भारत से अमेरिका को होने वाले इंजीनियरिंग निर्यात की रफ्तार बढ़ने की संभावना है क्योंकि अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। इससे कई वर्षों से शुल्क के कारण बढ़ी लागत प्रतिस्पर्धा में काफी सुधार होगा। वाहन कलपुर्जों के निर्माताओं को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। आयात शुल्क (टैरिफ) में बदलाव से अमेरिकी बाजार में भारत के निर्यात को धार मिलेगी और वाहनों के मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) की तुलना में सहायक आपूर्तिकर्ताओं यानी कलृपुर्जा निर्यात को ज्यादा बढ़त मिलेगी।
वित्त वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर की वस्तुओं का निर्यात किया। इसमें इंजीनियरिंग वस्तुएं 20.1 अरब डॉलर के साथ सबसे बड़ी श्रेणी रहीं। इस क्षेत्र में इलेक्ट्रिकल उपकरण, औद्योगिक मशीनरी, लोहा एवं स्टील के सामान, वाहन और वाहनों के कलपुर्जे शामिल हैं। उद्योग के अनुमानों के अनुसार अमेरिका को होने वाले भारत के इंजीनियरिंग निर्यात का लगभग 62 प्रतिशत आयात शुल्क में कटौती के दायरे में आएगा क्योंकि इन पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत रह जाएगा। मशीनरी, कास्टिंग, इलेक्ट्रिकल उपकरण, बॉयलर और कंप्रेसर जैसे सामान की प्रतिस्पर्धा बहाल होने की उम्मीद है, जो अधिक टैरिफ के बोझ से जूझ रहे थे।
बाकी बचे 38 प्रतिशत इंजीनियरिंग निर्यात समझौते के दायरे से बाहर हैं क्योंकि वे अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 232 के तहत आते हैं। इन उत्पादों में वाहन, वाहन कलपुर्जे, स्टील और एल्युमीनियम शामिल हैं जिन पर 25 से 50 प्रतिशत तक के अतिरिक्त शुल्क लगते रहेंगे। ये शुल्क किसी देश विशेष के लिए नहीं हैं। ये अनुमान वित्त वर्ष 2025 के निर्यात डेटा पर आधारित हैं।
भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (ईईपीसी) के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा कि टैरिफ में कटौती से उन अमेरिकी खरीदारों की मांग फिर से बढ़ सकती है, जिन्होंने अधिक शुल्क के कारण ऑर्डरों में कटौती कर दी थी। उन्होंने कहा, ‘घटी हुई दर से उन ज्यादातर प्रमुख इंजीनियरिंग श्रेणियों को लाभ होगा जहां भारत की पहले से ही मजबूत उपस्थिति है। इंजीनियरिंग निर्यातकों, विशेष रूप से छोटे एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को 50 प्रतिशत के भारी शुल्क से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था और अब उन्हें काफी फायदा मिलने की उम्मीद है।’ चड्ढा ने कहा कि हालांकि स्टील, एल्युमीनियम एवं वाहन सामान पर धारा 232 के शुल्क अब भी लागू हैं। लेकिन उम्मीद है कि मजबूत व्यापारिक संबंधों से आखिरकर उन्हें भी कम करने की राह खुल सकती है।
टैरिफ के दबाव के बावजूद, अमेरिका में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-दिसंबर महीने के दौरान 14.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। उद्योग के अधिकारियों को उम्मीद है कि टैरिफ में कटौती से कीमतों में लचीलापन दिखेगा जिससे ऑर्डरों में और तेजी आएगी। इंजीनियरिंग वस्तुओं की श्रेणी में वाहन कलपुर्जों के निर्माताओं को प्रमुख लाभार्थी के रूप में देखा जा रहा है।
ब्रोकिंग कंपनियों के अनुसार, कई बड़ी भारतीय वाहन कलपुर्जा कंपनियों के निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 25-30 फीसदी है। टैरिफ कम होने से उन्हें काफी फायदा होगा। ऐक्सिस डायरेक्ट का अनुमान है कि जवाबी शुल्क घटने से आयात की लागत में प्रभावी रूप से 6-8 फीसदी तक की कमी हो सकती है। बाजार की प्रतिक्रिया में भी यह उम्मीद दिखी। निफ्टी ऑटो सूचकांक में 2.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, और सबसे अधिक भारत फोर्ज (6.5 प्रतिशत) के शेयर चढ़े। उसके बाद, संवर्धना मदरसन इंटरनैशनल (6.4 प्रतिशत), यू नो मिंडा (2.5 प्रतिशत) जैसी प्रमुख वाहन कलपुर्जे निर्यात करने वाली कंपनियों को फायदा मिला।
वाहन ओईएम के शेयरों ने मामूली बढ़त दर्ज की जो अमेरिका के बाजार में उनके सीधे सीमित निवेश को दर्शाता है मसलन टीवीएस मोटर्स में 1.8 प्रतिशत, एमऐंडएम में 1.87 प्रतिशत, टाटा मोटर्स पीवी में 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।