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लेखक : के पी कृष्णन

आज का अखबार, लेख

शराब नीति का संतुलन जरूरी: राज्यों को रेवेन्यू बढ़ाने के साथ स्पष्ट और जिम्मेदार नियमन अपनाना होगा

नए साल यानी 2026 के आगाज के मौके पर शराब का जमकर सेवन हुआ। एक मोटे अनुमान के अनुसार भारत में इस दौरान शराब की खपत 1.2 से 1.5 करोड़ केस हुई। दूसरी तरफ, उसी रात मुंबई में शराब पीकर वाहन चलाने से जुड़े मामले रोकने के लिए मुंबई पुलिस ने अपनी तैनाती दोगुना बढ़ा […]

आज का अखबार, लेख

कमजोर रेगुलेशन से 2025 में सरकारी नीतियां लड़खड़ाईं, 2026 में इसे दुरुस्त करना होगी बड़ी चुनौती

वर्ष 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था में क्या हुआ? नागर विमानन से लेकर जन स्वास्थ्य तक जो समस्याएं उत्पन्न हुईं, उनमें से अनेक का संबंध नियमन से था। भारत ने एक सक्षम नियामकीय शाखा विकसित की है, जिसके माध्यम से वैधानिक नियामक प्राधिकरणों यानी एसआरए द्वारा पूरी अर्थव्यवस्था में हस्तक्षेप किया जाता है। परंतु एसआरए ने […]

आज का अखबार, लेख

सिस्टमेटिक नियमों की जगह मनमाने बैंक बचाव क्यों नहीं ले सकते?

वर्ष 2020 में येस बैंक मामले को सफलतापूर्वक निपटाए जाने को भारतीय रिजर्व बैंक के कुशल संकट प्रबंधन का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है जहां केंद्रीय बैंक के नेतृत्व में तेजी से सार्वजनिक और निजी पूंजी जुटाई गई। वास्तव में संक्रमण को जल्दी नियंत्रित करना भी परिचालन की एक कामयाबी थी जिसने व्यवस्थागत झटके को […]

आज का अखबार, लेख

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में हो ढांचागत सुधार, निगरानी में हैं गहरी खामियां

हाल ही में खांसी की जहरीले तत्वों के मिश्रण वाली दवा अपनी तरह की कोई इकलौती घटना नहीं है। इस दवा के चलते देश और विदेश में बच्चों की दिल दहलाने वाली मौतें हुईं जिन्हें टाला जा सकता था। यह भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को प्रभावित करने वाली लगातार और चिंताजनक रूप से पूर्वानुमानित नियामक […]

अर्थव्यवस्था, लेख

स्वतंत्र नियामक संस्थाओं को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी

अमेरिका से आई हाल की खबरों के मुताबिक, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को बर्खास्त करने की कोशिश की। यह एक अभूतपूर्व कदम है जिसके कारण कुक ने पद छोड़ने से इनकार करते हुए ट्रंप के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। फेडरल अपील अदालत ने ट्रंप के ​खिलाफ आदेश भी […]

आज का अखबार, लेख

नियामक संस्थाओं पर काबिज होते पूर्व नौकरशाह, विविध प्रतिभाओं के लिए खुले नियामकीय नेतृत्व

एक पुराना अवलोकन एक बार फिर उभर आया है। देश के प्रमुख वित्तीय नियामकों मसलन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) आदि सभी के मौजूदा नियामक भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अफसरशाह हैं। अक्सर इस तथ्य के साथ एक कथानक यह जोड़ दिया […]

आज का अखबार, लेख

जेन स्ट्रीट मामला भारत के वित्तीय बाजार सुधारों के लिए एक चेतावनी

आर्बिट्राज का अर्थ होता है एक ही समय में किसी परिसंपत्ति को अलग-अलग बाजारों में खरीदना और बेचना ताकि कीमतों में अंतर का लाभ उठाया जा सके। आर्बिट्राज अलग-अलग बाजारों में एक ही परिसंपत्ति की कीमतों को करीब लाने में मदद करता है जिससे वित्तीय बाजारों को अधिक कुशल बनाने में मदद मिलती है। दूसरी […]

आज का अखबार, लेख

बेहतर हवाई सुरक्षा के लिए DGCA की संरचना में व्यापक सुधार आवश्यक

हमें हाल ही में हुई त्रासद हवाई दुर्घटना के बाद सामूहिक राष्ट्रीय शोक की घड़ी में देश की हवाई सुरक्षा क्षमताओं को लेकर आत्मावलोकन करने की भी आवश्यकता है। सैद्धांतिक तौर पर हम जानते हैं कि बाजार के स्तर पर होने वाली विफलताएं सरकारों को हस्तक्षेप के लिए प्रेरित करती हैं। कुछ ही विमानन कंपनियों […]

आज का अखबार, लेख

क्या विशेषज्ञ समिति मायने रखती है?

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी वेबसाइट पर एक दस्तावेज अपलोड किया जिसका शीर्षक था, ‘नियमन निर्माण के लिए फ्रेमवर्क।’ मोटे तौर पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि नियमन के क्षेत्र में इसे अत्यधिक महत्त्वपूर्ण माना जा सकता है। राज्य का सार दरअसल हिंसा और बलपूर्वक शक्ति के इस्तेमाल के […]

आज का अखबार, लेख

कंपनी से जुड़ी नियामकीय एजेंसियों में हो सुधार

वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में नियामकीय सुधारों की भी घोषणा हुई थी किंतु इसमें वित्तीय क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया था। यद्यपि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय क्षेत्र से जुड़े नियमन को इसमें शामिल नहीं करने के पीछे कारण का उल्लेख तो नहीं किया किंतु इससे सीधे तौर पर यह संदेश मिला […]

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