विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत को खुद के आधारभूत आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल बनाने और डेटा संप्रभुता के सुरक्षा उपाय मजबूत करने को प्राथमिकता देनी होगी।
दो दिवसीय कार्यक्रम बीएस मंथन समिट के दौरान बुधवार को आशिष आर्यन के साथ बातचीत में हैदराबाद के अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक संदीप शुक्ल, मोजिला में कंट्री लीड (भारत) जिबू एलियास और वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के सेंटर फॉर फोर्थ इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन (सी4आईआर) इंडिया में कार्यक्रम प्रमुख अरुणिमा सरकार की राय थी कि उपयोगकर्ता और अन्य अहम डेटा पर घरेलू नियंत्रण बनाए रखना एआई को ऊपर उठाने और देश की आबादी को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।
शुक्ल ने कहा, ‘एआई को ऐसे डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित होना चाहिए, जो आधार स्तर के रूप में काम करे। इससे ऊपर क्षेत्र- विशिष्ट डेटा का उपयोग मॉडलों को फिर से प्रशिक्षित करने के लिए किया जा सकता है जिससे संगठन-विशिष्ट और व्यक्ति-विशिष्ट मॉडल बनाए जा सकते हैं। उस लिहाज से हमें वास्तव में आधारभूत मॉडल की जरूरत है। आधारभूत मॉडल के बिना अगर हम चैटजीपीटी, जेमिनी, एंथ्रोपिक आदि का उपयोग कर रहे हैं, तो हम अपना सारा डेटा उन्हें (विदेशी कंपनियों और देशों) दे रहे हैं।’
एलियास ने कहा कि नवीनतम अग्रणी एआई मॉडल बनाने की दौड़ के समय में भारत जैसे देशों को ग्लोबल साउथ (विकासशील और उभरते देशों) का नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘ जनसांख्यिकी, भूगोल और डेटा के लिहाज से देश की विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए अगर कोई चीज भारत के लिए काम करती है, तो वह निश्चित रूप से अन्य देशों में भी काम कर सकती है।’
सरकार ने कहा कि देश के जनसांख्यिकीय क्षेत्र में एआई का पूरी तरह से प्रसार सुनिश्चित करने के लिए भारत को एआई संप्रभुता और प्रतिस्पर्धी क्षमता पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘एआई प्रसार के लिए कुछ बिल्डिंग ब्लॉक हैं। हमें कंप्यूट, कनेक्टिविटी, बिजली, प्रतिभा और कौशल तथा बहुभाषी मॉडल विकसित करने के लिए भाषायी क्षमताओं की जरूरत है, खासकर जब हम विकासशील देशों में एआई का विस्तार देख रहे हैं।’
उन्होंने यह भी कहा कि देशों को ऐसी रणनीतिक साझेदारी भी बनानी चाहिए, जो एआई अर्थव्यवस्था में विविध, देशव्यापी भागीदारी को सक्षम कर सके। पिछले सप्ताह इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में सरकार ने घोषणा की थी कि एआई विकास से संबंधित सभी प्रमुख देशों ने नई दिल्ली घोषणा पर हस्ताक्षर किए हैं। अब तक लगभग 90 देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन घोषणा का समर्थन कर चुके हैं।
एआई पर नई दिल्ली घोषणा ने विकासशील देशों के बीच एआई के प्रसार और एआई के अहम बुनियाद ढांचे को साझा करने के लिए तकनीक के विकास के अगले चरण के केंद्र में ला दिया है। भरोसेमंद एआई इस घोषणा के प्रमुख सिद्धांतों में से एक के रूप में उभरी है। समिट में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल सक्षम करने के लिए भरोसेमंद एआई प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
घोषणा में कहा गया है, सुरक्षा संबंधी संभावित पहलुओं की समझ को गहरा करना महत्वपूर्ण है, इस बात को ध्यान में रखते हुए हम एआई प्रणालियों में सुरक्षा, उद्योग-नेतृत्व वाले स्वैच्छिक उपायों और तकनीकी समाधानों तथा उपयुक्त नीतिगत ढाँचों को अपनाने के महत्व को स्वीकार करते हैं, जो एआई के पूरे जीवनचक्र में जनहित को बढ़ावा देते हुए नवाचार को सक्षम बनाते हैं।
इसके अलावा, भारत महत्वपूर्ण खनिजों की विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा के निर्माण की खातिर अमेरिका द्वारा शुरू की गई पैक्स सिलिका पहल का 12वां हस्ताक्षरकर्ता भी बन गया है।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी एआई क्षमताओं के निर्माण के लिए नीति, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच समन्वित प्रयास की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि भारत की एआई संबंधी महत्वाकांक्षाएं केवल अनुप्रयोग स्तरीय नवाचार पर ही निर्भर नहीं रह सकतीं, बल्कि चिप डिजायन, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेटा केंद्रों को चलाने के लिए किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा तक पहुंच होनी चाहिए।