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लेखक : के पी कृष्णन

आज का अखबार, लेख

Opinion: प्रस्तावित डीपीबी और नियामकीय परिदृश्य

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 हाल ही में प्रभाव में आया है। यह एक ऐसा अधिनियम है जो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा को इस प्रकार रखने की व्यवस्था करता है कि आम लोगों के पास अपने निजी डेटा को सुरक्षित रखने का भी अधिकार हो और कानूनी उद्देश्यों से ऐसे निजी डेटा का इस्तेमाल […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: चीन में नियामकीय संरचना में बदलाव से सीख

चीन ने हाल में अपनी वित्तीय नियामकीय संरचना में बदलाव किए हैं जिनमें स्पष्ट कर दिया गया है कि किस एजेंसी का क्या कार्य होगा। भारत को भी अब इस ओर ध्यान देना चाहिए। बता रहे हैं के पी कृष्णन वित्तीय नियामकीय संरचना का प्रश्न मूल रूप से इस बात से संबंधित है कि कौन […]

आज का अखबार, लेख

एजेंसियों के लिए स्वतंत्र निदेशक मंडल अनिवार्य

निजी कंपनियों की तरह सरकारी एजेंसियों और नियामक प्राधिकरणों के निदेशक मंडल में स्वतंत्र निदेशकों का बहुमत होना महत्त्वपूर्ण है। बता रहे हैं के पी कृष्णन किसी भी संगठन के बारे में भारतीय सोच किसी प्रमुख जिम्मेदार व्यक्ति के सिद्धांत पर आधारित है। इसके मुताबिक सही व्यक्ति के प्रभारी होने पर कोई संस्था या कंपनी […]

आज का अखबार, लेख

नियामक और सरकार के निर्देश के बीच नियमन

हाल में बिजली मंत्रालय द्वारा केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग को जारी निर्देश नियामकीय स्वायत्तता या इस क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास दोनों के लिए ठीक नहीं है। बता रहे हैं के पी कृष्णन बिजली मंत्रालय ने 8 मई को लिखे एक पत्र में केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) को एक असामान्य वैधानिक निर्देश दिया। पत्र में […]

आज का अखबार, लेख

SEBI की 31वीं या 35वीं वर्षगांठ ?

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कुछ दिनों पहले अपने 35वें स्थापना दिवस के अवसर पर नया प्रतीक चिह्न (लोगो) जारी किया था। SEBI अधिनियम 31 साल पहले 1992 में प्रभाव में आया था। SEBI की स्थापना के पीछे भी एक कहानी और लोक नीति को लेकर कुछ दिलचस्प बाते हैं। भारत में नीति […]

आज का अखबार, लेख

बैकिंग संकट एवं उनके समाधान

बैंकिंग संकट के समाधान के लिए अमेरिका सरकार के शीघ्र उठाए गए कदमों से भारत को सीख लेकर विफल वित्तीय कंपनियों के समाधान पर अधूरी नीतिगत पहल पूरी करनी चाहिए। बता रहे हैं के पी कृष्णन सिलिकन वैली बैंक (एसवीबी) और कुछ अन्य बैंकों के धराशायी होने के बाद वित्तीय आर्थिक नीति में बेहतर विधियों […]

आज का अखबार, लेख

वैश्विक व्यापार और वित्तीय वैश्वीकरण का द्वंद्व

दुनिया अब तीन खेमों में बंट चुकी है। एक समूह ऐसे लोगों का है जो व्यापार और वित्तीय वैश्वीकरण दोनों का समर्थन करते हैं। दूसरा समूह ऐसे लोगों का जो राज्य का नियंत्रण चाहते हैं और दोनों तरह की स्वतंत्रता का विरोध करते हैं। तीसरा समूह उन लोगों का है जिनमें से कुछ सोचते हैं […]

अर्थव्यवस्था, आज का अखबार, लेख

G20 : वैश्वीकरण का गुरु बनकर राह दिखाए भारत

भारत को जी 20 समूह की अध्यक्षता का इस्तेमाल वैश्वीकरण के लिए दलील पेश करने तथा नियम आधारित वैश्विक आर्थिक व्यवस्था बनाने में करना चाहिए। वैश्विक अर्थव्यवस्था के समक्ष बढ़ता संरक्षणवाद और औद्योगिक नीति नई समस्या बनकर उभरे हैं। भारत को वैश्वीकरण का काफी लाभ मिला है लेकिन इस मामले में नेतृत्व विकसित देशों के […]

आज का अखबार, लेख

मुद्रास्फीति और एजेंसी की जवाबदेही

वर्ष 2022 में आमतौर पर मुद्रास्फीति 6 फीसदी के स्तर के ऊपर ही रही है। यह मुद्रास्फीति के घो​षित लक्ष्य की ऊपरी सीमा है। सरकार ने हाल ही में संसद में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने एक रिपोर्ट पेश की है जिसमें उसकी नाकामी की वजह बताई गई है। रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के […]

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