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दो सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने ईरान पर किया बड़ा हमला, खाड़ी में फिर बढ़ा महायुद्ध का खतरा

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यह ताजा सैन्य कार्रवाई जॉर्डन में हुए उस हमले के जवाब में की गई है, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई थी, एक लापता है और चार अस्पताल में भर्ती हैं

Last Updated- July 19, 2026 | 12:07 PM IST
US Iran WAr
युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका के 16 सैनिक मारे गए हैं और 430 से ज्यादा घायल हुए हैं | फोटो: रॉयटर्स

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इस कार्रवाई का मकसद ईरान को तुरंत सजा देना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल के टैंकरों को रोकने के ईरानी प्रयासों को खत्म करना है। 

यह ताजा सैन्य कार्रवाई जॉर्डन में हुए उस हमले के जवाब में की गई है, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई थी, एक लापता है और चार अस्पताल में भर्ती हैं। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी ‘IRNA’ ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया कि दक्षिणी होरमोज्गान प्रांत के सिरिक इलाके में तड़के करीब 1:30 बजे अमेरिका ने बमबारी की। युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहला मौका है जब सीधे ईरानी हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है। अब तक इस जंग में 16 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 430 से अधिक घायल हुए हैं।

इराक और कुवैत तक फैला हमलों का दायरा

इस जंग की आग अब पड़ोसी देशों तक भी फैल चुकी है। इराक के उत्तरी कुर्द क्षेत्र की राजधानी इरबिल में एक कुर्दिश विद्रोही समूह (कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी) के बेस पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें आठ लोग घायल हो गए। पिछले चार दिनों से इरबिल में लगातार धमाके हो रहे हैं। यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब इराक के नए प्रधानमंत्री अली अल-जैदी हाल ही में वाशिंगटन के दौरे पर गए थे।

दूसरी ओर, कुवैत में ईरानी हमलों ने भारी तबाही मचाई है। वहां के एक तेल कारखाने और पानी को साफ करने वाले (डीसैलिनेशन) प्लांट को निशाना बनाया गया है। रेगिस्तानी देश होने के कारण कुवैत अपनी 90 प्रतिशत पीने के पानी की जरूरत के लिए इसी प्लांट पर निर्भर है। इस हमले के बाद वहां बिजली उत्पादन ठप हो गया और आग बुझाने के दौरान कई कर्मचारी व फायरफाइटर घायल हो गए। सुरक्षा को देखते हुए कुवैत ने अपना हवाई क्षेत्र भी कुछ समय के लिए बंद कर दिया।

Also Read: रूसी तेल खरीद पर भारत पर 100% अमेरिकी शुल्क का प्रस्ताव, संशोधित प्रतिबंध विधेयक से बढ़ सकती है चुनौती

इस बीच जॉर्डन और इराक ने अपनी सीमाओं में आ रहे ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराने का दावा किया है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने नागरिक ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर किए गए इन हमलों को ईरान का युद्ध अपराध बताया है।

समझौते से पीछे हटा ईरान, दी बड़ी चेतावनी

अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई से ठीक पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका को सीधे शब्दों में चेतावनी दी। सरकारी टीवी पर प्रसारित उनके संदेश में कहा गया कि अगर अमेरिका ने अपने हमले नहीं रोके, तो उसे ऐसे ‘न भूलने वाले सबक’ सिखाए जाएंगे जिसे वह हमेशा याद रखेगा।

इसके साथ ही ईरान ने साफ कर दिया है कि करीब एक महीने पहले युद्ध को हमेशा के लिए रोकने के मकसद से जो अंतरिम समझौता हुआ था, वह अब पूरी तरह टूट चुका है। ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने खुद शर्तों का उल्लंघन किया है, इसलिए ईरान अब इस समझौते की किसी भी बात को मानने के लिए बाध्य नहीं है।

इसके अलावा ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह अपने सहयोगी सशस्त्र संगठनों, जिन्हें ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ कहा जाता है, को भी सक्रिय कर सकता है। उधर, हालात बिगड़ते देख अमेरिका ने पूरी दुनिया के लिए ट्रैवल अलर्ट जारी कर दिया है। इससे चिंता बढ़ गई है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर फिर से संकट के बादल मंडरा सकते हैं।

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First Published - July 19, 2026 | 8:44 AM IST

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