अगर आप म्युचुअल फंड के जरिए सोने या चांदी में निवेश करते हैं, तो संभव है कि आपके पोर्टफोलियो में एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) का भी एक्सपोजर हो। भले ही आप यह एक्टिव रूप से न देखते हों कि उसे कौन-सी फंड हाउस मैनेज कर रही है। इस हफ्ते इस इकोसिस्टम ने एक अहम मुकाम हासिल किया।
निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड के गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ की ज्वाइंट एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है, जिससे वह भारत में कीमती धातुओं के ईटीएफ (precious metals ETFs) का सबसे बड़ा मैनेजर बन गया है। NSE के आंकड़ों के मुताबिक, 28 जनवरी 2026 तक निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ (Nippon India’s Gold ETF) का AUM 55,124 करोड़ रुपये था, जबकि सिल्वर ईटीएफ का AUM 47,392 करोड़ रुपये रहा। इस तरह दोनों का कुल AUM 1.02 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
व्यक्तिगत निवेशकों के लिए यह आंकड़ा अपने आप में उतना मायने नहीं रखता, जितना यह संकेत देता है कि सोना और चांदी अब पोर्टफोलियो में तेजी से मुख्यधारा की निवेश संपत्ति बन रहे हैं और निवेशक इन्हें ETF के जरिए अपनाना पसंद कर रहे हैं।
गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ मैनेज करने वाली टॉप 10 एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) में निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड का ज्वाइंट एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) सबसे ज्यादा है। यह आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड (₹48,165.7 करोड़), एचडीएफसी म्युचुअल फंड (₹34,075.7 करोड़) और एसबीआई म्युचुअल फंड (₹33,103.6 करोड़) जैसे प्रतिस्पर्धियों से आगे है।
कुल मिलाकर, टॉप 10 AMCs गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में 2.76 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति को मैनेज कर रही हैं।
| Asset Management Company (AMC) | Gold ETF AUM (₹ crore) | Silver ETF AUM (₹ crore) | Total AUM (₹ crore) |
|---|---|---|---|
| Nippon India MF | 55,124.5 | 47,392.0 | 102,516.5 |
| ICICI Prudential MF | 24,586.6 | 23,579.1 | 48,165.7 |
| HDFC MF | 22,985.0 | 11,090.7 | 34,075.7 |
| SBI MF | 24,194.4 | 8,909.2 | 33,103.6 |
| Kotak MF | 15,595.0 | 4,222.5 | 19,817.5 |
| Tata MF | 5,109.5 | 6,987.3 | 12,096.8 |
| Axis MF | 5,264.7 | 2,709.8 | 7,974.5 |
| Aditya Birla Sun Life MF | 2,909.8 | 4,968.6 | 7,878.3 |
| UTI MF | 4,320.5 | 2,248.0 | 6,568.4 |
| Mirae Asset MF | 3,022.1 | 1,263.3 | 4,285.4 |
गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ के एसेट्स में तेज बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि निवेशक प्रेशियस मेटल्स में निवेश के लिए पारदर्शी, लिक्विड और रेगुलेटेड विकल्पों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। गोल्ड ईटीएफ का इस्तेमाल पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन लाने और महंगाई से बचाव के साधन के तौर पर किया जा रहा है, जबकि सिल्वर ईटीएफ को प्रेशियस मेटल होने के साथ-साथ इंडस्ट्रियल मेटल की दोहरी भूमिका के चलते तेजी से अपनाया जा रहा है।
कई सालों तक भारत में सोने में निवेश का मतलब गहने या फिजिकल गोल्ड बार खरीदना होता था। लेकिन अब रिटेल, HNIs और संस्थागत निवेशकों का एक बड़ा वर्ग सोना-चांदी में निवेश के लिए ETF को चुन रहा है।
इसके पीछे वजहें साफ हैं-
1 लाख करोड़ रुपये के इस आंकड़े में गोल्ड और सिल्वर का बंटवारा भी कई संकेत देता है।
गोल्ड अब भी उन निवेशकों को ज्यादा आकर्षित कर रहा है जो लंबे समय के लिए स्थिरता चाहते हैं, खासकर करेंसी में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक तनाव या शेयर बाजार में गिरावट के दौर में। वहीं, सिल्वर को पिछले दो सालों में तेजी से अपनाया गया है, जिसकी वजहें हैं-