facebookmetapixel
Advertisement
भारत में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं, 60 दिन का स्टॉक मौजूद: सरकारभारत की तेल जरूरतें क्यों पूरी नहीं कर पा रहा ईरानी क्रूड ऑयल? चीन की ओर मुड़े जहाजलाइन लगाने की जरूरत नहीं, घर पहुंचेगा गैस सिलेंडर: सीएम योगी आदित्यनाथऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

‘EV सेक्टर में आएगा बड़ा उछाल’, BS ‘मंथन’ में एक्सपर्ट्स ने कहा: चुनौतियों के बावजूद रफ्तार है बरकरार

Advertisement

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मजबूत अर्थव्यवस्था और बेहतर तकनीक के दम पर भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच तेजी से बढ़ेगी, जिससे 2030 तक जलवायु लक्ष्यों को पाना आसान होगा

Last Updated- February 25, 2026 | 11:11 PM IST
BS Manthan
विन फास्ट इंडिया के सीईओ तपन घोष, ऑयलर मोटर्स के संस्थापक और सीईओ सौरव कुमार, बोल्ट डॉट अर्थ के सीईओ राघव भारद्वाज BS 'मंथन' में अपनी बात रखते हुए

भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के पारिस्थितिकी तंत्र में कई बुनियादी चुनौतियां होने के बावजूद अब यहां से ईवी उद्योग तेजी से आगे बढ़ेगा। ईवी उद्योग के दिग्गजों ने कहा कि अभी भारत के ईवी तंत्र के समक्ष चार्ज होने के बाद दूरी की चिंता, अपर्याप्त आधारभूत ढांचा, चार्जर अपटाइम व रखरखाव की खामियां, बैटरी का डीग्रेडेशन, तेजी से बदलते सुरक्षा मानक और वाणिज्यिक वाहनों में ईवी के अधिक उपयोग का दबाव आदि चिंताएं हैं। फिर भी मजबूत यूनिट इकॉनमी, बढ़ता दायरा, तकनीक में सुधार और सहायक नीतिगत रफ्तार से यह भरोसा बढ़ता है कि अब ईवी वाहन तेजी से गति पकड़ेगे।

बिज़नेस स्टैंडर्ड के सालाना कार्यक्रम मंथन 2026 में विशेषज्ञों की परिचर्चा हुई। इसमें विन फास्ट इंडिया के सीईओ तपन घोष, ऑयलर मोटर्स के संस्थापक और सीईओ सौरव कुमार, बोल्ट डॉट अर्थ के सीईओ राघव भारद्वाज ने शिरकत की। बिज़नेस स्टैंडर्ड के दीपक पटेल के साथ हुई इस बातचीत में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि ईवी के कार्यान्वयन में चुनौतियां हैं लेकिन ईवी को लेकर दिशा स्पष्ट है।

घोष  ने आंकड़ों में बात की। उन्होंने कहा कि बीते छह वर्षों में ईवी की सीएजीआर दर 63 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, ‘मुझे ज्यादा उम्मीद है कि यह वास्तविक बढ़ोतरी है और यह टिकाऊ है।’ उन्होंने कहा कि एक बार जब उद्योग सामूहिक रूप से वर्तमान बाधाओं को दूर कर लेता है तो ‘हम बदलाव के स्तर (इन्फ्लेक्शन पॉइंट) पर पहुंच जाएंगे और फिर यह तेज से उछाल लेने वाला है।’

कारों के मामले में पहुंच दो गुनी हो गई है। यह दो साल पहले दो प्रतिशत थी जो दो साल में बढ़कर पिछले कैलंडर वर्ष तक चार प्रतिशत हो गई है। इन कारों की मासिक बिक्री 6000-7000 वाहन से बढ़कर करीब 17,000 हो गई है। इन वाहनों का सालाना पंजीकरण करीब 1,77,000 के आंकड़े को छू रहा है। उन्होंने इंगित किया कि यह बदलाव तेजी से आया है और यह गति मजबूत बनी हुई है।

कुमार ने कहा कि वाणिज्यिक वाहनों में विद्युतीकरण के रुझान कम हैं और इसका ज्यादा कारण अर्थशास्त्र है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि वाहनों का विद्युतीकरण होगा। सवाल यह है कि किस गति से होगा।’ उन्होंने तर्क दिया कि आंकड़े बताते हैं कि जीएसटी में बदलावों – जिससे डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहन सस्ते हो गए हैं – या सब्सिडी में बदलावों के बावजूद विद्युतीकरण की दरें ऊंची बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि अब पेट्रोल-डीजल वाहनों (आईसीई) के इंजन मॉडलों के समान मूल्य पॉइंट पर ईवी का निर्माण किया जा सकता है और उसकी तुलना में कीमत दी जा सकती है। आधारभूत ढांचा बढ़ रहा है, ओईएम के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और ग्राहकों को ज्यादा प्रोत्साहन के साथ लुभाया जा रहा है।

कुमार ने कहा, ‘वाहनों के विद्युतीकरण की दर बदल सकती है। मुझे लगता है कि हम तीन साल बाद मिलेंगे और उस समय के आंकड़ों से आश्चर्यचकित होंगे।’

भारद्वाज ने अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता व्यवहार दोनों में विश्वास जताया। उन्होंने कहा, ‘मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत 2030 तक बदल जाएगा और अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त कर लेगा।’ उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता बेहद स्मार्ट हैं और ठोस संख्याओं पर प्रतिक्रिया करते हैं। ईवी वाहन ड्राइविंग की यूनिट इकनॉमी को मात देना मुश्किल है। हालांकि इस समय स्वामित्व की कुल लागत थोड़ी ज्यादा हो सकती है। उन्हें उम्मीद है कि बैटरी टेक्नॉलजी में सुधार से समय के साथ लागत में तेजी से कमी आएगी।

उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन जैसी वैकल्पिक तकनीकों पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन बिजली का पहले से ही एक प्रमुख लाभ है : यह व्यापक रूप से वितरित और पूरे देश में उपलब्ध है। फिर भी तीनों ने स्वीकार किया कि आशावाद संरचनात्मक चुनौतियों को नहीं मिटाता है।

Advertisement
First Published - February 25, 2026 | 10:58 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement