केंद्रीय मंत्रियों शिवराज सिंह चौहान और अश्विनी वैष्णव की अगुआई में देश के 10 राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधि इस महीने के अंत में स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। चौहान और वैष्णव के अलावा दो अन्य केंद्रीय मंत्री और पांच मुख्यमंत्री एवं दो उप-मुख्यमंत्री दावोस जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहेंगे। निजी क्षेत्र की कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के दर्जनों शीर्ष व्यापारिक प्रतिनिधि भी इस प्रतिनिधिमंडल के साथ जाएंगे।
आगामी 19 से 23 जनवरी तक होने वाली डब्ल्यूईएफ की सालाना बैठक में विशाल भारतीय प्रतिनिधिमंडल ऐसे समय में जा रहा है जब देश ने निर्यात में विविधता लाने और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों की खोज के प्रयास तेज कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री चौहान, सूचना एवं प्रौद्योगिकी और रेलवे मंत्री वैष्णव के अलावा डब्ल्यूईएफ सम्मेलन में भाग लेने वाले अन्य केंद्रीय मंत्रियों में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी और नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू शामिल हैं।
डब्ल्यूईएफ की वार्षिक बैठक में भाग लेने वाले मुख्यमंत्रियों में महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, असम के हिमंत विश्व शर्मा, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, तेलंगाना के ए रेवंत रेड्डी और आंध्र प्रदेश के एन चंद्रबाबू नायडू शामिल हैं। कर्नाटक और गुजरात के उप-मुख्यमंत्री क्रमशः डी के शिवकुमार और हर्ष संघवी भी वार्षिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले हैं। प्रतिनिधिमंडल में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास, निर्यात और निवेश संवर्धन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ भी शामिल हो सकते हैं। झारखंड और केरल के प्रतिनिधिमंडल भी स्विट्जरलैंड जाएंगे।
इन राज्यों में आंध्र प्रदेश (2025 में डब्ल्यूईएफ सम्मेलन में भाग लिया था) का एक अलग मंडप होगा। राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश दक्षिणी राज्य के निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे और अपने उत्पादों (खासकर झींगा मछली) के लिए निर्यात बाजारों की तलाश करेंगे। अमेरिकी शुल्कों के कारण भारत से निर्यात प्रभावित हुआ है।
इस महीने की शुरुआत में असम के मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस पूर्वोत्तर राज्य को पिछले पांच वर्षों के दौरान 45 प्रतिशत की वृद्धि के साथ भारत में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि असम का सकल राज्य घरेलू उत्पाद वर्ष 2020-21 में 4,10,724 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 7,41,626 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
शर्मा ने कहा कि केंद्र ने महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे औद्योगिक रूप से उन्नत राज्यों के साथ दावोस में डब्ल्यूईएफ की सालाना बैठक में प्रतिनिधिमंडल में शामिल कर असम की आर्थिक वृद्धि को सम्मान दिया है। शर्मा ने 1 जनवरी को गुवाहाटी में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा,‘इससे हमें प्रमुख उद्योगपतियों के साथ असम के बारे में बात करने का अवसर मिलेगा।’
इस वर्ष के डब्ल्यूईएफ सम्मेलन में 60 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख भाग लेंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी इस सम्मेलन में भाग लेंगे।
दावोस में वार्षिक समागम में भाग लेने वाले संभावित भारतीय व्यापारिक नेताओं में टाटा समूह के एन चंद्रशेखरन, रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी, बजाज समूह के संजीव बजाज, गोदरेज इंडस्ट्रीज के नादिर गोदरेज, जेएसडब्ल्यू समूह के सज्जन और पार्थ जिंदल, भारत फोर्ज, वेदांत और अपोलो के शीर्ष नेता, जीरोधा के निखिल कामत, भारती समूह के सुनील भारती मित्तल, इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी, विप्रो के ऋषद प्रेमजी, एस्सार के सीईओ प्रशांत रुइया और रीन्यू के सीईओ सुमंत सिन्हा शामिल हैं।
इंडियन ऑयल के अध्यक्ष अरविंदर सिंह सहने, गेल के संदीप कुमार गुप्ता, भारतीय स्टेट बैंक के चल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी, एनटीपीसी के गुरदीप सिंह और आरईसी लिमिटेड के जितेंद्र श्रीवास्तव सहित कई पीएसयू प्रमुख भी भाग लेंगे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन इरानी कुछ साल पहले दावोस में ही स्थापित एलायंस फॉर ग्लोबल गुड: जेंडर इक्विटी ऐंड इक्वलिटी की संस्थापक एवं चेयरपर्सन के रूप में भाग लेने वाली हैं।
इस वर्ष डब्ल्यूईएफ की सालाना बैठक का विषय ‘संवाद की भावना’ है। डब्ल्यूईएफ ने कहा है कि यह बैठक एक निष्पक्ष मंच का लाभ उठाने का प्रयास करेगी। दुनिया में साझा चुनौतियों का सामना करने और भविष्य को परिभाषित करने वाले नवाचारों को चलाने के लिए डब्ल्यूईएफ वैश्विक नेताओं एवं कारोबारी दिग्गजों को एक साथ लाने में अहम भूमिका निभाता है।
शिखर सम्मेलन पांच वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करेगा जिसमें सार्वजनिक-निजी सहयोग काफी मदद कर सकता है। इनमें दुनिया में जारी उठापटक के बीच आपसी सहयोग बढ़ाना, आर्थिक वृद्धि के नए स्रोत तैयार करना, लोगों में बेहतर निवेश, बड़े पैमाने पर जिम्मेदारी के साथ नवाचार का इस्तेमाल करना और संपन्नता को बढ़ावा देना है।