Venezuela Oil Crisis: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को 3 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किए जाने के बाद देश के तेल सेक्टर को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला के तेल ढांचे को दोबारा खड़ा करने में निवेश करेंगी, ताकि वहां से तेल उत्पादन बढ़ाया जा सके और अमेरिका समेत दूसरे बाजारों में सप्लाई हो सके।
चॉइस ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, ये करीब 303 अरब बैरल है। इसके बावजूद देश का तेल उत्पादन नवंबर 2025 में सिर्फ करीब 9 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जबकि 2010 के शुरुआती सालों में यह करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन हुआ करता था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वेनेजुएला में तेल उत्पादन तेजी से बढ़ाना आसान नहीं होगा। सरकारी तेल कंपनी PDVSA में सालों से निवेश की कमी रही है। ऐसे में 2026 में सबसे अच्छे हालात में भी उत्पादन सिर्फ करीब 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन ही बढ़ सकता है। इससे ज्यादा बढ़ोतरी के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी, जिसका असर 2027 से पहले दिखना मुश्किल है।
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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला के तेल ढांचे की हालत बेहद खराब है। बंदरगाहों पर जहाजों को तेल भरने में अब पांच दिन तक लग जाते हैं, जबकि पहले यह काम एक दिन में हो जाता था। तेल पाइपलाइन जगह-जगह से लीक हो रही हैं, कई रिफाइनरी यूनिट बंद पड़ी हैं और तेल क्षेत्र में चोरी और आगजनी की घटनाएं आम हैं।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में तेल निकालने में दिलचस्पी दिखा सकती हैं। खासतौर पर वहां का भारी कच्चा तेल अमेरिका की रिफाइनरियों के लिए काम का है। लेकिन जानकारों का कहना है कि जब तक वेनेजुएला में हालात पूरी तरह शांत और स्थिर नहीं होते, तब तक कंपनियां वहां बड़ा पैसा लगाने से बचेंगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वेनेजुएला में पहले जितना तेल निकलता था, उतना उत्पादन दोबारा शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा पैसा चाहिए। अगले 10 साल तक हर साल करीब 10 अरब डॉलर खर्च करने होंगे। यानी कुल मिलाकर 100 अरब डॉलर से भी ज्यादा निवेश करना पड़ेगा।
चॉइस ब्रोकिंग की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर वेनेजुएला में हालात सुधरते हैं, तो इसका फायदा भारत को भी मिल सकता है। भारत की कुछ सरकारी तेल कंपनियां पहले से वेनेजुएला में तेल निकालने का काम कर रही हैं। ये कंपनियां वहां की सरकारी तेल कंपनी PDVSA के साथ मिलकर काम करती हैं। अगर वहां पैसा और मशीनें आसानी से मिलने लगें, तो तेल का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
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इसके अलावा, भारत पहले वेनेजुएला से रोज करीब 4 लाख बैरल भारी कच्चा तेल मंगाता था। यह तेल दूसरे कच्चे तेल के मुकाबले सस्ता होता है। इससे भारत की तेल रिफाइनरियों को ज्यादा मुनाफा कमाने में मदद मिल सकती है।
चॉइस ब्रोकिंग का कहना है कि 2026 में वेनेजुएला से बाजार में ज्यादा नया तेल आने की उम्मीद नहीं है। इसलिए तेल की कीमतों पर अभी ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। अनुमान है कि 2026 में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत करीब 61.5 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। लेकिन अगर 2027 से वेनेजुएला में तेल का उत्पादन बढ़ता है, तो तेल के दामों पर दबाव आ सकता है।
कुल मिलाकर, वेनेजुएला के तेल सेक्टर को फिर से मजबूत करना आसान काम नहीं है। इसके लिए शांति और स्थिरता, बहुत ज्यादा पैसा और खराब पड़े तेल ढांचे को ठीक करना जरूरी होगा। जब तक ये सब नहीं होता, तब तक वहां से तेल उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी की उम्मीद कम ही है।