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भारत-अमेरिका ट्रेड डील 99% पूरी! सर्जियो गोर का बड़ा दावा, अब बस आखिरी 1% पर टिकी डील

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भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता 99% पूरा हो चुका है और दोनों देश अंतिम तकनीकी व कानूनी मुद्दों पर सहमति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

Last Updated- June 04, 2026 | 7:59 AM IST
India-US Trade Deal
Representative image

काफी समय से अटके भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर इस सप्ताह बातचीत जारी रहेगी। दोनों पक्षों के व्यापार वार्ताकार नई दिल्ली में समझौते को मुकाम तक पहुंचाने की मुहिम में लगे हैं। इसी सिलसिले में गुरुवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ उनकी बैठक होनी है। भारत में अमेरिका के राजदूत एवं दक्षिण और मध्य एशिया के लिए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर ने बुधवार को कहा कि समझौता 99 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है और दोनों पक्ष अब कुछ बचे पहलुओं पर सहमति बनाने में जुटे हैं।

गोर ने मुंबई में सिटी वार्षिक भारत सम्मेलन को अपने संबोधित में कहा,‘आज सुबह मुंबई रवाना होने से पहले मैंने उस व्यापार दल से मुलाकात की जो इस समय नई दिल्ली में हमसे मिलने आया है। पिछले सप्ताह यह दल वॉशिंगटन में था। इस सप्ताह हमने अपना दल नई दिल्ली भेजा है। कल इसके सदस्य मंत्री पीयूष गोयल से मिलेंगे। हम अंतिम चरण में हैं। इस समझौते का 99 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। बाकी बचे कुछ मुद्दों पर भी जल्द सहमति बन जाएगी।’

गोर ने इन आलोचनाओं को अधिक तवज्जो नहीं दी कि इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते में बहुत अधिक समय लग गया है। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच व्यापार समझौते में 19 साल लगे थे। गोर ने कहा,‘इन वार्ताओं में दोनों पक्षों को एक दूसरे को कुछ न कुछ देना होगा क्योंकि यही पारस्परिक लाभ की स्थिति को परिभाषित करता है। मैं भारत की प्रशंसा करना चाहूंगा। आपके पास अद्भुत वार्ताकार हैं। इस समझौते के कठिन होने का एक कारण यह है कि कई वर्षों तक भारत ने ऐसे मुद्दों पर अपना रुख नहीं बदला जिन पर अमेरिका को दिक्कत थी। यही कारण है कि यूरोपीय संघ को उस व्यापार समझौते को पूरा करने में 19 साल लग गए।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि शेष 1 प्रतिशत हिस्से को भी जल्द अंतिम रूप दे दिया जाएगा। अमेरिकी राजदूत ने कहा,‘हमें उस अंतिम 1 प्रतिशत को लेकर बहुत उम्मीद है और स्पष्ट तौर पर कहें तो इसमें कुछ तकनीकी बातें हैं। इसका एक हिस्सा इस बात से ताल्लुक रखता है कि कोई नियम कब लागू होता है और इसमें बहुत कुछ कानूनी भाषा से जुड़ा है। मगर हमें उम्मीद है कि हम एक ठोस निष्कर्ष तक पहुंच जाएंगे।’।

गोर ने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका-भारत संबंध ‘निस्संदेह इस सदी की सबसे महत्त्वपूर्ण वैश्विक साझेदारी है।’ उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में द्विपक्षीय व्यापार और सेवाओं का आदान-प्रदान 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर हो गया है जो 11 गुना इजाफा है। उन्होंने कहा कि अब इसमें नवाचार और उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों की भूमिका काफी बढ़ गई है। उन्होंने कहा, ‘मेरा लक्ष्य अमेरिका-भारत संबंधों को 21वीं सदी की निर्णायक रणनीतिक साझेदारी बनाना और हमारे दोनों देशों के लोगों के लिए ठोस परिणाम देना है।’ गोर ने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ‘घनिष्ठ संबंधों’ पर भी जिक्र किया और कहा कि ट्रंप ने ने पिछले सप्ताह नई दिल्ली में दूतावास के ‘फ्रीडम 250’ कार्यक्रम में फोन किया था। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच हाल ही में हुई फोन कॉल के बारे में भी जानकारी दी। गोर ने कहा,‘राष्ट्रपति ने फोन कॉल का अंत यह उम्मीद जताते हुए किया कि भारत के लोग यह समझेंगे कि वह कितने भाग्यशाली हैं कि उन्हें आप (मोदी) मिले हैं और आप भारत में जो स्थिरता और अनुभव लेकर आए हैं वह कितना अहम है।’

उन्होंने कहा कि मोदी ने ट्रंप के साथ उन चार वर्षों (वर्ष 2020 में ट्रंप की हार मे बाद) में भी संवाद जारी रखा जब वह राष्ट्रपति नहीं थे। गोर ने कहा,‘दुनिया भर में हर कोई आपके प्रधानमंत्री के समान मार्ग पर नहीं चल रहा था। आपके प्रधानमंत्री ने न केवल राष्ट्रपति की कभी आलोचना नहीं की बल्कि राष्ट्रपति के कार्यकाल के उन चार वर्षों के दौरान भी उनसे संपर्क बनाए रखा। यह बात राष्ट्रपति को याद है।’ गोर ने भारत के प्रति कई प्रमुख अमेरिकी कंपनियों की निवेश योजनाओं का भी जिक्र किया जिनमें वर्ष 2030 तक अमेजॉन द्वारा देश में 35 अरब डॉलर के निवेश, माइक्रोसॉफ्ट द्वारा घोषित 17.5 अरब डॉलर का निवेश (जिसमें हाइपर स्केल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है) और गूगल द्वारा हाल ही में घोषित 15 अरब डॉलर का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हब शामिल हैं। प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला के सवाल पर गोर ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और विदेश मंत्री एस जयशंकर की मौजूदगी में पिछले सप्ताह अमेरिका-भारत महत्त्वपूर्ण खनिज ढांचा समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए थे। उन्होंने कहा,‘यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि प्रौद्योगिकी और ऊर्जा को संरक्षित करने के लिए आवश्यक मूलभूत तत्व विश्वसनीय ढांचे के भीतर उपलब्ध हों।’

इसके अलावा गोर ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां अक्सर पूछती हैं कि क्या भारत उनकी मालिकाना तकनीक और अनुसंधान के लिए एक सुरक्षित स्थान है। गोर ने कहा, ‘मैंने अपने देश की कंपनियों को आश्वस्त किया कि भारत एक ऐसा देश है जिस पर वे भरोसा कर सकते हैं।’

उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका वर्तमान में अपनी लगभग 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से आयात करता है। उन्होंने कहा,‘ऐसा इसलिए है क्योंकि हम इस देश पर भरोसा करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम इस देश के साथ काम करना चाहते हैं। यह हमारे देश के लिए जीवन रक्षक का एक महत्तवपूर्ण हिस्सा है।’

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First Published - June 4, 2026 | 7:59 AM IST

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