कर अच्छा कदम उठाया है। मार्च 2026 में मुद्रास्फीति-लक्ष्यीकरण ढांचे की अनिवार्य दूसरी पांच वर्षीय समीक्षा से पहले इस परिचर्चा पत्र के जरिये प्रमुख पहलुओं पर प्रतिक्रिया मांगी गई है। वर्ष 2021 में पहली पांच वर्षीय समीक्षा में इस […]

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