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लेखक : के पी कृष्णन

आज का अखबार, लेख

भारत के नियामकों पर अंदरूनी कब्जा, बेहतर शासन व्यवस्था की जरूरत

वर्ष 1991 के बाद आर्थिक नीति की रणनीति ने राज्य और बाजार के बीच रिश्ते को नया रूप देने का प्रयास किया। केंद्रीय नियोजन, राज्य के नियंत्रण और अक्सर राज्य के स्वामित्व से हम उस दिशा में बढ़े हैं, जहां उत्पादन में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी है और राज्य की नियामकीय भूमिका है। इस […]

आज का अखबार, लेख

वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लिए बड़े विदेशी निवेश और गहरे सुधार जरूरी, कैपिटल फ्लो बढ़ाने पर जोर

भारत में इस समय राजनीतिक चर्चा वर्ष 2047 तक देश के एक विकसित राष्ट्र, या विकसित भारत बनने की महत्त्वाकांक्षा के इर्दगिर्द केंद्रित हो गई है। मगर इस तमाम चर्चा के बीच हमें इस महत्त्वाकांक्षा से जुड़े गणित का भी विश्लेषण करना होगा। विश्व बैंक की परिभाषा के मुताबिक एक उच्च आय वाला देश उसे […]

आज का अखबार, लेख

करेंसी नीति से भारत पर बढ़ रहा दबाव: खुली अर्थव्यवस्था में रुपया संभालना हुआ और मुश्किल

भारत की आर्थिक नीति से संबंधित बहस में प्रशासनिक नियंत्रण और बाजार अर्थव्यवस्था के बीच का द्वंद्व बार-बार उभरता है। इन दिनों रिजर्व बैंक के विनिमय दर संबंधी कदमों में इन्हें महसूस किया जा सकता है। कई महीनों से आरबीआई रुपये के अवमूल्यन को रोकने के लिए कठिन प्रयास कर रहा है। ऐसा करते हुए, […]

आज का अखबार, लेख

एक राजनीतिक विकल्प: तकनीकी सुधारों से आगे भारत का सीमित बॉन्ड बाजार

पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से भारत की आर्थिक समीक्षाओं और वित्त मंत्रियों के सालाना बजट भाषणों में एक मजबूत एवं तरल (लिक्विड) कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार तैयार करने का बार-बार जिक्र हुआ है। भारत के वित्त एवं इनसे जुड़े पहलुओं पर नजर रखने वाले पर्यवेक्षक कई बार ऐसे वादों का गवाह रह चुके हैं। […]

आज का अखबार, लेख

सार्वजनिक उद्देश्य और लाभकारी संस्थाएं: नियमन में अगला चुनौती

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई)   आजकल खबरों में है क्योंकि वह आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) पेश करने वाला है। इसके बाद सूचीबद्ध एक्सचेंजों में तीन बड़े एक्सचेंज शामिल हो जाएंगे- एनएसई, बंबई स्टॉक एक्सचेंज(बीएसई) और मल्टी स्टॉक एक्सचेंज (एमसीएक्स)। मसौदा प्रतिभूति बाजार संहिता (एसएमसी) ने स्टॉक एक्सचेंजों के लिए बाजार अधोसंरचना संस्थानों (एमआईआई) के रूप में […]

आज का अखबार, लेख

शराब नीति का संतुलन जरूरी: राज्यों को रेवेन्यू बढ़ाने के साथ स्पष्ट और जिम्मेदार नियमन अपनाना होगा

नए साल यानी 2026 के आगाज के मौके पर शराब का जमकर सेवन हुआ। एक मोटे अनुमान के अनुसार भारत में इस दौरान शराब की खपत 1.2 से 1.5 करोड़ केस हुई। दूसरी तरफ, उसी रात मुंबई में शराब पीकर वाहन चलाने से जुड़े मामले रोकने के लिए मुंबई पुलिस ने अपनी तैनाती दोगुना बढ़ा […]

आज का अखबार, लेख

कमजोर रेगुलेशन से 2025 में सरकारी नीतियां लड़खड़ाईं, 2026 में इसे दुरुस्त करना होगी बड़ी चुनौती

वर्ष 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था में क्या हुआ? नागर विमानन से लेकर जन स्वास्थ्य तक जो समस्याएं उत्पन्न हुईं, उनमें से अनेक का संबंध नियमन से था। भारत ने एक सक्षम नियामकीय शाखा विकसित की है, जिसके माध्यम से वैधानिक नियामक प्राधिकरणों यानी एसआरए द्वारा पूरी अर्थव्यवस्था में हस्तक्षेप किया जाता है। परंतु एसआरए ने […]

आज का अखबार, लेख

सिस्टमेटिक नियमों की जगह मनमाने बैंक बचाव क्यों नहीं ले सकते?

वर्ष 2020 में येस बैंक मामले को सफलतापूर्वक निपटाए जाने को भारतीय रिजर्व बैंक के कुशल संकट प्रबंधन का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है जहां केंद्रीय बैंक के नेतृत्व में तेजी से सार्वजनिक और निजी पूंजी जुटाई गई। वास्तव में संक्रमण को जल्दी नियंत्रित करना भी परिचालन की एक कामयाबी थी जिसने व्यवस्थागत झटके को […]

आज का अखबार, लेख

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में हो ढांचागत सुधार, निगरानी में हैं गहरी खामियां

हाल ही में खांसी की जहरीले तत्वों के मिश्रण वाली दवा अपनी तरह की कोई इकलौती घटना नहीं है। इस दवा के चलते देश और विदेश में बच्चों की दिल दहलाने वाली मौतें हुईं जिन्हें टाला जा सकता था। यह भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को प्रभावित करने वाली लगातार और चिंताजनक रूप से पूर्वानुमानित नियामक […]

अर्थव्यवस्था, लेख

स्वतंत्र नियामक संस्थाओं को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी

अमेरिका से आई हाल की खबरों के मुताबिक, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को बर्खास्त करने की कोशिश की। यह एक अभूतपूर्व कदम है जिसके कारण कुक ने पद छोड़ने से इनकार करते हुए ट्रंप के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। फेडरल अपील अदालत ने ट्रंप के ​खिलाफ आदेश भी […]

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