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विकास के अगले चरण के लिए भूमि व कारोबारी माहौल में सुधार जरूरी: प्रधानमंत्री मोदी तमिलनाडु में सरकार के 100 दिन, एमजीआर की याद दिला रहे विजयपश्चिम बंगाल में कारोबार को बढ़ावा, नई सरकार के पहले 100 दिन में निवेश पर जोर1991 के आ​र्थिक सुधारों से उद्योग को मिला प्रतिस्पर्धा का भरोसा, औद्योगिक और व्यापार नीति में तालमेल बिठाना जरूरीऑफर फॉर सेल के जरिये जुटाई गई रकम में उफान, LIC का अहम योगदानQ1 Results: लिस्टेड कंपनियों के मुनाफे में 16% की तेज बढ़त, BFSI और मेटल सेक्टर का बड़ा योगदानRBI के फैसले से बैंकों में हलचल, FCNR(B) जमा जुटाने की रफ्तार बढ़ीबाजार हलचल: प्री-आईपीओ शेयर, नया SLB कॉन्ट्रैक्ट और UPI नियम पर नजरजुलाई में बायोकॉन बनी MF की पसंदीदा स्मॉल-कैप खरीद, ₹3,300 करोड़ का निवेशराजस्व और मार्जिन के मोर्चे पर अपोलो से आगे मैक्स, मरीजों की बढ़ती संख्या से ग्रोथ को सहारा

लेखक : के पी कृष्णन

आज का अखबार, लेख

कम जन्म दर के बीच गोद लेने में बढ़ती जटिलताएं

कई दशकों से हमें यह बात बताई गई है कि भारत में जनसंख्या की अधिक समस्या है। हालांकि, हाल के दिनों में चीजें बहुत बदल गई हैं। चीन और यूरोप में हमें कम जन्म दर और प्रजनन दर में तेज गिरावट के प्रतिकूल परिणाम देखने को मिले हैं। हालांकि भारत में 2011 के बाद से […]

आज का अखबार, लेख

हवा की गुणवत्ता का नियंत्रण आखिर किसकी जिम्मेदारी?

वायु प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए ऐसी बातचीत की जरूरत है जो एक खास क्षेत्र के एयरशेड का ध्यान रखती हो, क्योंकि हवा गतिमान है और वह कृत्रिम कानूनी दायरों से परे है। बता रहे हैं के पी कृष्णन अब सभी यह समझते हैं कि उत्तर भारत में हवा की गुणवत्ता हमारे समय में […]

आज का अखबार, लेख

GSTAT के गठन में पिछले अनुभवों से सबक लेने की जरूरत

वित्त विधेयक 2023 के जरिये जीएसटी कानून में संशोधन और जीएसटी परिषद की जून 2023 की बैठकों के बाद बहुप्रतीक्षित वस्तु एवं सेवा कर अपील पंचाट (जीएसटीएटी) शीघ्र ही परिचालन आरंभ कर सकता है। यह सही समय है जब हम उच्च गुणवत्ता वाली पंचाट के गठन के बारे में विचार करें। एक उदार लोकतांत्रिक देश […]

आज का अखबार, लेख

शेयर बाजार: रफ्तार से ज्यादा जरूरी है क्वालिटी

एक निश्चित सीमा के बाद लेनदेन का समय घटने से जरूरी नहीं कि इक्विटी बाजार की गुणवत्ता में इजाफा हो। इसके विपरीत इससे भागीदारी और विविधता घट सकती है। बता रहे हैं केपी कृष्णन भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) शेयर बाजारों के निपटान समय में भारी कटौती की संभावना टटोल रहा है। सौदों के […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: प्रस्तावित डीपीबी और नियामकीय परिदृश्य

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 हाल ही में प्रभाव में आया है। यह एक ऐसा अधिनियम है जो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा को इस प्रकार रखने की व्यवस्था करता है कि आम लोगों के पास अपने निजी डेटा को सुरक्षित रखने का भी अधिकार हो और कानूनी उद्देश्यों से ऐसे निजी डेटा का इस्तेमाल […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: चीन में नियामकीय संरचना में बदलाव से सीख

चीन ने हाल में अपनी वित्तीय नियामकीय संरचना में बदलाव किए हैं जिनमें स्पष्ट कर दिया गया है कि किस एजेंसी का क्या कार्य होगा। भारत को भी अब इस ओर ध्यान देना चाहिए। बता रहे हैं के पी कृष्णन वित्तीय नियामकीय संरचना का प्रश्न मूल रूप से इस बात से संबंधित है कि कौन […]

आज का अखबार, लेख

एजेंसियों के लिए स्वतंत्र निदेशक मंडल अनिवार्य

निजी कंपनियों की तरह सरकारी एजेंसियों और नियामक प्राधिकरणों के निदेशक मंडल में स्वतंत्र निदेशकों का बहुमत होना महत्त्वपूर्ण है। बता रहे हैं के पी कृष्णन किसी भी संगठन के बारे में भारतीय सोच किसी प्रमुख जिम्मेदार व्यक्ति के सिद्धांत पर आधारित है। इसके मुताबिक सही व्यक्ति के प्रभारी होने पर कोई संस्था या कंपनी […]

आज का अखबार, लेख

नियामक और सरकार के निर्देश के बीच नियमन

हाल में बिजली मंत्रालय द्वारा केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग को जारी निर्देश नियामकीय स्वायत्तता या इस क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास दोनों के लिए ठीक नहीं है। बता रहे हैं के पी कृष्णन बिजली मंत्रालय ने 8 मई को लिखे एक पत्र में केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) को एक असामान्य वैधानिक निर्देश दिया। पत्र में […]

आज का अखबार, लेख

SEBI की 31वीं या 35वीं वर्षगांठ ?

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कुछ दिनों पहले अपने 35वें स्थापना दिवस के अवसर पर नया प्रतीक चिह्न (लोगो) जारी किया था। SEBI अधिनियम 31 साल पहले 1992 में प्रभाव में आया था। SEBI की स्थापना के पीछे भी एक कहानी और लोक नीति को लेकर कुछ दिलचस्प बाते हैं। भारत में नीति […]

आज का अखबार, लेख

बैकिंग संकट एवं उनके समाधान

बैंकिंग संकट के समाधान के लिए अमेरिका सरकार के शीघ्र उठाए गए कदमों से भारत को सीख लेकर विफल वित्तीय कंपनियों के समाधान पर अधूरी नीतिगत पहल पूरी करनी चाहिए। बता रहे हैं के पी कृष्णन सिलिकन वैली बैंक (एसवीबी) और कुछ अन्य बैंकों के धराशायी होने के बाद वित्तीय आर्थिक नीति में बेहतर विधियों […]

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