facebookmetapixel
Advertisement
पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी-मैक्रों की बातचीत, शांति बहाली के लिए समन्वय पर जोरनिवेश में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी, 56% अब खुद ले रही फैसले; लेकिन फाइनैंशियल प्लानिंग में बड़ा गैपKotak इक्विटीज की चेतावनी: ईरान संघर्ष लंबा चला तो भारतीय कंपनियों की कमाई पर पड़ेगा असरThe Wealth Company MF ने उतारा नया स्मॉल कैप फंड, ₹2,000 की SIP से निवेश शुरूईरान युद्ध से इजराइल की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव, 6​ दिन में 3 अरब डॉलर नुकसान का अनुमान: रिपोर्ट360 ONE MF ने बाजार में उतारा नया SIF, ग्रोथ और इनकम पर फोकस; किसे लगाना चाहिए पैसाबाजार में गिरावट पर खरीदारी या करें इंतजार? किन सेक्टर्स से रखें दूरी; मार्केट एक्सपर्ट ने बताई स्ट्रेटेजीफरवरी में ऑटो बिक्री में जोरदार उछाल, टू-व्हीलर्स से ट्रैक्टर तक सभी सेगमेंट में तेज बढ़तक्या है फोर्स मेज्योर, और जंग के वक्त एनर्जी कंपनियों के लिए यह क्यों जरूरी हो गयापश्चिम एशिया तनाव से तेल 80 डॉलर पार, ONGC-Oil India पर ब्रोकरेज बुलिश

बजट से पहले सरकार की बड़ी तैयारी, सैकड़ों योजनाओं के विलय और बंदी की कवायद तेज

Advertisement

बजट से पहले योजनाओं के युक्तिसंगतीकरण का निर्देश दिया गया और दोहराव घटाने, निगरानी सुधारने व मार्च तक मूल्यांकन पूर्ण करने के लिए मंत्रालयों से सिफारिशें मांगी गई हैं

Last Updated- January 05, 2026 | 9:42 PM IST
finance ministry
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

केंद्रीय बजट से पहले वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी विभागों और मंत्रालयों को दक्षता बढ़ाने के लिए केंद्र द्वारा प्रायोजित और केंद्र सरकार की योजनाओं को युक्तिसंगत बनाने और योजनाओं का दोहराव कम करने के लिए मौजूदा योजनाओं में विलय करने के निर्देश दिए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि यह कवायद मार्च तक पूरी की जानी है।

अधिकारी ने कहा, ‘वित्त मंत्रालय के तहत आने वाला व्यय विभाग चाहता है कि केंद्र सरकार की और केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं को युक्तिसंगत बनाया जाए। एक ही तरह की योजनाओं या इच्छित परिणाम न दे रही योजनाओं को जरूरत के मुताबिक विलय या बंद किया जाना चाहिए। इस समय योजनाओं की संख्या बहुत ज्यादा है। युक्तिसंगत बनाने से योजनाओं की बेहतर निगरानी में मदद मिलेगी।’

सरकारी विभाग और मंत्रालय इस सिलसिले में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेंगे और इस पर अंतिम निर्णय व्यय विभाग द्वारा लिया जाएगा।

अधिकारी ने कहा, ‘कई योजनाओं का अगले वित्त वर्ष के लिए मूल्यांकन किया जाना है। यह कवायद उससे पहले पूरी की जानी है।’ केंद्रीय बजट 2026-27 एक फरवरी को पेश किए जाने की उम्मीद है।

केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाएं (सीएसएस) राज्य सरकारों द्वारा लागू की जाती हैं। बहरहाल इस पर आने वाले खर्च का वहन एक निश्चित अनुपात में राज्य व केंद्र दोनों सरकारें करती हैं। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन इस तरह की योजनाओं में शामिल हैं।

वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए केंद्र सरकार ही धन मुहैया कराती है और वही उसका कार्यान्वयन भी करती है। ऐसी योजनाओं में खाद्य सब्सिडी, उर्वरक सब्सिडी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र के आवंटन और विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी विभागों द्वारा चलाई जा रही योजनाएं जैसे फसल बीमा योजना, ड्यूटी ड्रॉबैक योजना, जन औषधि योजना, प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना, निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (आरओडीटीईपी) शामिल हैं।

व्यय विभाग के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित 54 योजनाएं हैं, वहीं केंद्र सरकार की 260 योजनाएं हैं,  जिनकी अनुमोदन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तक है और इनका मूल्यांकन किया जाना है।

योजनाओं को युक्तिसंगत बनाए जाने और उनके समेकन की कवायद 5 साल पहले वित्त सचिव टीवी सोमनाथन द्वारा शुरू की गई थी, जो इस समय कैबिनेट सचिव हैं।  इस साल की शुरुआत में वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को केंद्र सरकार की और केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के लिए अतिरिक्त विवरण प्रस्तुत करने के लिए कहा था, जिनकी अवधि समाप्त हो रही है या 31 मार्च, 2026 के बाद भी उन्हें जारी रखा जाना है।

सरकारी विभागों से मांगे गए ब्योरे में तीसरे पक्ष का मूल्यांकन, प्रस्तावित योजना में अगले 5 साल तक हर साल के मुताबिक आवंटन और इसमें किए गए बदलाव का ब्योरा शामिल है।

Advertisement
First Published - January 5, 2026 | 9:42 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement