रेगुलेटरी सिस्टम में खामियां: भारतीय नियामक ढांचे और ट्रिब्यूनलों को बड़े सुधार की दरकार
सर्वोच्च न्यायालय ने 19 नवंबर को न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 के कुछ अहम प्रावधानों को निरस्त कर दिया। यह लंबे समय से चले आ रहे चक्र का ताजा हिस्सा है। तीन दशकों से न्यायालय ने बार-बार कहा है कि कुछ खास संस्थागत व्यवस्थाएं संवैधानिक आवश्यकताओं का उल्लंघन करती हैं। विधायिका ने अक्सर प्रावधानों में मामूली […]
वास्तविक जलवायु कार्रवाई नीतिगत निर्णयों से संभव, वित्तीय बाजारों से नहीं
सरकारें, वित्तीय बाजार नियामक और सामाजिक नागरिक संगठन सभी पृथ्वी के पर्यावरण को बेहतर बनाने में वित्तीय बाजारों की भूमिका को अहम मान रहे हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि निवेशक अपने निजी लाभ पर सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दें और पूंजी प्रवाह को टिकाऊ लक्ष्यों के साथ जोड़ा जा सके। वित्तीय […]
क्या प्रबंधक की भूमिका में आ रहे हैं नियामक?
इंडसइंड बैंक में विदेशी मुद्रा देनदारी के हिसाब-किताब में हुई गड़बड़ी खबरों में खूब रही है। इससे कुछ दिन पहले ही पहले बैंक के निवर्तमान प्रबंध निदेशक को तीन साल के लिए फिर नियुक्त करने की सिफारिश ठुकराकर केवल एक साल के लिए नियुक्त किया जाना भी सुर्खियों में रहा था। इससे पहले भी बैंक […]
भारी भरकम लाभांश कहीं आगे बन न जाए मुसीबत
बाजार में इस समय लाभांश की झड़ी लगी हुई है। खासकर, पिछली कुछ तिमाहियों में यह सिलसिला काफी बढ़ गया है। हाल में इस समाचार पत्र में एक खबर प्रकाशित हुई थी कि कई कंपनियों का लाभांश अनुपात काफी बढ़ा है और कुछ ने तो वित्त वर्ष 2023 में दोगुना लाभांश बांटे हैं। यह खबर […]



