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IRDAI का सख्त निर्देश, अब दस्तावेज की कमी पर सामान्य बीमा दावा नहीं होगा खारिज

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IRDAI claim settlement rules: बीमा कंपनियों से कहा गया है कि वे ग्राहक को पॉलिसी जारी करने के दौरान ही सभी दस्तावेज एकत्रित करें।

Last Updated- June 11, 2024 | 10:03 PM IST
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भारत के बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने मंगलवार को कहा कि सामान्य बीमा कंपनियां ‘दस्तावेज की कमी’ के आधार पर किसी भी दावे को खारिज नहीं करेंगी। बीमा कंपनियों से कहा गया है कि वे ग्राहक को पॉलिसी जारी करने के दौरान ही सभी दस्तावेज एकत्रित करें।

नियामक ने एक वर्ष से कम अवधि की पॉलिसियों के लिए यह महत्त्वपूर्ण निर्देश दिया है। नियामक ने कहा कि कंपनियां एक वर्ष से कम अवधि की पॉलिसियों के दावे की सूचना या निपटान के संबंध में विस्तार की अवधि के साथ या नहीं के उपबंध या समयबद्ध तौर पर शर्तों व स्थितियों की समीक्षा के बिना उत्पाद शामिल करे।

नियामक का सामान्य बीमा उत्पादों के लिए मास्टर सर्कुलर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसके अनुसार, ‘ग्राहक से केवल दावे से सीधे जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए कहा जा सकता है।’

परिपत्र के अनुसार, ‘दावे के निपटान के समय ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट, फिटनेस, एफआईआर, अनट्रेस्ड रिपोर्ट, अग्निशमन रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बहीखाता, माल रजिस्टर, दिहाड़ी रजिस्टर, मरम्मत बिल (केवल कैशलेस मौजूद नहीं होने की स्थिति में) की मांग जा सकती है।’

नियामक ने बताया कि अगर वारंटी या शर्त का उल्लंघन नुकसान की प्रकृति या परिस्थिति से प्रासंगिक नहीं है तो बीमाकर्ता दावे को पूर्ण या आंशिक रूप से खारिज नहीं कर सकता है।

इसी तरह यदि अनुमानित हानि नहीं बढ़ती है तो बीमाधारक की तरफ से देरी होने की स्थिति में दावा निरस्त नहीं हो सकता है।

इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईबीएआई) के सदस्य हरि राधाकृष्णन ने कहा, ‘हर दावे के समर्थन में कुछ दस्तावेज के समूह की जरूरत होती है। बीमाधारक दावे के निपटान के समय सभी दस्तावेज मुहैया कराने में समर्थ नहीं होता है या वह दस्तावेज जमा कराने की स्थिति में नहीं होता है। ऐसे में दस्तावेज की कमी का हवाला देकर दावे को खारिज कर दिया जाता है।’

उन्होंने कहा कि नियामक के इस कदम से दावे खारिज होने में गिरावट आएगी। बीमाकर्ता से कहा गया है कि आंशिक नुकसान की स्थिति में खुदरा पॉलिसी धारक पर साल्वेज अमाउंट को लेकर दबाव नहीं बनाने के लिए कहा गया है।

ऐसे में ग्राहक को दावा मूल्य का भुगतान किया जाएगा जबकि साल्वेज अमाउंट को एकत्रति करने की जिम्मेदारी बीमाकर्ता पर होगी। साल्वेज वैल्यू वह राशि है जो संपत्ति का नुकसान होने की स्थिति में उसे बेचे जाने पर हासिल होगा।

यह राशि दावा राशि से घटा दी जाती है। दावे के शीघ्र निपटान के लिए भी इंतजाम किए गए हैं।

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First Published - June 11, 2024 | 10:03 PM IST

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