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लेखक : अजय त्यागी

आज का अखबार, लेख

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत को चाहिए ठोस और कारगर नीति

जलवायु परिवर्तन ऐसी समस्या है, जो आम लोगों पर असर डालती है। हाल के वर्षों में बढ़ी प्राकृतिक आपदाएं इस बात की बार-बार याद दिलाती है। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की एक बड़ी नाकामी विकसित देशों का उस वादे से मुकरना है, जिसमें उन्होंने विकासशील देशों को वित्तीय मदद और तकनीक देने की […]

आज का अखबार, लेख

बैंकों के नियमन में नियामकीय संतुलन

दुनिया के अधिकांश देशों खासकर भारत जैसे उभरते देशों में वित्तीय क्षेत्र पर बैंकों का दबदबा है। बैंक महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे अपनी पहुंच के जरिये वित्तीय समावेशन को गति देते हैं, ऋण को वांछित क्षेत्रों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं और सरकारों को विभिन्न लक्ष्य पाने में सहायता करते हैं। बैंकों के […]

आज का अखबार, लेख

इन्फ्लेशन टारगेट तय करने के तरीकों में हो बदलाव…

नई सरकार को मुद्रास्फीति का लक्ष्य (Inflation target) निर्धारित करते समय व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए। बता रहे हैं अजय त्यागी मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए दुनिया के केंद्रीय बैंकों द्वारा तय लक्ष्यों के प्रभाव और अब उनके औचित्य पर सवाल खड़े होने लगे हैं। कोविड महामारी के बाद ब्याज दर-मुद्रास्फीति के समीकरण को […]

आज का अखबार, लेख

खुदरा निवेशकों पर भरोसा बरकरार रखने का वक्त

भारतीय पूंजी बाजारों में 2020-21 के बाद से खुदरा भागीदारी में इजाफा हुआ है। करीब 15 करोड़ के आंकड़े के साथ डीमैट खाते 1 अप्रैल, 2020 की तुलना में 275 प्रतिशत अधिक हो चुके हैं। शेयर बाजार के नकदी क्षेत्र में कारोबार करने वाले आम लोगों का अनुपात करीब 40 फीसदी है। सूचीबद्ध कंपनियों में […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: म्युचुअल फंड का बढ़ता दबदबा, निवेशकों का भरोसा बनाए रखना जरूरी

निवेशकों का भरोसा बरकरार रखना अहम है क्योंकि केवल एक खराब प्रकरण के कारण यह पूरा सिलसिला बिगड़ सकता है। बता रहे हैं अजय त्यागी दिसंबर में भारत में म्युचुअल फंड द्वारा प्रबंधित परिसंपत्ति का स्तर 50 लाख करोड़ रुपये का स्तर पार कर गया जो एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इसमें दो राय नहीं कि […]

आज का अखबार, लेख

एनबीएफसी से जुड़ी चिंताओं पर रिजर्व बैंक गंभीर

असुरक्षित उपभोक्ता ऋण पर जोखिम भार बढ़ाने के भारतीय रिजर्व बैंक के निर्णय से एनबीएफसी पर दोधारी तलवार लटक गई है। बता रहे हैं अजय त्यागी और रचना बैद गै र-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) पिछले कुछ समय से गलत कारणों से चर्चाओं में रही हैं। सेंटर फॉर एडवांस्ड फाइनैंशियल रिसर्च ऐंड लर्निंग ने हाल में […]

आज का अखबार, लेख

बेहतर कल के लिए मजबूत उत्सर्जन व्यापार ढांचा की जरूरत

राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सुनियोजित एवं नियमित घरेलू उत्सर्जन व्यापार ढांचे की आवश्यकता है। बता रहे हैं अजय त्यागी सरकार ने इस वर्ष जून में कार्बन क्रेडिट रेटिंग स्कीम (सीसीटीएस) की अधिसूचना जारी कर स्वागत योग्य कदम उठाया है। सरकार ने ऊर्जा संरक्षण […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: बीआरएसआर फाइलिंग की अहमियत

इनका इस्तेमाल ईएसजी मानकों में सुधार तथा संवेदनशील स्थितियों के विश्लेषण में किया जाना चाहिए तथा पर्यवेक्षण और नियमन के लिए उपाय तैयार किए जाने चाहिए। बता रहे हैं अजय त्यागी और रचना वैद मौजूदा वर्ष बाजार पूंजीकरण के आधार पर देश की 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी ऐंड सस्टेनबिलिटी रिपोर्ट (बीआरएसआर) के तहत […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: CSR व सोशल स्टॉक एक्सचेंज को जोड़ना

भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां कुछ खास मानकों को पूरा करने वाली कंपनियां सांविधिक हैं और जिन्हें अपने मुनाफे का एक हिस्सा कारोबारी सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों में व्यय करना होता है। भारतीय कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 135 में यह कानूनी प्रावधान किया गया है जबकि अधिनियम का शेड्यूल […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग और म्युचुअल फंड एक साथ होने के जो​खिम

म्युचुअल फंड के क्षेत्र में बैंकों का दबदबा वित्तीय स्थिरता को लेकर कई प्रश्न उत्पन्न करता है जिनके जवाब सावधानीपूर्वक देने की आवश्यकता है। बता रहे हैं अजय त्यागी और रचना वैद भारत के लिए म्युचुअल फंड का कारोबार सही साबित हुआ है। फिलहाल देश में 43 म्युचुअल फंड हैं जो 14.74 करोड़ पोर्टफोलियो की […]

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