अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताने से भारत के कपड़ा और वस्त्र क्षेत्र को लाभ मिल सकता है। वह वियतनाम, चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले थोड़ा बढ़त में रह सकता है। उद्योग के सूत्रों के अनुसार प्रमुख मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और भारत से बढ़ती अमेरिकी खरीद से साल 2026-27 के दौरान निर्यात में मासिक आधार पर दो अंकों की वृद्धि हो सकती है।
अमेरिका के साथ यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब रविवार को बजट में इस क्षेत्र में अपेक्षित मांग को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए गए हैं। इंडियन टेक्सप्रेन्योर्स फेडरेशन (आईटीएफ) के संयोजक प्रभु दामोदरन ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2026-27 से परिधान और होम टेक्सटाइल निर्यात में मासिक आधार पर दो अंकों की वृद्धि हो सकती है और मासिक कपड़ा निर्यात की दर मौजूदा 1.27 अरब डॉलर से बढ़कर 1.5 से 1.6 अरब डॉलर हो जाएगी।’
अमेरिका को वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत से लगभग 11 अरब डॉलर का कपड़ा और परिधान निर्यात हुआ। इनका निर्यात भारत के अमेरिका को कुल निर्यात का लगभग 28 प्रतिशत था। दिल्ली की टीटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और आईसीसी नैशनल टेक्सटाइल्स कमेटी के चेयरमैन संजय कुमार जैन ने कहा, ‘यह भारतीय कपड़ा और वस्त्र उद्योग के लिए बहुत सकारात्मक बात है। सबसे अधिक टैरिफ वाले देश से अब हमें सबसे कम वाले देश का फायदा मिल रहा है।’ अमेरिका में बढ़े हुए टैरिफ के कारण निटवियर हब तिरुपुर को अमेरिकी बाजार में पहले ही साल 2025 में 15,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्स्टाइल इंडस्ट्री (सिटी) के अश्विन चंद्रन ने कहा, ‘इस करार से यह भी सुनिश्चित होगा कि फैक्टरियां एक बार फिर पूरी क्षमता से चल सकें और नौकरियों का सृजन फिर से पिछले स्तर पर आ सके।’ उन्होंने कहा ‘यह सौदा साल 2030 तक कपड़ा और वस्त्र क्षेत्र में 100 अरब डॉलर के निर्यात का भारत का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है, जो वित्त वर्ष 25 में 37.7 अरब डॉलर था।