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‘महंगाई ऊंची बनी रहने का खटका’

वित्त मंत्रालय ने जुलाई की रिपोर्ट में सरकार व रिजर्व बैंक को चौकन्ना रहने की दी सलाह

Last Updated- August 22, 2023 | 10:02 PM IST
SBI research report

Monthly Economic Review: वित्त मंत्रालय ने आज आगाह किया कि वै​श्विक तथा क्षेत्रीय अनि​श्चितताओं और देश के भीतर आपूर्ति में अड़चनों की वजह से आने वाले महीनों में महंगाई ऊंची बनी रह सकती है। मुद्रास्फीति के इस स्तर को देखते हुए उसने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को ज्यादा सतर्कता बरतने की सलाह दी।

वित्त मंत्रालय ने जुलाई की अपनी रिपोर्ट में आज कहा कि काला सागर अनाज समझौता खत्म करने के रूस के फैसले और गेहूं उपजाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में बारिश नहीं होने के कारण अनाज के दाम बढ़ गए हैं। देश में फसलों पर

सफेद मक्खी के प्रकोप और मॉनसूनी बारिश के असमान वितरण से सब्जियां महंगी हो गई हैं। मगर रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ खाद्य पदार्थों के दाम में तेजी थोड़े समय के लिए ही है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘टमाटर के दाम अगस्त अंत या सितंबर की शुरुआत में नई फसल आने के साथ घटने लगेंगे। अरहर दाल का आयात बढ़ने से दालों की महंगाई भी कम हो सकती है। सरकार द्वारा हाल में उठाए गए कदमों का भी जल्द असर दिख सकता है और आने वाले महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति में कमी आ सकती है।’

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स​ब्जियों, दालों, अनाज तथा मसालों के दाम बढ़ने से जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति 7.44 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले 15 महीनों में सबसे अधिक महंगाई है। इस देखते हुए रिजर्व बैंक ने भी मौद्रिक नीति की हालिया समीक्षा में सितंबर तिमाही के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 6.2 फीसदी और वित्त वर्ष 2024 के लिए 5.4 फीसदी कर दिया। मगर उसने रीपो दर नहीं छेड़ी।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि सब्जियों के दाम बढ़ने के कारण निकट भविष्य में मुद्रास्फीति बढ़ी रह सकती है। मगर उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति कुछ समय के लिए इन झटकों के बढ़ने वाली महंगाई को झेल सकती है।

वित्त मंत्रालय ने मासिक समीक्षा में कहा, ‘ब्याज दरों में ज्यादा वृद्धि रोकने, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भारत को आकर्षक बनाए रखने और सतत आ​र्थिक विकास के लिए वृहद आ​​र्थिक ​स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है।’

मंत्रालय ने कहा कि पूंजीगत व्यय बढ़ाने पर सरकार के लगातार जोर के कारण निजी निवेश में भी तेजी आई है जिसका पता उच्च आवृत्ति वाले विभिन्न संकेतकों के प्रदर्शन और उद्योग की रिपोर्टों से चलता है। केंद्र सकार ने वित्त वर्ष 2024 के बजट में पूंजीगत खर्च के लिए आवंटन 33.3 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव किया था। कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का हिस्सा वित्त वर्ष 2018 में 12.3 फीसदी था, जो वित्त वर्ष 2024 के बजट में 22.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है।

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वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा कि दुनिया भर में घटती मांग के मद्देनजर वस्तुओं का निर्यात मजबूत रखने के लिए विदेश पर नजर रखने की जरूरत है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक चिंता के कारण वैश्विक व्यापार वृद्धि पर संकट के बादल छाए हुए हैं, जो 2022 के 5.2 फीसदी से घटकर 2023 में 2 फीसदी रह जाने का अनुमान है। मगर सेवा निर्यात में तेजी बनी हुई है और आगे भी इस क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर बना रह सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार घरेलू खपत और निवेश मांग से वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी और खरीफ की अच्छी फसल की संभावना से ग्रामीण मांग में आगे और मजबूती आएगी।

First Published - August 22, 2023 | 1:08 PM IST

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