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गांवों से मिल रही अच्छी वसूली

Last Updated- December 15, 2022 | 8:01 PM IST

ऋण चुकाने पर मोहलत की सुविधा के बावजूद अधिकांश सूक्ष्म वित्त संस्थाओं (एमएफआई) के ग्रामीण ग्राहक लगातार अपने बकाये का भुगतान कर रहे हैं। ज्यादातर एमएफआई को जून में 50 फीसदी से अधिक वसूली की उम्मीद है जिसमें अधिकांश हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र से पुनर्भुगतान का है।
ग्रामीण पेशों की मौलिक प्रकृति के साथ ही कटाई सीजन से प्राप्त आय ने ग्रामीण कर्जदारों को कोविड के कारण उत्पन्न आर्थिक सुस्ती में भी अधिक सक्षम बने रहने में मदद की है। 
एमएफआई के अनुसार मई में ग्रामीण क्षेत्रों से वसूली शहरी क्षेत्रों में हुई वसूली के मुकाबले 10-20 फीसदी अधिक रही। अधिकांश एमएफआई कर्जदारों के पास अगस्त के अंत तक मोहलत की सुविधा लेने का विकल्प है। 
क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण ने अपने ग्राहकों को अप्रैल और मई महीने के लिए पुनर्भुगतान पर व्यापक मोहलत दी थी। इसके 85 फीसदी कर्जदार ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। चालू महीने में एमएफआई को 70 फीसदी वसूली की उम्मीद है। विगत पंद्रह दिनों में अपने कर्जदारों के साथ संवाद करने के बाद एमएफआई ने अनुमान जताया है कि 70 फीसदी ग्राहक चालू महीने में पुनर्भुगतान करने को इच्छुक हैं, जबकि 20 फीसदी ग्राहक पुनर्भुगतान के लिए 15 दिन से एक महीने की अतिरिक्त मोहलत मांग रहे हैं। बचे हुए 10 फीसदी कर्जदार जो कि शहरी हैं, ने शीघ्र पुनर्भुगतान करने में अक्षमता जाहिर की है।  
क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी उदय कुमार हेब्बार ने कहा, ‘कटाई से प्राप्त आय के अलावा ग्रामीण इलाकों में कृषि और डेरी जैसे सेवाओं की मौलिक प्रकृति से वसूली में सहायता मिलने की उम्मीद है। ये क्षेत्र पिछले चार से पांच हफ्तों से पहले से ही कार्य कर रहे हैं।’
सूक्ष्म वित्त के प्रतिनिधि संगठन एमएफआईएन (माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क ) के चेयरमैन मनोज नांबियार के अनुसार फिलहाल सभी इलाकों में वसूली प्रतिशत 20-40 फीसदी है, कुछ ग्रामीण क्षेत्र में यह 40 फीसदी तक है। 
नांबियार ने कहा, ‘ग्रामीण क्षेत्रों में वसूली बेहतर है। इसका पहला कारण यह है कि उपज से प्राप्त आय के कारण लोग ऋणों का भुगतान कर पाने में सक्षम हैं। दूसरी बात है कि कोविड के कारण ग्रामीण इलाकों में आजीविका कम प्रभावित हुई है।’
सूक्ष्म वित्त की एक और प्रतिनिधि संस्था सा-धन के कार्यकारी निदेशक पी सतीश ने कहा जहां अप्रैल में समग्र वसूली 8 से 9 फीसदी थी, यह मई में बढ़कर 15-16 फीसदी हो गई।    
सतीश ने कहा, ‘मोटे तौर पर, शहरी क्षेत्रों में वसूली जहां 11 से 12 फीसदी के बीच है वहीं ग्रामीण इलाकों में यह करीब 15 से 16 फीसदी है।’ 
उत्तर प्रदेश और बिहार के कृषि क्षेत्र में परिचालन करने वाला ग्रामीण केंद्रित संगठन मार्गदर्शक फाइनैंशियल सर्विसेज के मुख्य कार्याधिकारी राहुल मित्रा के अनुसार अप्रैल में वसूली लगभग शून्य थी जो मई में करीब 25 से 30 फीसदी हो गई।
मित्रा ने कहा, ‘हमें जून में वसूली लगभग दोगुनी हो जाने की उम्मीद है।’

First Published - June 8, 2020 | 12:25 AM IST

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