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लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, संपादकीय

संपादकीय: एक करोड़ युवाओं के लिए इंटर्नशिप के अवसर

केंद्र सरकार ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी सरकार के पहले पूर्ण बजट की सर्वाधिक चर्चित घोषणाओं में से एक पर अमल शुरू कर दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई के बजट भाषण में कहा था कि सरकार पांच साल के दौरान शीर्ष 500 कंपनियों में एक करोड़ युवाओं को […]

आज का अखबार, संपादकीय

संपादकीय: संस्थानों की शक्ति

इस वर्ष अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार तीन ऐसे विद्वानों को दिया जा रहा है जिन्हें एक बेहद साधारण प्रश्न करने में विशेषज्ञता हासिल है: देश अमीर कैसे बनते हैं? ये विद्वान पारंपरिक संदर्भों में अकादमिक अर्थशास्त्री नहीं हैं। निश्चित तौर पर डैरन एसमोगलू अपनी पीढ़ी के सर्वाधिक प्रतिष्ठित प्रोफेसरों में से एक हैं। परंतु साइमन […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: भारत के विनिर्माण क्षेत्र की चुनौतियां, अति नियमन और छोटे संयंत्रों का जाल

विनिर्माण क्षेत्र में, खासतौर पर श्रम आधारित विनिर्माण में भारत का निरंतर कमजोर प्रदर्शन देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा मुद्दा है। यह कोई पहेली भी नहीं है बल्कि इस बात को कई तरह से समझा जा सकता है और इसकी कई संभावित वजहें और स्पष्टीकरण हैं। व्यापार नीति में निरंतरता का अभाव, खराब लैंगिक […]

आज का अखबार, संपादकीय

सम्पादकीय: आत्मविश्वास में इजाफा

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के निवेशकों को राहत देते हुए भारत ने उसके साथ द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) के कुछ प्रावधानों को शिथिल कर दिया है। इसमें निवेशकों के लिए विवाद की स्थिति में समाधान के स्थानीय उपायों का उपयोग करने की अवधि को पांच वर्ष से कम करके तीन वर्ष करना शामिल है। इसका […]

आज का अखबार, संपादकीय

संपादकीय: रतन टाटा की मूल्यवान विरासत

रतन टाटा (Ratan Tata) ने करीब दो दशक से अधिक वक्त तक देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह का नेतृत्व किया। सन 1991 में जेआरडी टाटा विरासत में 34 सूचीबद्ध और गैरसूचीबद्ध कंपनियों के एक असमान समूह को जिस हालात में छोड़ गए थे, उन्होंने उसे मजबूती प्रदान की। यह सही है कि टाटा समूह […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: RBI MPC के फैसले में स्पष्ट प्रतिबद्धता, लचीलापन तय करने की दिशा में कदम

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने नए बाहरी सदस्यों के साथ इस सप्ताह नीतिगत समीक्षा की। उसने यह निर्णय लिया कि वह नीतिगत रीपो दर को 6.5 फीसदी के स्तर पर अपरिवर्तित रखेगी। परंतु एमपीसी ने नीतिगत रुख को समायोजन वापस लेने से बदलकर तटस्थ करने का निर्णय लिया ताकि कुछ […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial- स्पष्ट जनादेश: अगली सरकार के लिए हरियाणा में चुनौतियां कुछ सरल, मगर जम्मू-कश्मीर में हालात हो सकते हैं और कठिन

हरियाणा तथा जम्मू-कश्मीर (केंद्रशासित प्रदेश) के विधान सभा चुनाव नतीजे मंगलवार को सामने आए। ये नतीजे अपनी-अपनी तरह से उल्लेखनीय हैं। हरियाणा में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करने में कामयाब रही और इस दौरान उसका मत प्रतिशत भी सुधरा। भाजपा को इस बार 40 फीसदी से अधिक मत […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: RBI MPC की बैठक इस हफ्ते; भूराजनीतिक खतरे और महंगाई के बीच दरों में कटौती पर होगा फैसला?

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक इस सप्ताह होने वाली है और उसमें तीन नए बाहरी सदस्य शामिल हैं। एक दशक से भी कम पुरानी इस संस्था में बदलाव का व्यवस्थित ढंग से अंजाम लेना संस्थागत क्षमता का महत्त्व दर्शाता है। केंद्र सरकार ने एमपीसी में ऐसे स्वतंत्र सदस्य नियुक्त करने […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: उत्पादकता बढ़ाने के लिए भारत को R&D खर्च बढ़ाने की जरूरत; बड़ी कंपनियों पर निर्भरता से कैसे बचें?

अक्सर यह दलील दी जाती है कि भारत को अपनी उत्पादकता में इजाफा करने के लिए अनुसंधान एवं विकास (आरऐंडडी) क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है। वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा के लिए उत्पादकता में बढ़ोतरी आवश्यक है। ऐसा करने से भारत का औद्योगिक आधार भी मजबूत होगा तथा रोजगार भी बढ़ेंगे। यह निराशाजनक है कि भारत […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: सुप्रीम कोर्ट की सही सीख, विभाजनकारी राजनीति से देश की विविधता को हथियार बना रहीं राजनीतिक पार्टियां

वर्ष 2024 के लोक सभा चुनावों के दौरान राजनीतिक बढ़त हासिल करने की हताश कोशिश में दोनों प्रमुख राजनीतिक ताकतों सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी कांग्रेसनीत ‘इंडिया’ गठबंधन ने विभाजनकारी राजनीतिक भाषणों के जरिये देश की विविधता को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने उस समय इस […]

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