ऐपल ने भारत की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था को अपने भारतीय कारोबार के वित्तीय आंकड़े देने पर सहमति जताई है। यह कदम उस जांच के बाद उठाया गया है जिसमें पाया गया था कि कंपनी ने बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग किया। इससे लंबे समय से लंबित इस मामले में संभावित जुर्माने के साथ फैसला हो सकता है।
यह मामला भारत में ऐपल की सबसे बड़ी नियामकीय चुनौतियों में से एक है। भारत, कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण विकासशील बाजार है, जहां उसने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए आईफोन उत्पादन में तेजी से विस्तार किया है। काउंटरप्वाइंटर के शोध डेटा के मुताबिक, आईफोन की भारत के स्मार्टफोन बाजार में हिस्सेदारी अब लगभग 9 फीसदी है, जो पांच साल पहले करीब 2 फीसदी थी।
भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (सीसीआई) के एक गोपनीय आदेश की समीक्षा रॉयटर्स ने की जिसके अनुसार ऐपल ने पिछले महीने अपने देश से जुड़े विशिष्ट वित्तीय विवरण उपलब्ध कराने पर सहमति दी। आमतौर पर ऐसे आंकड़ों का उपयोग संभावित जुर्माने की गणना के लिए किया जाता है।
21 मई को हुई सुनवाई में ऐपल के वकील ने भारत से संबंधित वित्तीय जानकारी जमा करने के लिए 25 जून तक की अंतिम समय-सीमा मांगी थी। सीसीआई ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया। वर्ष 2024 में सीसीआई की जांच में कहा गया कि ऐपल ने आईफोन ऐप बाजार में अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग किया। हालांकि ऐपल ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वह जांच के निष्कर्षों को चुनौती देगा। कंपनी ने पहले अपने वित्तीय विवरण देने से भी इनकार किया था।