facebookmetapixel
Advertisement
भारत के निर्यात में जोरदार उछाल, FTA साझेदार देशों को सामान भेजना दोगुने से ज्यादा बढ़ावसीयत, प्रोबेट और प्रॉपर्टी का ट्रांसफर: इसपर क्या कहता है देश का कानून, आसान भाषा में समझें पूरी बातQ1 में भारत डायनामिक्स का धमाकेदार प्रदर्शन! मुनाफा 6 गुना बढ़ा, आय में भी 131% की ग्रोथनतीजों के बाद चुनिंदा IT शेयरों में निवेश का मौका! ब्रोकरेज बुलिश, कहा- मिडकैप रह सकते हैं आगेसस्ता प्रीमियम देख ले लिया हेल्थ इंश्योरेंस, लेकिन ‘को-पे’ और ‘डिडक्टिबल’ बिगाड़ सकता है बजट; समझें पूरा गणितEPFO Update: ज्यादा पेंशन के लिए आवेदन किया है तो जान लें ये 4 बड़े अपडेट, सरकार ने डेडलाइन पर क्या कहा?MSCI India Rejig: Groww, Lenskart समेत 4 शेयरों की एंट्री, Small Cap में 19 बाहरविदेशी फंड्स के लिए बदल रहे टैक्स नियम, क्या भारत बनेगा दुनिया का नया ग्लोबल फंड मैनेजमेंट हब?NRI भी बना सकते हैं NPS से रिटायरमेंट फंड; जानिए कितना पैसा लगाएं, कहां निवेश होगा और कब निकाल सकेंगेनिवेश का मौका! मिल सकता है 40% से ज्यादा का रिटर्न, जानें ब्रोकरेजेज की टॉप 5 पिक्स

आकाश एजुकेशनल सर्विसेज को राहत, एनसीएलएटी ने ईजीएम पर रोक से किया इनकार

Advertisement

इस ईजीएम का मकसद राइट्स इश्यू को मंजूरी देना है और अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो आकाश में बैजूस की हिस्सेदारी 25.75 फीसदी से घटकर करीब 5 फीसदी रह जाएगी।

Last Updated- October 28, 2025 | 10:41 PM IST
NCLT OKs ICICI Securities delisting

राष्ट्रीय कंपनी कानून अपील न्यायाधिकरण (NCLAT) के चेन्नई पीठ ने आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (एईएसएल) की 29 अक्टूबर को निर्धारित असाधारण आम बैठक (ईजीएम) पर रोक लगाने से इनकार करते हुए जीएलएएस ट्रस्ट कंपनी एलएलसी के अनुरोध को खारिज कर दिया, जो संकटग्रस्त एड टेक फर्म बैजूस के अमेरिकी ऋणदाताओं का प्रतिनिधित्व करती है।

इस ईजीएम का मकसद राइट्स इश्यू को मंजूरी देना है और अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो आकाश में बैजूस की हिस्सेदारी 25.75 फीसदी से घटकर करीब 5 फीसदी रह जाएगी। बैजूस की मूल कंपनी थिंक ऐंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (टीएलपीएल) अभी दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है और नए शेयर नहीं खरीद सकती।

न्यायमूर्ति एन शेषशायी और तकनीकी सदस्य जतिन्द्रनाथ स्वैन के खंडपीठ ने कहा कि अगर सहायक कंपनी को व्यावसायिक रूप से खत्म कर दिया जाता है तो आकाश में बैजूस की हिस्सेदारी का मूल्य संरक्षित नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) की भावना सबसे अच्छी तरह से तब पूरी होती है जब जिन कंपनियों में कॉरपोरेट देनदार (जिस पर कर्ज है) के कुछ शेयर हैं, उन्हें समृद्ध होने की अनुमति दी जाती है, भले ही नियंत्रण शक्ति किसी के पास हो। अपील न्यायाधिकरण ने जीएलएएस ट्रस्ट, आकाश और टीएलपीएल के प्रबंधन के लिए नियुक्त समाधान पेशेवर (आरपी) की विस्तृत प्रस्तुतियों पर नजर डाली।

Advertisement
First Published - October 28, 2025 | 10:21 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement