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Hero Electric के एमडी मुंजाल ने कहा, EV सब्सिडी में धीरे-धीरे की जाए कमी

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मुंजाल ने बिज़नेस स्टैंडर्ड ईवी डायलॉग्स में कहा, ‘हम नहीं समझते कि लंबे समय तक सब्सिडी जारी रखने से किसी का भला होगा।'

Last Updated- July 20, 2023 | 11:21 PM IST
Business Standard

हीरो इलेक्ट्रिक के प्रबंध निदेशक नवीन मुंजाल (Hero Electric MD) का कहना है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (EV Sales) की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी (EV Subsidy) का प्रावधान धीरे-धीरे वापस लिया जाना चाहिए। मुंजाल का कहना है कि सब्सिडी अचानक रुकने से पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ी लोकप्रियता पर अचानक ब्रेक लग सकता है।

मुंजाल ने बिज़नेस स्टैंडर्ड ईवी डायलॉग्स में कहा, ‘हम नहीं समझते कि लंबे समय तक सब्सिडी जारी रखने से किसी का भला होगा। हमारा कारोबार ढांचा सब्सिडी आधारित नहीं है। हम ये वाहन कुछ इस तरह तैयार कर रहे हैं ताकि वे बिना किसी सब्सिडी के भी बाजार में टिके रहें।’

सब्सिडी में कमी की घोषणा के बाद इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के दाम बढ़े

भारी उद्योग मंत्रालय ने मई में फास्टर एडॉप्शन ऐंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड व्हीकल्स (FAME Schee) इंडिया स्कीम के अंतर्गत सब्सिडी में कमी कर दी थी। यह संशोधित सब्सिडी व्यवस्था 1 जून से प्रभावी हो गई है। सब्सिडी में कमी की घोषणा के बाद टीवीएस मोटर कंपनी, ऐथर एनर्जी और ओला इलेक्ट्रिक ने अपने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के दाम बढ़ा दिए हैं। हीरो इलेक्ट्रिक ने दाम नहीं बढ़ाए हैं।

अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम में प्रमुख निवेश अधिकारी मालविका पिल्लै ने आयोजित चर्चा के दौरान कहा कि व्यक्तिगत इलेक्ट्रिक वाहन से सब्सिडी हटाकर संपूर्ण इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में नहीं झोंकनी चाहिए। उन्होंने कहा, व्यक्तिगत इलेक्ट्रिक वाहन खंड में सब्सिडी से काफी मदद मिली है और अब शायद इसकी कोई भूमिका नहीं दिख रही है।

जून में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री घटी

कीमतें बढ़ने के बाद जून में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री भारत में मासिक आधार पर 56.3 प्रतिशत कम होकर 45.806 (वाहन) रह गई। देसी बाजार में हीरो इलेक्ट्रिक की बिक्री 46.18 प्रतिशत कम होकर जून में 1,135 (वाहन) रह गई।

क्या हीरो इलेक्ट्रिक बिना सब्सिडी के कारोबार करने के लिए तैयार है? इस पर मुंजाल ने कहा, ‘जब तक कारोबार करने के अवसर समान रहेंगे तब तक हमें कोई परेशानी नहीं है। फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों का कारोबार ठीक चल रहा है, मगर  सब्सिडी तत्काल खत्म करने से मामला बिगड़ जाएगा। किसी भी दृष्टिकोण से सब्सिडी धीरे-धीरे समाप्त करना ठीक रहेगा।’

उन्होंने कहा कि सब्सिडी लंबे समय तक जारी रखना भी ठीक नहीं होगा क्योंकि इससे पूरे इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग का ताना-बाना ही बिगड़ जाएगा। मुंजाल ने कहा, ‘मगर बाजार के विकास एवं कारोबार बढ़ने के साथ ही सब्सिडी से जुड़ी नीतियों में भी बदलाव लाने होंगे। वाहनों में तकनीक बदलने के साथ-साथ ग्राहकों की पसंद-नापसंद भी बदल रही है।‘

पिल्लै ने कहा कि अगर भारत वाहनों से निकलने वाले धुएं के उत्सर्जन में कमी लाना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना चाहता है तो उसे सड़कों से प्रदूषण फैलाने वाली बसें हटानी होगीं। उन्होंने कहा कि इसके साथ सभी बसें इलेक्ट्रिक बनाने के लिए निजी क्षेत्रों को वित्त उपलब्ध कराना होगा। पिल्लै ने कहा, ‘कुछ सरकारों ने सार्वजनिक बसों की जगह इलेक्ट्रिक बसें उतारने की घोषणा की है मगर इस दिशा में तेजी से प्रयास नहीं हो पा रहा है।‘

भारत में वाहन उद्योग एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है: मारुति 

मारुति सुजूकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) में कार्या​धिकारी, कंपनी मामले, राहुल भारती ने कहा कि भारत में वाहन उद्योग एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे बदलाव एक लंबे समय में एकाध बार ही होते हैं। भारत सरकार ने 2021 में कहा था कि वह 2070 तक कार्बन उत्सर्जन करना बंद करने के लक्ष्य के साथ आगे चल रही है।

भारती ने कहा, ‘इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक एक बड़ी तकनीक है। हमारी कंपनी सहित कई दूसरी कंपनियां भी इलेक्ट्रिक वाहन तैयार कर रही हैं और बैटरी जैसे बड़े उपकरण का स्थानीय स्तर पर निर्माण कर रही हैं। वास्तव में हमारे एक बैटरी विनिर्माण संयंत्र में तो स्थानीय लीथियम-आयन सेल का निर्माण भी शुरू कर दिया है। ईवी एक बड़ी एवं महत्त्वपूर्ण तकनीक है जो हमें 2070 के लिए तय लक्ष्य हासिल करने में मदद कर सकती है।’

ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी इस समय लगभग 4,500 इलेक्ट्रिक कारों का परिचालन कर रही है। कंपनी के सह-संस्थापक अनमोल सिंह जग्गी ने कहा कि उन्होंने इसलिए इलेक्ट्रिक कारें उतारने का निर्णय लिया कि पेट्रोल या डीजल से चलने वाली कारों की तुलना में इन पर प्रति कार लागत कम बैठती है।

जग्गी ने कहा, ‘हमारा वाकई मानना है कि इलेक्ट्रिक कार खर्च के लिहाज से भी बजट में फिट बैठती है। खासकर, तब जब पीएफसी, इरेडा आदि बड़े संस्थान इनके लिए कम ब्याज एवं आसान किस्तों पर वित्त मुहैया कर रही हैं तो फिर किसी और चीज की जरूरत नहीं रह जाती।’

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First Published - July 20, 2023 | 11:21 PM IST

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