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India-EU ट्रेड डील पर मार्केट का मिक्स्ड रिएक्शन! ब्रोकरेज क्या कह रहे हैं?

करीब 20 साल की लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आखिरकार ट्रेड डील पर सहमति बन गई है। मौजूदा बातचीत साल 2022 से चल रही थी, जो अब पूरी हो गई है

Last Updated- January 28, 2026 | 12:50 PM IST
India EU trade deal

हालांकि, इस बड़ी डील के बाद भी शेयर बाजार की प्रतिक्रिया ज्यादा मजबूत नहीं रही। इसकी वजह है 1 फरवरी को आने वाला केंद्रीय बजट और दुनिया में चल रहे भू-राजनीतिक हालात। वहीं, देश की ब्रोकरेज कंपनियों ने इस डील पर मिलाजुली राय दी है। ज्यादातर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह डील सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन इसका पूरा फायदा भारत की कंपनियों को मिलने में समय लगेगा।

27 देशों का बाजार, बड़ा मौका

ब्रोकरेज फर्म Bernstein के मुताबिक, यह डील भारत को एक साथ EU के 27 देशों के बाजार तक पहुंच देती है, जो अपने आप में बहुत बड़ा मौका है। Bernstein का कहना है कि अगर EU को एक देश माना जाए, तो यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार होगा। भारत का EU को निर्यात, अमेरिका के करीब 88 फीसदी के बराबर है।

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भारत और EU के बीच अभी कितना व्यापार?

HSBC के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने EU को करीब 76 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि EU से करीब 61 अरब डॉलर का सामान खरीदा। HSBC का मानना है कि इस डील से मशीनरी, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयों के कच्चे माल और टेक्सटाइल सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है।

Bernstein की चेतावनी

Bernstein का कहना है कि डील पर सहमति तो बन गई है, लेकिन इसे लागू होने में समय लगेगा। समझौते को पहले EU की सभी भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा, फिर कानूनी जांच होगी और इसके बाद यूरोपीय काउंसिल और संसद की मंजूरी लेनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम एक साल लग सकता है।

इस बीच EU इंडोनेशिया और मैक्सिको के साथ अपने दूसरे समझौते लागू कर सकता है। Bernstein का मानना है कि भारत इस दौड़ में थोड़ा पीछे से शुरुआत कर रहा है।

HSBC: रणनीतिक फायदे भी हैं

HSBC का कहना है कि यह डील सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। इसके जरिए EU भारत के साथ अपने रणनीतिक और रक्षा संबंध भी मजबूत करना चाहता है। साथ ही EU चीन और अमेरिका पर निर्भरता कम करना चाहता है।

हालांकि, EU के किसान भारत से कृषि उत्पादों के आयात का विरोध कर सकते हैं। इसके अलावा EU का कार्बन टैक्स (CBAM) स्टील जैसे सेक्टर के फायदे को कुछ हद तक कम कर सकता है। हालांकि फार्मा और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर इससे ज्यादा प्रभावित नहीं होंगे।

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किन कंपनियों को फायदा हो सकता है?

Motilal Oswal के मुताबिक, इस डील से स्टील, ऑटो, डिफेंस, कैपिटल गुड्स और एग्रीकल्चर सेक्टर की कई कंपनियों को फायदा हो सकता है। इसके अलावा IT कंपनियां जैसे TCS, Infosys, HCL Tech और Wipro को EU से स्थिर मांग मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर इंजीनियरिंग और रिसर्च से जुड़ी कंपनियों को EU बाजार से बड़ा फायदा हो सकता है।

Antique Broking की राय

Antique Broking का कहना है कि यह डील भारत और EU दोनों के लिए फायदेमंद है। इससे भारत वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूती से जुड़ेगा। मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और विदेशी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। फार्मा सेक्टर को कम टैरिफ और सस्ता कच्चा माल मिलने से फायदा होगा। IT सेक्टर के लिए भी EU एक बड़ा बाजार है, जिससे कंपनियां अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर पाएंगी।

कुल मिलाकर

India–EU ट्रेड डील एक बड़ा और अहम समझौता है। हालांकि इसका पूरा असर तुरंत नहीं दिखेगा, लेकिन आने वाले सालों में यह भारत की अर्थव्यवस्था और उद्योगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

First Published - January 28, 2026 | 12:50 PM IST

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