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BS Manthan में बोले जोशी: अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में 2030 तक $350 अरब के निवेश से रोशन होगा भारत

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भारत 2030 तक 500 गीगावॉट स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य के लिए 350 अरब डॉलर का निवेश जुटाएगा, जिससे सौर और पवन ऊर्जा की लागत में भारी कमी आएगी: जोशी

Last Updated- February 25, 2026 | 11:05 PM IST
Pralhad Joshi
बिज़नेस स्टैंडर्ड के वार्षिक कार्यक्रम मंथन 2026 में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी अपनी बात रखते हुए

देश के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अगले चार वर्षों के दौरान 350 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किए जाने की संभावना है। इसमें देसी मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता में बड़े स्तर पर विस्तार योजनाएं और साल 2030 तक 500 गीगावॉट के स्वच्छ ऊर्जा के बड़े लक्ष्य को सहारा देने के लिए अतिरिक्त 41 गीगावॉट ऊर्जा भंडारण क्षमता शामिल है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के वार्षिक कार्यक्रम मंथन 2026 में बिजनेस स्टैंडर्ड के सुधीर पाल सिंह के साथ चर्चा के दौरान नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आज यह जानकारी दी।

जोशी ने कहा, ‘नीति आयोग ने हाल में अनुमान लगाया है कि साल 2070 तक भारत को शून्य कार्बन लक्ष्य हासिल करने के लिए 22 लाख करोड डॉलर के निवेश की जरूरत होगी। हमने पिछले 10 साल में 150 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है और साल 2030 तक 500 गीगावॉट की गैर-जीवाश्म क्षमता तक पहुंचने के लिए हमारी जरूरत लगभग 350 अरब डॉलर की होगी।’

उन्होंने कहा कि भारत ने समूचे विश्व के लिए अक्षय ऊर्जा का परिदृश्य निर्धारित किया है, जो जी20 देशों में एकमात्र ऐसा देश बन गया है जिसने राष्ट्रीय लक्ष्य से पांच साल पहले ही गैर-जीवाश्म ईंधन पर आधारित स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक स्तर हासिल कर लिया है।

उन्होंने कहा, ‘हम प्रधान मंत्री के दिए गए लक्ष्य से इसे और बढ़ाने जा रहे हैं। हम सही दिशा में जा रहे हैं क्योंकि हमारी अक्षय ऊर्जा की वृद्धि काफी बेहतर राह पर है। भारत ने पिछले 11 वर्षों में अक्षय ऊर्जा के मोर्चे पर जो हासिल किया है, वह वास्तव में उल्लेखनीय है। इस अवधि में हमारी सौर ऊर्जा क्षमता मात्र 2.8 गीगावॉट की तुलना में बढ़कर आज 140 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है। यही कहानी पवन ऊर्जा के मामले भी है। हमारी समूची अक्षय ऊर्जा क्षमता हाइड्रो को छोड़कर आज 195 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है।’

मंत्री ने यह भी कहा कि देश की मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 140 गीगावॉट है। उन्होंने कहा, ‘हमने उस मोर्चे पर अधिक उत्पादन हासिल किया है और अब हम इन मॉड्यूल का निर्यात करने में भी सक्षम हैं। सरकार ने उच्च दक्षता वाले सोलर पीवी मॉड्यूल के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के वास्ते 24,000 करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए हैं।’

जोशी ने कहा कि साल 2014 में सरकार ने सूर्य से किफायती ऊर्जा पैदा करने और इसे लोगों के लिए उपलब्ध कराने का संकल्प लिया था। जोशी ने कहा, ‘प्रधान मंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार ने अब इसे साबित कर दिया है। यही कारण है कि आज देश में 30 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर स्थापित किए जा चुके हैं। इसी से हम लगभग 14 गीगावॉट बिजली पैदा कर रहे हैं। यही वह स्तर है जिस पर हम काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा क्षमता सृजन के स्तर के साथ-साथ भारत बिजली की लागत भी कम करने में कामयाब रहा है। पिछले साल भारत की कुल स्थापित क्षमता पहली बार 50 गीगावॉट पार कर गई और हमारी उपलब्धियों को पूरी दुनिया में सराहा गया है। आज हर निवेशक, फंड मैनेजर, बहुपक्षीय बैंक और वित्तीय संस्थान भारत आना चाहता है।’

उन्होंने यह भी कहा कि देश में अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से लगभग 267 गीगावॉट की स्थापित क्षमता है, जबकि साल 2014 में यह 81 गीगावॉट थी। इसमें अकेले पन बिजली से ही 77 गीगावॉट शामिल रही।

उन्होंने कहा, ‘जब हमने 11 साल पहले क्षमता बढ़ाने का फैसला किया, तो प्रति यूनिट लागत 11 रुपये प्रति थी। हमने अब इसे घटाकर 2.15 रुपये प्रति यूनिट कर दिया है। जब बड़े स्तर पर काम किया जाता है, तो समस्याएं तो आती ही हैं। अक्षय ऊर्जा के मामले में हमने ऊर्जा भंडारण क्षमता के जरिये निरंतरता में बाधा की समस्या का समाधान किया है और पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। अब देश छोटे मॉड्ययलर रिएक्टरों के जरिये परमाणु ऊर्जा पर भी ध्यान दे रहा है।’

जोशी ने यह भी कहा कि मंत्रालय ने अक्षय ऊर्जा का कार्यान्वयन करने वाली सभी एजेंसियों से अब फर्म ऐंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (एफडीआरई) निविदाओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा, ‘हम अब चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए बोलियां आमंत्रित कर रहे हैं। हमें भविष्य की निविदाओं के भंडारण घटक में पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (पीएसपी) को भी शामिल करना चाहिए। यह बात ध्यान में रखना महत्त्वपूर्ण है कि ऊर्जा भंडारण को शामिल करने वाले एफडीआरई की इन निविदाओं के लिए भी कीमत 4 रुपये प्रति यूनिट और 4.5 रुपये प्रति यूनिट के बीच समझी गई है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।’

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First Published - February 25, 2026 | 11:05 PM IST

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