US Immigration: अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। वॉशिंगटन डीसी की संघीय अपीलीय अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें आंतरिक राजस्व सेवा यानी IRS को प्रवासियों की टैक्स संबंधी जानकारी साझा करने से अस्थायी रूप से रोकने की मांग की गई थी। अदालत के इस निर्णय से अब गृह सुरक्षा विभाग को पहचान और निष्कासन की प्रक्रिया तेज करने में मदद मिल सकती है।
प्रवासी अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन सेंट्रो दे त्राबाजादोरेस उनिदोस और कुछ अन्य गैर लाभकारी संस्थाओं ने सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। इन संगठनों का कहना था कि IRS और गृह सुरक्षा विभाग के बीच हुआ डेटा साझाकरण समझौता प्रवासियों की निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
हालांकि, तीन न्यायाधीशों की पीठ ने प्रारंभिक रोक लगाने से इनकार कर दिया। इससे पहले अप्रैल में ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट, जिसे आमतौर पर ICE कहा जाता है, अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों के नाम और पते IRS को भेज सकता है। इसके बाद IRS इन जानकारियों का टैक्स रिकॉर्ड से मिलान कर सकता है।
अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने अदालत के फैसले को सरकार की बड़ी सफलता बताया। उनका कहना है कि अवैध रूप से रह रहे लोगों को देश से बाहर भेजना अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम है।
वहीं कुछ दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि इससे गृह सुरक्षा विभाग के पास कार्रवाई के नए रास्ते खुलेंगे।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में आव्रजन नीति को लेकर सख्ती साफ नजर आई है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, करीब 30 लाख लोग अमेरिका छोड़ चुके हैं। इनमें लगभग 22 लाख लोगों ने स्वयं देश छोड़ा, जबकि 6 लाख 75 हजार से अधिक लोगों को औपचारिक रूप से निर्वासित किया गया।
प्रशासन का तर्क है कि IRS के साथ डेटा साझा करने की व्यवस्था सीमा सुरक्षा और आंतरिक कानून प्रवर्तन को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसके अंतर्गत कार्यस्थलों पर छापेमारी और बड़े पैमाने पर निष्कासन अभियान भी शामिल हैं।
इस समझौते को लेकर IRS के भीतर भी असहमति देखने को मिली थी। बताया गया कि पिछले वर्ष कार्यवाहक आयुक्त ने इस व्यवस्था के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। आलोचकों का कहना है कि टैक्स रिकॉर्ड का उपयोग प्रवासन प्रवर्तन के लिए करना भविष्य में करदाताओं के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिका में बैंकिंग नियमों में बड़ा बदलाव संभव, ग्राहकों की नागरिकता सत्यापन पर विचार
वॉशिंगटन। अमेरिका में बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की टीम एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसके तहत अमेरिकी बैंकों को अपने मौजूदा और नए ग्राहकों की नागरिकता से संबंधित जानकारी की पुष्टि करनी पड़ सकती है। यह कदम आव्रजन नीति को सख्त बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस संभावित नियम को कार्यकारी आदेश के माध्यम से लागू किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो बैंकों को ग्राहकों से नागरिकता का प्रमाण मांगना पड़ सकता है। इसमें पासपोर्ट या अन्य आधिकारिक दस्तावेज शामिल हो सकते हैं, जो किसी व्यक्ति की नागरिक स्थिति को स्पष्ट करते हों।
वर्तमान में अमेरिकी बैंकों को एंटी मनी लॉन्ड्रिंग और केवाईसी यानी नो योर कस्टमर नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इसके तहत बैंक ग्राहकों की पहचान और उनके निवास स्थान की जानकारी दर्ज करते हैं। हालांकि अभी तक नागरिकता की जानकारी एकत्र करना या उसकी पुष्टि करना अनिवार्य नहीं है।
इस प्रस्ताव को लेकर बैंकिंग उद्योग में चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम लागू होता है तो बैंकों को लाखों मौजूदा खाताधारकों से दोबारा दस्तावेज मांगने पड़ सकते हैं। इससे प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा और प्रक्रिया जटिल हो सकती है। साथ ही नए ग्राहकों के लिए खाता खोलने की प्रक्रिया भी लंबी हो सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार यदि यह आदेश पारित होता है तो बैंकों को केवल नए ग्राहकों से ही नहीं, बल्कि पहले से खाता रखने वाले ग्राहकों से भी नागरिकता संबंधी जानकारी प्राप्त करनी पड़ सकती है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और कानूनी विकल्पों पर विचार जारी है।