नया साल भारत के पैसेंजर व्हीकल मार्केट में कई गाड़ियों के फेसलिफ्ट लेकर आने वाला है। ऑटो कंपनियां नए मॉडल लॉन्च करने की बजाय अपग्रेड और मिड-साइकिल रिफ्रेश पर ज्यादा जोर दे रही हैं। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि 2026 में प्रोडक्ट डेवलपमेंट के तेज होते साइकिल, बदलते ग्राहक की उम्मीदों और सख्त होते रेगुलेटरी नियमों की वजह से यह बदलाव आएगा।
प्रिमस पार्टनर्स के एडवाइजर अनुराग सिंह कहते हैं, “ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में प्रोडक्ट डेवलपमेंट साइकिल बहुत तेज हो गया है। एडवांस्ड डिजाइन सॉफ्टवेयर, वेंडर्स के साथ करीबी सहयोग और असेंबली लाइनों का डिजिटाइजेशन व रोबोटाइजेशन अब फुल मॉडल या वैरिएंट अपग्रेड को सालों की बजाय हफ्तों में पूरा करने की सुविधा दे रहा है।”
एनालिस्ट्स का भी मानना है कि कनेक्टेड टेक्नोलॉजी, इंफोटेनमेंट, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS), कई ड्राइव मोड्स और बेहतर केबिन कम्फर्ट जैसे कस्टमर एक्सपीरियंस फीचर्स अब काफी सस्ते हो गए हैं और तेजी से विकसित हो रहे हैं।
साथ ही, एमिशन और फ्यूल नॉर्म्स से लेकर सेफ्टी और CAFE स्टैंडर्ड्स जैसे रेगुलेटरी बदलाव ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) को अपनी लाइन-अप को नियमित रूप से ट्वीक और अपग्रेड करने पर मजबूर कर रहे हैं।
सिंह ने कहा, “ये ताकतें ऑटोमेकर्स को बेहतर डिजाइन और ज्यादा इक्विप्ड मॉडल ज्यादा बार लाने में सक्षम बना रही हैं और मजबूर भी कर रही हैं। भारत के कॉम्पिटिटिव ऑटोमोटिव मार्केट में रिलेवेंट बने रहने का मतलब है लगातार बार ऊंचा करना।”
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बढ़ती स्वीकार्यता और टेक्नोलॉजी साइकिल के छोटे होते जाने के साथ यह ट्रेंड और तेज होने की उम्मीद है।
अगले साल की शुरुआत में कई पॉपुलर मॉडल्स को कॉस्मेटिक और फीचर अपग्रेड मिलने वाले हैं, क्योंकि ऑटोमेकर्स फुल मॉडल लॉन्च की बजाय मिड-साइकिल रिफ्रेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। अगले साल लाइन में लगे प्रमुख फेसलिफ्ट में महिंद्रा XUV700, महिंद्रा स्कॉर्पियो, टाटा पंच, मारुति ब्रेजा, हुंडई वर्ना, हुंडई एक्सटेरा, स्कोडा कुशक, फॉक्सवैगन टाइगुन और किआ सेल्टॉस शामिल हैं। ये अपडेट मैन्युफैक्चरर्स को ग्राहकों का इंटरेस्ट बनाए रखने और पूरी तरह नए प्रोडक्ट लॉन्च में आई सुस्ती के बीच अपने पोर्टफोलियो को कॉम्पिटिटिव रखने में मदद करेंगे।
पैसेंजर व्हीकल्स की अच्छी डिमांड के बावजूद कंपनियां बड़े पैमाने पर नए मॉडल लॉन्च करने से बचने वाली हैं। इसके बजाय फोकस फेसलिफ्ट, मिड-साइकिल रिफ्रेश और फीचर ऐडिशन पर रहेगा।
जानकारों का मानना है कि यह बदलाव आंशिक रूप से रणनीतिक है और आंशिक रूप से रेगुलेटरी। अप्रैल 2027 से लागू होने वाले नए CAFE 3 फ्यूल एफिशिएंसी स्टैंडर्ड्स के साथ कंपनियां पूरी तरह नए प्लेटफॉर्म्स पर कमिट करने की बजाय एफिशिएंसी और एमिशन कंप्लायंस बेहतर करने वाले अपग्रेड को प्राथमिकता दे रही हैं।
अगले साल की ज्यादातर एक्टिविटी कॉम्पैक्ट और मिड-साइज SUV सेगमेंट में केंद्रित रहेगी, खासकर 10-20 लाख रुपये की प्राइस रेंज में, जहां पहली बार खरीदने वाले और अपग्रेड करने वाले दोनों तरह के खरीदारों से मजबूत डिमांड बनी हुई है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को भी ज्यादा ट्रैक्शन मिलेगा, हालांकि उनकी एडॉप्शन की रफ्तार सेगमेंट और प्राइसिंग पर निर्भर करेगी।
2026 की शुरुआत में इनमें बदलाव की उम्मीद है: