facebookmetapixel
Advertisement
तेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

इक्विटी SIP निवेश में गिरावट, अस्थिर बाजार के बीच निवेशकों का रुझान बदला

Advertisement

इक्विटी बाजार में लंबे समय से चल रही अ​स्थिरता SIP निवेश की मजबूती की परीक्षा ले रही है

Last Updated- February 25, 2026 | 11:14 PM IST
SIP

जनवरी में सक्रिय इक्विटी योजनाओं में एसआईपी निवेश में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि यह गिरावट दुर्लभ थी। इक्विटी बाजार में लंबे समय से चल रही अ​स्थिरता एसआईपी निवेश की मजबूती की परीक्षा ले रही है।

एसआईपी निवेश के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सक्रिय इक्विटी योजनाओं ने पिछले महीने 25,091 करोड़ रुपये का सकल एसआईपी निवेश हासिल किया, जो दिसंबर 2025 के 25,332 करोड़ रुपये के आंकड़े से 240 करोड़ रुपये कम है। पिछली बार सक्रिय इक्विटी एसआईपी आवक में गिरावट फरवरी-मार्च 2025 में देखी गई थी, जो शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच हुई थी।

एसआईपी निवेश हाल के वर्षों में शेयर बाजार के लिए मददगार रहा है। इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली का असर कम करने में मदद मिली है। वर्ष 2025 में एसआईपी निवेश की मदद से म्युचुअल फंडों ने इ​क्विटी बाजार में करीब 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया। निवेशकों ने पिछले साल सक्रिय इ​क्विटी योजनाओं में 2.8 लाख करोड़ रुपये लगाए, जबकि एक बार के निवेश में कमी आई थी।

हालांकि, उम्मीद से कम शॉर्ट-टर्म रिटर्न, ज्यादा उतार-चढ़ाव और सोने तथा चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) और फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) के साथ-साथ हाइब्रिड योजनाओं में बढ़ती दिलचस्पी ने इक्विटी एसआईपी निवेश पर दबाव डालना शुरू कर दिया है।

एसबीआई म्युचुअल फंड के उप प्रबंध निदेशक (एमडी) और संयुक्त मुख्य कार्या​धिकारी डी पी सिंह ने कहा, ‘उद्योग हाल के वर्षों में हाइब्रिड फंडों की सलाह दे रहा है। अब जब उन्होंने अल्पाव​धि में इक्विटी योजनाओं से बेहतर प्रदर्शन शुरू कर दिया है, तो उनमें दिलचस्पी बढ़ रही है। गोल्ड और सिल्वर योजनाओं में भी एसआईपी निवेश में बढ़ोतरी देखी जा रही है।’

पिछले एक साल में हाइब्रिड योजनाओं में लगातार तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ईटीएफ और एफओएफ में तेज वृद्धि देखी गई है। जनवरी में, निवेशकों ने एसआईपी के जरिये ईटीएफ और एफओएफ में 1,441 करोड़ रुपये डाले, जो जनवरी 2025 में दर्ज 371 करोड़ रुपये से लगभग चार गुना ज्यादा हैं। यह तेज बढ़ोतरी गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ और एफओएफ की वजह से होने की संभावना है।

वाटरफील्ड एडवाइजर्स के वरिष्ठ निदेशक, इक्विटी प्रमुख, विपुल भवर ने कहा, ‘इक्विटी एसआईपी की निरंतर वृद्धि में ठहराव का कारण मुनाफावसूली, ‘सेफ हेवन’ यानी सुर​क्षित समझी जाने वाली संपत्तियों की ओर भारी झुकाव और सतर्क धारणा को दिया जा सकता है। निवेशकों ने वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार अनिश्चितताओं के खिलाफ बचाव के रूप में कीमती धातुओं पर ध्यान केंद्रित किया।’

हाइब्रिड फंड एसआईपी प्रवाह जनवरी 2025 में 1,657 करोड़ रुपये से बढ़कर जनवरी 2026 में 2,023 करोड़ रुपये हो गया है। दूसरी श्रेणी में निवेश प्रवाह बढ़ने से कुल एसआईपी निवेश 31,002 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड ऊंचे स्तर पर बना रहा, जबकि सक्रिय इक्विटी प्रवाह में गिरावट आई।

दूसरी श्रेणी के मुकाबले इक्विटी एसआईपी प्रवाह में तुलनात्मक रूप से कम वृद्धि की वजह से कुल एसआईपी प्रवाह में उनकी हिस्सेदारी में गिरावट आई है। जनवरी 2025 में उनकी हिस्सेदारी 82.5 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 80.9 प्रतिशत रह गई है।

Advertisement
First Published - February 25, 2026 | 11:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement