केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा पत्र शेयर करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि उनका यह फैसला छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने और ‘देश विरोधी ताकतों’ को जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का फायदा उठाने से रोकने के लिए है। बता दें कि नीट पेपर लीक के बाद प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यही थी कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच तीसरे दौर की बातचीत होने वाली थी।
बातचीत से पहले ही CJP के नेताओं ने साफ कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा किसी भी कीमत पर जरूरी है और यह उनके लिए एक ऐसी शर्त थी जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता था। इसके कुछ ही घंटों बाद, प्रधान ने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। पेपर लीक के कई मामलों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे प्रधान ने पत्र के शुरुआत में ही साफ कर दिया कि पद छोड़ना उनके लिए कोई अहंकार या प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है।
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा है कि पिछले 4 दशकों से वे छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए पूरी निष्ठा से काम करते रहे हैं। उन्होंने लिखा कि देश के युवाओं की उम्मीदों और सपनों को पूरा करना उनके राजनीतिक जीवन का हमेशा से मुख्य संकल्प रहा है। नीट-यूजी परीक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 3 मई 2026 को हुई इस परीक्षा में कुछ गड़बड़ियां सामने आई थीं, जिसके बाद सरकार ने तुरंत कड़ा कदम उठाते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। परीक्षा को रद्द करके नई तारीख का ऐलान किया गया और यह फैसला लिया गया कि अगले साल से यह परीक्षा कंप्यूटर-आधारित (CBT) मोड में कराई जाएगी।
उन्होंने आगे बताया कि सरकार की पहली प्राथमिकता 20 लाख से ज्यादा छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से कराना थी। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर काम किया और आखिरकार माता-पिता तथा छात्रों के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी हो गई। इसके बाद 16 जुलाई को आए नीट-यूजी के नतीजे भी काफी संतोषजनक रहे, जिसमें गरीब और पिछड़े परिवारों के कई होनहार छात्रों ने सफलता हासिल की।
अपने इस्तीफे के पीछे की वजह बताते हुए प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें अंदर से बहुत दुखी किया है। उनका कहना था कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने इस स्थिति का फायदा उठाकर छात्रों को भटकाने और गुमराह करने की कोशिश की। जंतर-मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में चल रहे प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि किसी भी देश-विरोधी ताकत को इस स्थिति का फायदा उठाने का मौका मिले।
प्रधान ने कहा कि कि यह मामला उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या अहंकार का नहीं है, बल्कि देश की एकता को बनाए रखने और छात्रों के भविष्य को कानूनी उलझनों से बचाने का है ताकि बच्चे बिना किसी भटकाव के अपनी पढ़ाई और करियर पर पूरा ध्यान दे सकें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें देश की सेवा करने का जो मौका मिला, उसके लिए वे हमेशा आभारी रहेंगे। अंत में उन्होंने लिखा कि भगवान श्री जगन्नाथ जी का आशीर्वाद लेते हुए वे आगे भी मां भारती और देश के युवाओं की सेवा में पूरी तरह समर्पित रहेंगे।