Editorial: औद्योगिक पार्कों की राह में चुनौतियां, हल करने होंगे कई मुद्दे
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस सप्ताह मंजूर की गई सरकार की औद्योगिक पार्क नीति, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) अधिनियम 2005 के बाद कारोबार के अनुकूल क्षेत्र तैयार करने की सबसे महत्त्वाकांक्षी पहल है। 28,600 करोड़ रुपये की लागत से 12 ऐसे एन्क्लेव विकसित करने की योजना है जिसे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने औद्योगिक […]
Editorial: GST ढांचे को सहज बनाएं, काउंसिल की बैठक में राज्यों के मंत्रिसमूह को भी करनी चाहिए पहल
वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था में संभावित बदलावों पर काम कर रहे राज्यों के मंत्रियों के एक समूह ने संकेत दिया है कि फिलहाल उनकी योजना चार दरों वाले मौजूदा ढांचे को बरकरार रखने की है। हालांकि अभी चर्चाएं चल रही हैं और कोई निर्णय नहीं लिया गया है लेकिन समूह के कुछ सदस्यों का […]
Editorial: ULI से कर्ज देने में होगी आसानी, लागू होने के बाद आ सकता है UPI जैसा क्रांतिकारी बदलाव
ULI RBI: भारतीय रिजर्व बैंक एक प्रायोगिक परियोजना के बाद आने वाले समय में देशव्यापी स्तर पर एक नया यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस अथवा यूएलआई जारी करने की तैयारी कर रहा है। इस प्लेटफॉर्म की मदद से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ऋण बढ़ाया जाएगा, खासकर कृषि और सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) क्षेत्र में। […]
Editorial: पुरानी और नई पेंशन योजना की विशेषताओं को मिलाकर बीच का रास्ता निकालने का प्रयास
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक नई पेंशन योजना को गत सप्ताह मंजूरी प्रदान की जिसे यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (यूपीएस) का नाम दिया गया है। इसे 1 अप्रैल, 2025 से लागू किया जाएगा। इससे उन सरकारी कर्मचारियों को लाभ मिलेगा जिन्होंने 1 जनवरी, 2004 के बाद नौकरी शुरू की है तथा जो न्यू […]
Editorial: ई-कॉमर्स नीति बढ़ाए प्रतिस्पर्धा, सरकार को स्वामित्व या निवेश के आधार पर रोकना होगा भेदभाव
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों की वृद्धि और खुदरा क्षेत्र पर उनके संभावित प्रभाव को देखते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गत सप्ताह यह स्पष्ट किया कि सरकार ई-कॉमर्स के विरुद्ध नहीं है बल्कि वह ऑनलाइन और सामान्य खुदरा कारोबारियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है। उन्होंने इस […]
Editorial: सब्सिडी पर नियंत्रण जरूरी, भरपाई के लिए उधारी कोई ठोस रणनीति नहीं
हमारे देश में अक्सर सब्सिडी का इस्तेमाल कल्याण और सामाजिक मदद के लिए किया जाता है। उनकी उपयोगिता, जरूरत और लंबी अवधि के दौरान उनकी व्यावहारिकता हाल के वर्षों में गंभीर बहस का मुद्दा रही है। बहरहाल, देश के बढ़े हुए आम सरकारी ऋण और सीमित राजकोषीय गुंजाइश के संदर्भ में देखें तो सब्सिडी को […]
खाद्य मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति: आर्थिक समीक्षा में उभरी चिंताएं
इस समय लगातार उच्च खाद्य मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति पर इसके असर को लेकर एक दिलचस्प और जीवंत बहस चल रही है। हालांकि यह विषय नया नहीं है और मुद्रास्फीति को लक्षित करने की लचीली व्यवस्था को अपनाए जाने के समय से ही यह बहस का विषय रही है, लेकिन आर्थिक समीक्षा में की गई […]
Editorial: निवेश सुधार की मिली जुली तस्वीर
मांग के चार प्रमुख कारकों- निजी खपत, निवेश, सरकारी व्यय और निर्यात – में सरकारी व्यय, खासतौर पर पूंजीगत व्यय के माध्यम से होने वाले व्यय ने पिछले कुछ वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि में मुख्य योगदान किया है। उदाहरण के लिए इस वर्ष केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय आवंटन सकल घरेलू उत्पाद के […]
Editorial: आठवीं आर्थिक जनगणना की तैयारी, मजबूत हो सांख्यिकीय प्रणाली
जैसा कि इस समाचार पत्र में भी हाल ही में प्रकाशित हुआ, केंद्र सरकार ने आठवीं आर्थिक जनगणना की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि अगले वर्ष उसकी औपचारिक शुरुआत कर दी जाएगी। आर्थिक जनगणना एक अहम उपाय है जो देश भर के प्रतिष्ठानों के ढांचों और परिचालन को लेकर विस्तृत […]
Editorial: अफसरशाही में लैटरल एंट्री की आवश्यकता क्यों? सरकार ने 45 विशेषज्ञ पदों के लिए आवेदन मांगे
संघ लोक सेवा आयोग ने संयुक्त सचिव और निदेशक/उप सचिव स्तर के 45 पदों के लिए तीन वर्ष की अवधि के अनुबंध के वास्ते आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस अवधि को बढ़ाकर पांच वर्ष तक किया जा सकता है। यह दिखाता है कि केंद्र सरकार अफसरशाही में लैटरल एंट्री (बाहरी प्रवेश) को लेकर निरंतर प्रतिबद्ध […]









