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किसान पहचान पत्र से ही मिलेगा यूरिया, सरकार चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी नई व्यवस्था

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वित्त वर्ष 2025-26 में उर्वरक सब्सिडी 1.91 लाख करोड़ रुपये पार करने की आशंका है, जबकि बजट में 1.68 लाख करोड़ रुपये सब्सिडी का अनुमान लगाया गया था।

Last Updated- January 23, 2026 | 8:27 AM IST
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देश के ज्यादातर किसानों का विशिष्ट किसान पहचान दस्तावेज (आईडी) बनने के बाद केंद्र सरकार चरणबद्ध तरीके से यूरिया की बिक्री एग्री स्टैक प्लेटफॉर्म के माध्यम से करने की योजना पर काम कर रही है।

परियोजना को अभी प्रायोगिक आधार पर लागू करने पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि लगातार बढ़ती उर्वरक सब्सिडी को युक्तिसंगत बनाने की दिशा में यह एक और कवायद हो सकती है। वित्त वर्ष 2025-26 में उर्वरक सब्सिडी 1.91 लाख करोड़ रुपये पार करने की आशंका है, जबकि बजट में 1.68 लाख करोड़ रुपये सब्सिडी का अनुमान लगाया गया था। सब्सिडी बजट अनुमान से बढ़ने की प्रमुख वजह वित्त वर्ष 2026 में यूरिया की रिकॉर्ड खपत है, जो पहले ही अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान 3.115 करोड़ टन पहुंच गई है। यह पिछले साल 2024 की तुलना में करीब 4 प्रतिशत ज्यादा है।

अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने पिछले महीने राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों की बैठक के दौरान यूरिया की बिक्री को चरणबद्ध तरीके से एग्री स्टैक से जोड़ने का विचार रखा था, जिसे चुनिंदा जिलों में प्रायोगिक तौर पर शुरू करने का प्रस्ताव है।

एग्री स्टैक केंद्र सरकार द्वारा स्थापित डिजिटल फाउंडेशन है। इसका मकसद विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाना है, ताकि भारत में कृषि क्षेत्र में सुधार हो सके और आंकड़ों व डिजिटल सेवाओं का उपयोग करके बेहतर परिणाम लाया जा सके। पहले चरण में उन 7 जिलों में इस परियोजना को प्रायोगिक आधार पर लागू किया जाएगा, जहां अधिक संख्या में किसानों के परिचय पत्र बन चुके हैं। इस चरण के दौरान, किसान आईडी का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा कि उर्वरकों को केवल भूस्वामी, कृषक या उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति को बेचा जाए।

अधिकारियों ने कहा कि प्रायोगिक परियोजना के पहले चरण में उन किसानों के लिए परामर्श की भी व्यवस्था होगी, जो अनुशंसित सीमा से ज्यादा यूरिया का इस्तेमाल करते हैं। इसका मकसद बिक्री को तत्काल सीमित करने के बजाय यूरिया के ज्यादा इस्तेमाल को हतोत्साहित करना है। सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय दूसरे चरण में एग्री स्टैक के माध्यम से यूरिया की बिक्री के एकीकरण को अन्य राज्यों में लागू करने की योजना बना रहा है।

इस चरण में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा अनुशंसित खुराक के आधार पर उर्वरक की बिक्री पर एक सीमा भी तय की जा सकती है, जिसमें बोई गई फसलों, भूमि धारण आकार और सिंचाई उपलब्धता जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाएगा।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 4 दिसंबर, 2025 तक देश में लगभग 7.67 करोड़ किसान आईडी या किसानों की डिजिटल पहचान बन चुकी है। इस आईडी में डिजिटल कृषि मिशन के तहत उनकी जनसांख्यिकीय प्रोफाइल, भूमि धारण और फसल पैटर्न को शामिल किया गया है। इस मिशन के तहत कृषि क्षेत्र के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) बनाने का लक्ष्य है, जिसमें कृषि स्टैक, कृषि डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (केडीएसएस) और समग्र मृदा उत्पादकता और प्रोफाइल मैप शामिल है, जिससे देश में तेज डिजिटल कृषि वातावरण तैयार किया जा सके। कुल मिलकार वित्त वर्ष 2027 तक 11 करोड़ किसान आईडी, जबकि वित्त वर्ष2026 तक 9 करोड़ किसान आईडी बनाने का लक्ष्य है। केंद्र सरकार ने डिजिटल मिशन के लिए सितंबर 2024 में 2,817 करोड़ रुपये मुहैया कराया था।

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First Published - January 23, 2026 | 8:27 AM IST

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