अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत पर और शुल्क बढ़ाने की चेतावनी दी। उन्होंने आज कहा कि अगर रूस से तेल खरीदना भारत बंद नहीं करता है तो अमेरिका भारतीय आयात पर शुल्क और बढ़ा सकता है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार करार का रास्ता और मुश्किल हो सकता है।
भारत द्वारा रूस से तेल खरीद घटाने पर ट्रंप ने फ्लोरिडा से वाशिंगटन डीसी जाते समय एयर फोर्स वन में संवाददाताओं से कहा, ‘वे (भारत) वास्तव में मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे आदमी हैं, वह नेक दिल इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं और मुझे खुश करना महत्त्वपूर्ण था। वे व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्द शुल्क बढ़ा सकते हैं। यह उनके लिए बहुत बुरा होगा।’
पिछले साल अगस्त से अमेरिका कई भारतीय वस्तुओं के आयात पर 50 फीसदी शुल्क लगा रहा है। इसमें से 25 फीसदी शुल्क भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से जुड़ा है। पिछले साल से भारत और अमेरिका व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बात कर रहे हैं जिसे पूरा होने में समय लगेगा और दूसरा ढांचागत व्यापार करार है जिसके जरिये भारतीय निर्यातकों पर 50 फीसदी शुल्क बोझ की समस्या को दूर किया जाना है।
भारत के सरकारी अधिकारियों ने कहा कि अगर अमेरिका 25 फीसदी दंडात्मक शुल्क नहीं हटाता है तो भारत के लिए व्यापार सौदा करना मुश्किल होगा। दोनों देशों के बीच पिछले 9 महीनों से बातचीत चल रही है और आधा दर्जन से अधिक औपचारिक और अनौपचारिक वार्ता के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला है।
ट्रंप की ये टिप्पणी तब आई जब एयर फोर्स वन में उनके साथ यात्रा कर रहे अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप द्वारा भारत पर लगाया गया शुल्क ही वह ‘बड़ी वजह’ है जिसकी वजह से भारत अब रूस से काफी कम तेल खरीद रहा है। ग्राहम ने अपने शुल्क विधेयक के बारे में बात की जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों से आयात पर भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग को समाप्त करने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के ग्राहकों पर दबाव डालना आवश्यक है।
ग्राहम ने कहा, ‘करीब एक महीने पहले मैं भारतीय राजदूत के घर गया था और वह बस इसी बारे में बात कर रहे थे कि वे रूस से कम तेल खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्या आप राष्ट्रपति से शुल्क हटाने का अनुरोध करेंगे?’
वाणिज्य मंत्रालय के पूर्व अधिकारी और दिल्ली स्थित थिंक-टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि अक्टूबर में रोसनेफ्ट और लुकऑयल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज सहित प्रमुख रिफाइनिंग कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की कई फर्मों ने द्वितीयक प्रतिबंधों से बचने के लिए रूसी तेल की खरीद को रोकने की बात कही थी। हालांकि आयात पूरी तरह से नहीं रुका है और कम मात्रा जारी है जिससे भारत रणनीतिक रूप से ग्रे जोन में है।