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यूएस बैनकॉर्प का भारत में बड़ा कदम: हैदराबाद–चेन्नई में दो नए GCC की तैयारी

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TCS–Wipro–Cognizant को मिल सकता है 25 करोड़ डॉलर का U.S. Bancorp कॉन्ट्रैक्ट

Last Updated- December 05, 2025 | 11:17 AM IST
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आईटी सेवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां – टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), विप्रो, कॉग्निजेंट और एएनएसआर – यूएस बैनकॉर्प से ऑर्डर के लिए प्रमुख बोलीदाताओं के रूप में उभरी हैं, जो भारत में दो वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) स्थापित करने की तैयारी कर रही है। इस घटनाक्रम से वाकिफ सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

अमेरिका का पांचवां सबसे बड़ा बैंक अपने प्रौद्योगिकी कार्यों का खासा बड़ा हिस्सा आंतरिक स्तर पर संपन्न करने की योजना बना रहा है तथा हैदराबाद और चेन्नई में केंद्रों के निर्माण के लिए भागीदारी का मूल्यांकन कर रहा है। जहां हैदराबाद में अपने स्वामित्व वाला केंद्र होने की संभावना है, वहीं चेन्नई कार्यालय का परिचालन निर्माण, परिचालन और स्थानांतरण (बीओटी) के आधार पर किया जाएगा। यूएस बैनकॉर्प देश में आधार बनाने के लिए अपने बड़े प्रतिस्पर्धियों के साथ जुड़ रहा है, जहां दुनिया की कुछ सबसे बड़ी वित्तीय सेवा कंपनियों के प्रौद्योगिकी केंद्र हैं।

3,000–5,000 नई नौकरियां!

सूत्र ने कहा कि यूएस बैनकॉर्प अगले पांच वर्षों में अपने प्रौद्योगिकी कार्यों का प्रबंधन करने के लिए भारत में 3,000 से 5,000 लोगों को नियुक्त करने की योजना बना रहा है। इस अनुबंध का मूल्य लगभग 25 करोड़ डॉलर आंका गया है। बैंक ने बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा किए गए टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। टीसीएस, विप्रो, कॉग्निजेंट और एएनएसआर को भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं मिला।

कोई समयसीमा निर्धारित नहीं है और इस अनुबंध को आकार लेने में अब भी छह से आठ महीने का सयम लग सकता है, क्योंकि बैंक व्यापक आर्थिक हालात संबंधी मुश्किलों और टैरिफ के प्रभाव से जूझ रहे हैं। हालांकि अमेरिका के अधिकांश बड़े बैंकों की उपस्थिति बेंगलूरु और हैदराबाद में है, लेकिन यूएस बैनकॉर्प भारत के भीड़भाड़ वाले जीसीसी पारिस्थितिकी तंत्र में अपेक्षाकृत देर से प्रवेश करने वाला है। इससे पहले खबरें आई थीं कि साल 2019 में बीबीऐंडटी और सनट्रस्ट के विलय से बनी ट्रूइस्ट फाइनैंशियल कॉर्प भी हैदराबाद में प्रौद्योगिकी केंद्र खोलने पर विचार कर रही है।

बड़े बैंकों के पहले से ही भारत में प्रौद्योगिकी केंद्र

अमेरिका के जिन कुछ बड़े बैंकों के पहले से ही भारत में प्रौद्योगिकी केंद्र हैं, उनमें जेपी मॉर्गन, गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली, सिटी, नॉर्दर्न ट्रस्ट और स्टेट स्ट्रीट शामिल हैं, जबकि यूरोपीय बैंकों में डॉयचे बैंक और सोसाइटे जेनरल हैं। वे कुछ प्रमुख नाम जिन्होंने क्षमता केंद्र स्थापित किए हैं या स्थापित करने की संभावना है, उनमें अमेरिका के फर्स्ट सिटिजंस बैंक, पीएनसी फाइनैंशियल और फिफ्थ थर्ड बैंक, फ्रांस के नाटाक्सिस, क्रेडिट एग्रीकोल और सैंटैंडर, इटली का यूनिक्रिडिट और ब्रिटेन के रेवॉल्यूट और मोनजू शामिल हैं।

बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (बीएफएसआई क्षेत्र के जीसीसी) राजस्व, परिचालन और कर्मचारियों की संख्या के लिहाज से भारत में सबसे बड़े हैं। परामर्श कंपनी विजमैटिक और ईवाई के अध्ययन में पिछले साल पाया गया था कि इस श्रेणी का राजस्व साल 2020 के 13.4 अरब डॉलर की तुलना में बढ़कर साल 2023 में लगभग 21 अरब डॉलर हो गया और साल 2024 में लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। इस क्षेत्र में लगभग 5.4 लाख लोग कार्यरत हैं।

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First Published - December 5, 2025 | 11:17 AM IST

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