भगोड़े उद्योगपति विजय माल्या से संबंधित एक अवमानना याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से वसूली की संभावनाएं बेहतर होंगी। बैंकरों ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि किंगफिशर एयरलाइंस खाते में वसूली की प्रक्रिया पहले से ही प्रगति में है।
बड़े बैंकों के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने माल्या मामले में अपनी तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला ऋण अदायगी में चूक के अन्य बड़े मामलों के लिए नजीर साबित होगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने आज 2017 में माल्या द्वारा अदालती आदेश का उल्लंघन करते हुए अपने बच्चों को 4 करोड़ डॉलर हस्तांतरित किए जाने के अवमानना मामले में भगोड़े कारोबारी को 4 महीने की जेल और 2,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
बैंकरों ने कहा कि इस मामले में वसूली की प्रक्रिया पहले से ही प्रगति में है। बैंकरों ने कहा कि मूलधन से संबंधित बकाये रकम की वसूली की जा रही है जबकि ब्याज से संबंधित रकम की प्रक्रिया जारी है।
एक बैंकर ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, ‘सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से हमारा हाथ मजबूत होगा।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि इस मामले में स्पष्ट नजरिये के लिए हम फैसले का अनुकरण करेंगे और आगे की कार्रवाई के लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेंगे।’
जहां तक भारतीय स्टेट बैंक का सवाल है तो माल्या की बंद पड़ी विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस दिसंबर 2011 में गैर-निष्पादित आस्तियां बन गई थी। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में बैंकों के एक कंसोर्टियम अपने बकाये ऋण की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
बैंकरों ने कहा कि चूंकि यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय की ओर से आया है, इसलिए बैंक डिफॉल्ट के अन्य मामलों खासकर कॉरपोरेट डिफॉल्ट मामलों में कड़ाई से इस पर अमल कर सकते हैं। हालांकि माल्या को भारत वापस लाने की चुनौती अब भी बरकरार है और फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि
अधिकारियों का इस पर क्या रुख होगा। माल्या फिलहाल लंदन में जमानत पर हैं जहां 2017 में अपनी गिरफ्तारी के बाद भारत को प्रत्यर्पित किए जाने के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें 2017 में अपने बच्चों को 4 करोड़ डॉलर हस्तांतरित करते हुए अदालती आदेश का उल्लंघन करने और अपनी परिसंपत्तियों का पूरी तरह खुलासा न करने का दोषी पाया था।