सरकार को कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार के नियमन के लिए SMC बिल में संशोधन करना चाहिए
वित्तीय क्षेत्र में सबसे जरूरी सुधारों की बात की जाए तो ‘बॉन्ड बाजार का एकीकरण’ उनमें एक होगा। इससे सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) और कॉरपोरेट बॉन्ड के लिए नियामक व्यवस्था का एकीकरण हो जाएगा। इससे निवेशकों, कारोबारियों एवं अन्य हितधारकों को काफी सहूलियत होगी, साथ ही जी-सेक में खुदरा भागीदारी बढ़ेगी और कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार का […]
जब व्यावसायिक हितों से टकराती है प्रवर्तन शक्ति, बाजार का भरोसा कमजोर होता है
बाजार अधोसंरचना संस्थान (एमआईआई) यानी स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन और डिपॉजिटरी आदि की देश के पूंजी बाजारों के विकास और नियमन में अहम भूमिका है। प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक 2025 का पांचवां अध्याय एमआईआई के पंजीयन और नियमन से संबंधित है। यह केवल इस बात की पुष्टि नहीं करता है कि मौजूदा कानून के तहत […]
वित्तीय बाजारों में असली सुधार नियम बनाने से नहीं, बल्कि उनके सख्त अमल से होगा
इस बात से सभी सहमत होंगे कि देश के वित्तीय क्षेत्र के कानून प्रवर्तन में जबरदस्त सुधार की आवश्यकता है। अक्सर इस बात की अनदेखी कर दी जाती है कि गलत काम करने वालों पर समय पर और सख्त कार्रवाई अपने आप में एक मजबूत निरोधक का काम करती है। ऐसी प्रभावी कार्रवाई से कई […]
सेबी के सरप्लस पर सीमा क्यों? बाजार नियामक की ताकत कमजोर होने का खतरा
संसद के हाल ही में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र में सरकार ने प्रतिभूति बाजारों से संबंधित कानूनों को समेकित और संशोधित करने के लिए प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025, विधेयक पेश किया। यह लेख विधेयक के खंड 124 पर केंद्रित है, जो भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के वार्षिक अधिशेष सामान्य कोष को भारत की […]
लिस्टिंग नियम में ढील की जरूरत नहीं, नियमों में नरमी से कॉर्पोरेट गवर्नेंस में नहीं मिलेगी मदद
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हाल ही में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) की अनिवार्यता शिथिल करने और बड़े इश्यूअर्स को नियामकीय सीमा पूरी करने के लिए अधिक समय देने का निर्णय लिया है। इस फैसले के उद्देश्य तथा तर्क को सार्वजनिक निवेशकों और कॉरपोरेट संचालन के दृष्टिकोण से परखा […]
महंगाई पर RBI की कड़ी नजर जरूरी, संसद की निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने मुद्रास्फीति-लक्ष्यीकरण ढांचे की समीक्षा के लिए एक परिचर्चा पत्र जारी कर अच्छा कदम उठाया है। मार्च 2026 में मुद्रास्फीति-लक्ष्यीकरण ढांचे की अनिवार्य दूसरी पांच वर्षीय समीक्षा से पहले इस परिचर्चा पत्र के जरिये प्रमुख पहलुओं पर प्रतिक्रिया मांगी गई है। वर्ष 2021 में पहली पांच वर्षीय समीक्षा में इस […]
कारोबार में उलझी सरकार, 2021 के विनिवेश लक्ष्यों को जल्द से जल्द लागू करने की जरूरत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2021 में आयोजित एक वेबिनार में ठीक ही कहा था कि ‘सरकार को स्वयं कारोबार करने के झमेले में नहीं पड़ना चाहिए’। उनका यह संक्षिप्त भाषण काफी संजीदगी से तैयार किया गया था और इसमें अंतर्निहित संदेश पूरी तरह स्पष्ट था। प्रधानमंत्री के उक्त बयान के बाद वित्त वर्ष 2021-22 […]
विकसित भारत और नेट जीरो लक्ष्यों के लिए स्पष्टता जरूरी
आकांक्षाएं जब पक्के इरादों से जुड़ी होती हैं तब किसी भी व्यक्ति, कंपनी या देश को आगे बढ़ने और तरक्की करने के लिए प्रेरित करती हैं। कोई भी बड़ी कंपनी अपने लक्ष्यों और उद्देश्यों से जुड़े दस्तावेजों में अपनी आकांक्षाएं दिखाती है। अगर देशों की बात करें तो उनकी कई आकांक्षाएं अलग-अलग सरकारी दस्तावेजों में […]
भारत में कार्बन क्रेडिट बाजार की बुनियाद तैयार, लेकिन कई चुनौतियां बाकी
भारत सरकार ने जून 2023 में कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस) की अधिसूचना जारी की थी और उसके बाद से कई कदम उठाए गए ताकि इसको अमलीजामा पहनाया जा सके। उम्मीद है कि ट्रेडिंग 2026 में शुरू हो जाएगी और वर्ष 2027 तक इसका एक स्थिर बाजार हो जाएगा। इस लेख में हम कार्बन बाजार […]
नियामकों के लिए खुलासे की व्यवस्था की सीमाएं
दुनिया भर में वित्तीय बाजार का नियमन मोटे तौर पर डिस्क्लोजर यानी खुलासे की व्यवस्था पर आधारित होता है। विनियमित संस्थाओं से कहा जाता है कि वे समय-समय पर खुलासा करें। यह यकीनन समय की कसौटी पर खरी और मजबूत व्यवस्था है क्योंकि जितना अधिक खुलापन हो उतना बेहतर। डिस्क्लोजर प्रणाली, कैविएट एम्प्टर के सिद्धांत […]









