बीएस बातचीत
देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के ऋणदाता एचडीएफसी बैंक ने आरबीआई से नकदी आरक्षी अनुपात (सीआरआर) और सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) की राह आसान बनाने को कहा है। बैंक के मुख्य वित्तीय अधिकारी श्रीनिवासन वैद्यनाथन ने मनोजित साहा को एक साक्षात्कार में बताया कि आसान राह से बैंक को उधारी के लिए कोष उपलब्ध कराकर अर्थव्यवस्था को लगातार सहारा देने में मदद मिलेगी। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
एचडीएफसी बैंक-एचडीएफसी विलय पर ताजा जानकारी क्या है? क्या आपने सीआरआर/एसएलआर मानकों और प्राथमिक क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए और समय मांगा है? क्या इसे लेकर और समय दिए जाने की योजना पर आरबीआई से कोई संकेत मिला है?
हम आरबीआई समेत विभिन्न नियामकों से मंजूरियां हासिल करने की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। इन प्रक्रियाओं में 12-18 महीने का वक्त लग सकता है, जो किसी भी विलय के लिए मानक समय-सीमा है। हमने सीआरआर/एसएलआर और पीएसएल के लिए राह आसान बनाए जाने को कहा है, जिस पर नियामक विचार कर रहा है।
एचडीएफसी ने रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में गैर-सूचीद्घ कंपनियों में निवेश किया है। विलय के बाद क्या ये परिसंपत्तियां एचडीएफसी बैंक के लिए स्थानांतरित हो जाएंगी या एचडीएफसी को विलय के बाद इन निवेश से निकलने की जरूरत होगी?
कई सहायक इकाइयां और संयुक्त उपक्रम हैं। बड़ी सहायक इकाइयां (एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी एएमसी और एचडीएफसी इरगो) सभी, खासकर वित्तीय क्षेत्र की हैं और इन्हें बैंक को स्थानांतरित किया जाएगा।
क्या आप मानते हैं कि बैंक का थोक बिक्री बहीखाता लगातार रिटेल ऋणों से आगे बना रहेगा?
हमने कोई लक्ष्य तय नहीं किया है, क्योंकि खासकर मिश्रण और वृद्घि मांग पर निर्भर है। लेकिन रिटेल मिश्रण में सुधार आ सकता है। महामारी के दौरान हम उधारी को लेकर सतर्क थे, क्योंकि कोविड की वजह से कई तरह की अनिश्चितताएं जुड़ी हुई थीं और अर्थव्यवस्था/कर्जदार पर उसका प्रभाव पडऩे की आशंका बनी हुई थी। हमने होलसेल और रिटेल दोनों में बेहतर स्थिति वाले कर्जदारों पर ध्यान दिया है।
होलसेल-रिटेल परिसंपत्ति मिश्रण के बारे में दो-तीन साल में स्थिति कैसी रहेगी?
अगले कुछ वर्षों में हमें सरकारी निवेश और खपत (आवासीय क्षेत्र समेत) से जीडीपी को मदद मिलने की संभावना है। हमने रिटेल सेगमेंट और महामारी से संबंधित ऋण जरूरतों पर जोर दिया है। हमने रिटेल-होलसेल के बीच कोई खास मिश्रण का लक्ष्य नहीं रखा है, लेकिन रिटेल मिश्रण में भविष्य में सुधार आने की संभावना है।
जब कई बैंक डिजिटल पर जोर दे रहे हैं, ऐसे में इसकी क्या वजह है कि एचडीएफसी बैंक शाखाएं खोलने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है?
हमारा मानना है कि खासकर दूरदराज इलाकों में शाखाएं नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बेहद जरूरी हैं। हमारा मॉडल शाखाओं का इस्तेमाल कर ग्राहकों को लुभाना और उन्हें सेवाओं के लिए डिजिटल चैनल मुहैया कराना है। ये डिजिटल-केंद्रित शाखाएं हैं जो सभी उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाने में सक्षम बनाएंगी।
बैंक ने मझोले स्तर के कर्मचारियों के लिए प्रत्येक 1 रुपये पर 10 करोड़ रीस्ट्रिक्टिेड स्टॉक यूनिट्स (आरएसयू) को स्वीकृति दी है। इसके पीछे क्या मकसद है?
हमने कर्मचारियों के लिए दीर्घावधि रियायत योजनाओं के तौर पर इसॉप का प्रभावी तौर पर इस्तेमाल किया है। आरएसयू के साथ, हमने मध्यम स्तर के कर्मचारियों को भी इसके दायरे में शामिल किया है। इसॉप की तरह आरएसयू भी कर्मचारियों के लिए वेतन पैकेज का हिस्सा होंगे।