facebookmetapixel
Tata Stock: नतीजों के बाद टाटा स्टॉक पर BUY की सलाह, गुजरात सरकार के साथ डील बन सकती है गेम चेंजरFractal Analytics IPO: 9 फरवरी को खुलेगा AI स्टार्टअप का आईपीओ, प्राइस बैंड ₹857–900 तय; GMP दे रहा पॉजिटिव सिग्नलसोना खरीदने का सही समय! ग्लोबल ब्रोकरेज बोले- 6,200 डॉलर प्रति औंस तक जाएगा भावभारतीय IT कंपनियों के लिए राहत या चेतावनी? Cognizant के रिजल्ट ने दिए संकेतAye Finance IPO: अगले हफ्ते खुल रहा ₹1,010 करोड़ का आईपीओ, प्राइस बैंड ₹122-129 पर फाइनल; चेक करें सभी डिटेल्सइंजन में आग के बाद तुर्की एयरलाइंस का विमान कोलकाता में उतराईंधन नियंत्रण स्विच में कोई खराबी नहीं मिली: एयर इंडियाबोइंग 787 को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ींजयशंकर-रुबियो में व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चापीएम मोदी 7–8 फरवरी को मलेशिया दौरे पर, व्यापार से रक्षा तक द्विपक्षीय सहयोग की होगी समीक्षा

MSME को बड़ी राहत: RBI ने सस्ते कर्ज के लिए बदले नियम, ब्याज अब हर 3 महीने पर रीसेट होगा

सरकार ने संसद को बताया कि मॉनेटरी पॉलिसी का असर बेहतर तरीके से पहुंचे, इसलिए MSME को दिए जाने वाले लोन को किसी बाहरी बेंचमार्क से जोड़ने की सलाह दी गई है

Last Updated- December 14, 2025 | 6:57 PM IST
MSME
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

छोटे-मध्यम कारोबारियों यानी MSME को कर्ज सस्ता और आसान मिले, इसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को साफ निर्देश दिए हैं। सरकार ने संसद को बताया कि मॉनेटरी पॉलिसी का असर बेहतर तरीके से पहुंचे, इसलिए MSME को दिए जाने वाले लोन को किसी बाहरी बेंचमार्क से जोड़ने की सलाह दी गई है।

इस सिस्टम में लोन की ब्याज दरें हर तीन महीने में रीसेट होंगी। पहले यह समय ज्यादा होता था, लेकिन अब इसे सिर्फ तीन महीने कर दिया गया है। इससे अगर RBI रेपो रेट कम करता है तो उसका फायदा जल्दी MSME वालों तक पहुंचेगा।

साथ ही, जो पुराने कर्जदार पहले से फिक्स्ड या दूसरे सिस्टम में लोन ले चुके हैं, उन्हें भी नई व्यवस्था में आने का मौका मिलेगा। बैंक उन्हें आपसी सहमति से स्विचओवर की सुविधा देंगे। मतलब पुराने लोन पर भी कम ब्याज का लाभ ले सकेंगे।

क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर में MSME को खास छूट

सरकार गुणवत्ता मानकों को लागू करने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों से क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) जारी करवाती है। ये ऑर्डर भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS के जरिए धीरे-धीरे से लागू होते हैं। लेकिन इनसे छोटे उद्योगों का प्रोडक्शन बाधित न हो, इसलिए MSME को कई तरह की छूट और रियायतें दी गई हैं।

माइक्रो उद्योगों को लागू करने की तारीख से छह महीने अतिरिक्त समय मिलता है, जबकि छोटे उद्योगों को तीन महीने दिया गया है। अगर कोई घरेलू उत्पादक निर्यात के लिए सामान बनाता है तो उसके लिए आयात पर पूरी छूट है। इसी तरह रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए 200 यूनिट तक आयात बिना किसी रोक-टोक के हो सकता है।

Also Read: ऑटो इंडस्ट्री का नया फॉर्मूला: नई कारें कम, फेसलिफ्ट ज्यादा; 2026 में बदलेगा भारत का व्हीकल मार्केट

पुराना स्टॉक, जो QCO लागू होने से पहले बनाया या आयात किया गया हो, उसे छह महीने तक बेचने की छूट रहती है। BIS लाइसेंस की सालाना फीस में भी बड़ी राहत दी गई है। इसमें माइक्रो उद्योगों को 80 फीसदी, छोटे को 50 फीसदी और मध्यम को 20 फीसदी की छूट दी गई है। अगर यूनिट उत्तर-पूर्व में है या महिला उद्यमी चला रही हैं तो अतिरिक्त 10 फीसदी रियायत मिलती है।

सबसे बड़ी बात यह कि MSME यूनिट्स के लिए अपनी लैबोरेट्री रखना अनिवार्य नहीं रहा। पहले यह जरूरी होता था, लेकिन अब वैकल्पिक कर दिया गया है।

कर्ज लेना हुआ और आसान

सरकार ने MSME के लिए म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी स्कीम शुरू की है। इसके तहत गारंटी मिलने से मशीनरी और जरूरी उपकरण खरीदने के लिए लोन आसानी से मिल जाता है।

साथ ही, सूक्ष्म और लघु उद्योगों को 10 लाख रुपये तक के लोन में कोई कोलेटरल या गारंटी नहीं देनी पड़ती। यह नियम सभी अनुसूचित कमर्शियल बैंकों पर लागू है।

(PTI के इनपुट के साथ)

First Published - December 14, 2025 | 6:54 PM IST

संबंधित पोस्ट