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NSDL और CDSL के टेक्नोलॉजी खर्च में तेज उछाल, डीमैट सिस्टम के विस्तार से बढ़ा दबाव

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हाल में समाप्त वित्त वर्ष 2025-26 में इस मद में एक-तिहाई से ज्यादा का इजाफा देखा गया है

Last Updated- June 04, 2026 | 11:11 PM IST
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भारत के शेयर बाजार की परिसंपत्तियां संभालने वाली कंपनियों की टेक्नॉलजी से जुड़ी लागत में एक-तिहाई से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। हाल में समाप्त वित्त वर्ष 2025-26 में इस मद में एक-तिहाई से ज्यादा का इजाफा देखा गया है। नैशनल सिक्योरिटीज़ डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) ने वित्त वर्ष 26 में टेक्नॉलजी से जुड़े खर्च में सालाना आधार पर 34 फीसदी की बढ़ोतरी की है।

इसी दौरान सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) के तकनीकी खर्च में 43 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह इजाफा कुल खर्चों में हुई बढ़ोतरी से कहीं ज्यादा है। साथ ही, यह दोनों डिपॉज़िटरी के राजस्व और मुनाफे में हुई बढ़ोतरी से भी ज्यादा है।

एक डिपॉजिटरी कंपनियों के शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में यानी डीमैटीरियलाइज्ड (या डीमैट) खातों के जरिये अपने पास रखती है। भारत में दो पंजीकृत डिपॉजिटरी हैं – सीडीएसएल और एनएसडीएल। इन दोनों के पास कुल बाज़ार का 100 फीसदी हिस्सा है।

एनएसडीएल की जानकारी से पता चलता है कि टेक्नॉलजी से जुड़े खर्च वित्त वर्ष 25 में 68.1 करोड़ रुपये थो जो वित्त वर्ष 26 में बढ़कर 91.4 करोड़ रुपये पर पहुंच गए। सीडीएसएल के खर्च भी वित्त वर्ष 25 के 113.2 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में 162.2 करोड़ रुपये हो गए। टेक्नॉलजी पर हुए खर्च का विवरण एनएसडीएल के एकल वित्तीय आंकड़ों के हिस्से के रूप में और सीडीएसएल के लिए संयुक्त आधार पर उपलब्ध है। लेकिन प्रबंधन की टिप्पणी से पता चलता है कि इन रुझानों को मोटे तौर पर सांकेतिक माना जा सकता है।

सीडीएसएल के प्रबंध निदेशक और सीईओ नेहल वोरा ने मार्च तिमाही की आय घोषणा के लिए आयोजित कॉन्फ्रेंस में एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषक अमित चंद्र के एक सवाल के जवाब में कहा, हमारा मकसद यह पक्का करना है कि टेक्नॉलजी लागू करने से मिलने वाली कुशलता और उसका असर कर्मचारियों पर होने वाले खर्च से ज्यादा हो। इसलिए, यह एक ज्यादा टेक्नॉलजी आधारित कंपनी बनती जा रही है, जिसे काबिल इंसानों का साथ मिल रहा है।

सीडीएसएल के वोरा के अनुसार, निवेशकों के खातों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी, बदलते प्रोडक्ट्स और इकोसिस्टम के अलावा बड़े पैमाने पर काम करने लायक सिस्टम बनाने की जरूरत के कारण यह खर्च बढ़ा है। वित्त वर्ष 26 में सीडीएसएल का कर्मचारियों पर खर्च 156.5 करोड़ रुपये था। जून 2017 में सूचीबद्धता के बाद यह पहली बार है, जब टेक्नॉलजी पर होने वाला खर्च कर्मचारियों की लागत से ज्यादा हो गया है।

वित्त वर्ष 18 में कंप्यूटर टेक्नॉलजी से जुड़े खर्च 9.7 करोड़ रुपये थे जबकि कर्मचारियों पर खर्च इससे तीन गुना ज्यादा (30.3 करोड़ रुपये) था। एनएसडीएल का कर्मचारियों पर खर्च (116.7 करोड़ रुपये) अभी भी टेक्नॉलजी पर होने वाले खर्च से ज्यादा है। हालांकि दोनों के बीच अंतर अब कम होता दिख रहा है। वित्त वर्ष 26 में टेक्नॉलजी पर खर्च, कर्मचारियों पर होने वाले खर्च के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ा।

एनएसडीएल के प्रबंध निदेशक और सीईओ विजय चंडोक ने मई में आय की घोषणा के मौके पर कहा था, हमारा मानना ​​है कि इस साल भी तकनीक पर पूंजीगत खर्च और परिचालन खर्च के मामले में आंकड़े काफी हद तक वैसे ही रहेंगे। मोटे तौर पर ये एक जैसे ही रहेंगे, पर हमारे तकनीक पर परिचालन खर्च में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन पूंजीगत खर्च काफी हद तक उतना ही रहेगा।

एनएसडीएल की कॉन्फ्रेंस में विश्लेषकों के साथ साझा विवरणों के अनुसार इन खर्च में टेक्नॉलजी इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने, लाइसेंस और सॉफ्टवेयर पर खर्च और साथ ही साइबर सुरक्षा पर किया गया खर्च शामिल है। डिपॉजिटरीज में कुल डीमैट खातों की संख्या वित्त वर्ष 19 के 3.6 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में 22.5 करोड़ हो गई है। यह 6 गुना वृद्धि है। इस बढ़ते बोझ को संभालने के लिए उन्नत टेक्नॉलजी की जरूरत बढ़ गई है।

जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के कार्यकारी निदेशक सतीश मेनन ने कहा कि पूंजी बाजार से जुड़ी संस्थाओं को आम तौर पर नए सिस्टम के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाना पड़ा है और शुरुआती सिस्टम बदलावों के बाद भी यह खर्च ज्यादा रहने की संभावना है। इसकी वजह रखरखाव पर होने वाला पूंजीगत खर्च है। उनके अनुसार ज़रूरत पड़ने पर डेटा उपलब्ध कराने की क्षमताओं पर लगातार खर्च की जरूरत होगी और नए सिस्टम की जरूरतें भी ज्यादा बार सामने आने की संभावना है, जिससे हर चक्र में और भी ज्यादा पूंजीगत खर्च करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा, आजकल टेक्नॉलजी में बदलाव बहुत तेज़ी से होते हैं और क्लाइंटों को बेहतर सेवाएं देने के लिए निवेश करना ज़रूरी है।  कैपिटल मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंटरमीडियरी कंपनियों को अब प्लेटफॉर्म अपग्रेडेशन और नियामकीय व साइबर सुरक्षा कारणों से टेक्नॉलजी पर लगातार खर्च करने की ज़रूरत पड़ रही है। इस बात से स्वतंत्र बाजार विशेषज्ञ दीपक जसानी भी सहमत हैं। उनके अनुसार, स्वचालन से मैनपावर की लागत कम करने में मदद मिल रही है, जिससे टेक्नॉलजी पर होने वाले खर्च और लागत में संभावित रूप से लगातार अंतर बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि वे जरूरी कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए स्वचालन यानी ऑटोमेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं और टेक्नॉलजी की लागत ज्यादा ही रहेगी। इस बारे में जानकारी के लिए जोनों डिपॉजिटरी को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।

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First Published - June 4, 2026 | 11:11 PM IST

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