Venezuela Oil Business: अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका, वेनेजुएला के तेल उद्योग को फिर से शुरू करने के लिए वहां निवेश करने वाली अमेरिकी तेल कंपनियों को सब्सिडी या आर्थिक मदद दे सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाया गया है।
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी तेल कंपनियों के साथ यह योजना 18 महीने से भी कम समय में शुरू हो सकती है। हालांकि, ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि वेनेजुएला के तेल उद्योग को पूरी तरह ठीक करने में कई साल लग सकते हैं।
ट्रंप ने माना कि इस काम में बहुत ज्यादा पैसा लगेगा। उन्होंने कहा कि तेल कंपनियां पहले पैसा लगाएंगी और बाद में उन्हें अमेरिका या तेल से होने वाली कमाई के जरिए भुगतान किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में 100 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो सकता है।
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि वेनेजुएला के बड़े तेल भंडार देश की अर्थव्यवस्था सुधारने और अमेरिका के रणनीतिक हितों के लिए बेहद जरूरी हैं। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला से तेल उत्पादन बढ़ने से तेल की कीमतें नीचे आ सकती हैं, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
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अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट इस हफ्ते तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत कर सकते हैं। वे मियामी में होने वाले एक ऊर्जा सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां शेवरॉन, कॉनकोफिलिप्स जैसी बड़ी कंपनियों के अधिकारी मौजूद रहेंगे। फिलहाल शेवरॉन ही वेनेजुएला में काम कर रही एकमात्र बड़ी अमेरिकी कंपनी है।
भ्रष्टाचार, निवेश की कमी, आग लगने और चोरी की वजह से वेनेजुएला का तेल ढांचा काफी खराब हालत में है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे ठीक करने में 10 साल तक लग सकते हैं।
ट्रंप के इस बयान से पहले अमेरिका ने वेनेजुएला में एक सैन्य कार्रवाई की थी, जिसमें निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया गया। अमेरिका का कहना है कि मादुरो पर ड्रग तस्करी और हथियारों से जुड़े आरोप हैं, जबकि विरोधियों का दावा है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।
अमेरिकी संसद के स्पीकर माइक जॉनसन ने कहा कि अमेरिका का मकसद वेनेजुएला में शासन बदलना नहीं है और वहां की अंतरिम सरकार पहले ही काम शुरू कर चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका वहां सेना भेजने की योजना नहीं बना रहा है।
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ट्रंप ने साफ किया कि वेनेजुएला में तुरंत चुनाव नहीं कराए जाएंगे। उन्होंने कहा, “पहले देश को ठीक करना जरूरी है। अभी हालात ऐसे नहीं हैं कि लोग वोट डाल सकें।” (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)