देसी सौर सेल और मॉड्यूल उत्पादकों ने सरकार से इक्वलाइजेशन लेवी लगाने का आग्रह किया है ताकि विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थापित इकाइयां सौर आयातों पर बुनियादी सीमा शुल्क (बीसीडी) लगाने के सरकार के फैसले से प्रभावित नहीं हों। उद्योग ने कहा कि यदि एसईजेड के लिए समान असवर का अभाव होगा तो एसईजेंड में स्थापित घरेलू विनिर्माताओं को दुकान बंद करनी पड़ेगी जिससे 15,000 लोगों की नौकरियों पर संकट आ जा सकता है। एसईजेड की विनिर्माण इकाइयों को विदेशी कंपनियों के तौर पर लिया जाता है और इसी कारण उन पर भी सीमा शुल्क लगाया जाता है।
केंद्र सरकार घरेलू ग्राहकों के साथ सौदा करने वाले एसईजेड में स्थित विनिर्माताओं को प्रोत्साहन देने के लिए 2 फीसदी इक्वलाइजेशन लेवी लगाने पर विचार कर रही है।
विक्रम सोलर के मुख्य कार्याधिकारी साईबाबा वुटुकुरी ने कहा, ‘इक्वलाइजेशन लेवी से एसईजेड में स्थापित विनिर्माण इकाइयों द्वारा संयंत्र स्थापित करने में मिलने वाले लाभ आकर्षक बनेंगे। हम इक्वलाइजेश लेवी लागू करने के लिए इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं क्योंकि इससे यह सुनिश्चित होगा कि डीटीए और एसईजेड में स्थापित विनिर्माण इकाइयां सीमा शुल्कों के मामले में समान आधार पर हैं।’ उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 3,100 मेगावॉट की सेल विनिर्माण क्षमता में से 2,000 मेगावॉट एसईजेड में स्थापित है। मॉड्यूल विनिर्माण के क्षेत्र में 9,000 मेगावॉट में से 3,800 मेगावॉट एसईजेड के भीतर है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने सौर सेलों और मॉड्यूलों के आयात पर 20 फीसदी बीसीडी लगाने का प्रस्ताव दिया है। मंत्रालय का यह कदम चीन से आयातों को प्रतिबंधित करने के देश के हालिया प्रयासों का हिस्सा है। देश की सौर क्षमता का करीब 80 फीसदी चीनी सौर गियरों पर तैयार होता है।
इसी दौरान व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने एक हालिया आदेश में चीन से होने वाले सौर आयातों पर लगने वाले सेफगार्ड ड्यूटी को विस्तारित करने का सुझाव दिया था। फिलहाल चीनी आयातों पर 15 फीसदी सेफगार्ड ड्यूटी लगता है जो कि इस महीने समाप्त होने वाला है। डीजीटीआर ने एक साल और के लिए 14.9 फीसदी शुल्क का सुझाव दिया है। महानिदेशालय का यह सुझाव विभिन्न घरेलू सौर विनिर्माताओं की ओर से चीन से सस्ती आयातों के समक्ष एक समान अवसर मुहैया कराने के लिए दायर की गई याचिका पर प्रतिक्रिया के रूप में आया है। उद्योग जगत इसलिए हालिया आयात प्रतिबंध के कारण चीन से वेफर्स की आपूर्ति शृंखला में आई बाधा को लेकर भी चिंतित है। वेफर्स सौर सेलों और मॉडयूलों के लिए एक महत्वपूर्ण पुर्जा है। हालांकि, उद्योग भारत में वेफर और इनगट उत्पादन के लिए नीतिगत समर्थन की उम्मीद कर रहा है। रिन्यूसिस के वैश्विक मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक अविनाश हीरानंदानी ने कहा, ‘सरकार भारत में सिलिकॉन वेफर विनिर्माण के लिए महत्वाकांक्षी नीति लाने पर जोर दे रही है और हम उम्मीद करते हैं कि यह शीघ्र ही आएगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय और चीनी सौर गियरों के दाम में 20 से 25 फीसदी का अंतर है।