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लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: खुले में शौच पर जीत अभी बाकी, अब राज्यों की बारी

दस वर्ष पहले महात्मा गांधी की जयंती पर शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान को कुछ उल्लेखनीय सफलताएं हासिल हुई हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार देश के 82.5 फीसदी परिवारों की पहुंच अब शौचालय तक है जबकि 2004-05 तक यह आंकड़ा केवल 45 फीसदी था। अब 70 फीसदी परिवारों में शौचालय की सुविधा […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial- औद्योगिक सर्वेक्षण के नतीजे: मैन्युफैक्चरिंग में लचीलापन, मगर रोजगार और सीमित क्षेत्रों तक गतिविधियां चिंता का विषय

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने हाल ही में वर्ष 2022-23 के लिए उद्योगों के सालाना सर्वेक्षण के नतीजे जारी किए। उल्लेखनीय यह है कि वित्त वर्ष 23 में भारतीय अर्थव्यवस्था महामारी के दौरान वृद्धि में आई भारी गिरावट से उबर ही रही थी। बहरहाल ये नतीजे दिखाते हैं कि कच्चे माल के इस्तेमाल, उत्पादन […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: सेबी की बोर्ड बैठक में कई नियामक बदलावों की घोषणा; म्यूचुअल फंड, पैसिव स्कीमों के लिए अपेक्षाकृत हल्के मानक

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की बोर्ड बैठक में नियमन में कई बदलावों की घोषणा की गई। सेबी चेयरपर्सन के खिलाफ हितों के टकराव के आरोपों और खराब कार्यसंस्कृति के आरोपों के बीच नियामक काफी दबाव में था। ये दोनों ही विषय बोर्ड मीटिंग के एजेंडे में नहीं थे। बोर्ड ने कई […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: औसत से बेहतर रहा मॉनसून, पर्याप्त बारिश से खेती और आर्थिक वृद्धि को मदद मिलने की उम्मीद

मजबूत प्रदर्शन के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून धीरे-धीरे पीछे हट रहा है और इसकी शुरुआत पश्चिमी राजस्थान और गुजरात के कच्छ क्षेत्र से हुई है। वर्ष 2023 में वर्षा के सामान्य से 5.6 फीसदी कम रहने के बाद इस वर्ष बारिश औसत से पांच फीसदी अधिक रही है। अब जबकि मॉनसून का मौसम खत्म हो रहा […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: AGR विवाद में राहत की उम्मीद पर टिकी टेलीकॉम कंपनियां, वोडाफोन आइडिया की चुनौतियां बढ़ीं

दूरसंचार उद्योग एक बार फिर केंद्र सरकार से राहत की अपेक्षा कर रहा है। वह समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) से संबंधित अपने बकाये के मामले में राहत चाहता है क्योंकि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में एक उपचारात्मक याचिका खारिज कर दी है। अब दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को आगे बढ़ते हुए अपने […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: ई-कचरे की पहेली, मसौदा नियमों पर निर्माताओं की शिकायत

इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निर्माताओं ने इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) और निपटान के लिए न्यूनतम मूल्य निर्धारित करने वाले केंद्र सरकार के नवीनतम मसौदा दिशानिर्देशों के खिलाफ जो शिकायतें की हैं वे एक ऐसे क्षेत्र में अव्यावहारिक ढंग से नियम थोपे जाने की ओर संकेत करती हैं जिसे तत्काल अनौपचारिक क्षेत्र से संगठित […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: केंद्रीय बैंकों की नीतिगत स्पष्टता, शक्तिकांत दास का जलवायु परिवर्तन और तकनीकी चुनौतियों पर विचार

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के पूर्व चेयरमैन एलन ग्रीनस्पैन ने 1988 में कहा था, ‘मुझे लगता है कि आपको चेतावनी देनी चाहिए। अगर आपको मेरी बातें एकदम स्पष्ट लग रही हैं तो शायद आपने मेरी बातों को गलत समझा है।’ तब से अब तक दुनिया भर में केंद्रीय बैंकिंग में काफी कुछ बदल चुका […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: भारत में श्रम शक्ति भागीदारी उच्चतम स्तर पर, रोजगार की गुणवत्ता बनी चुनौती

जुलाई 2023-जून 2024 तक के ताजा वार्षिक सावधिक श्रम शक्ति सर्वे (पीएलएफएस) की रिपोर्ट इसी सप्ताह जारी की गई। उससे पता चला कि बेरोजगारी दर पिछले वर्ष के समान यानी 3.2 फीसदी रही। बहरहाल कुल श्रम शक्ति भागीदारी दर (एलएफपीआर) की बात करें तो 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए यह […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: 93% डेरिवेटिव कारोबारियों को F&O में नुकसान, लेनदेन की लागत बनी बड़ी चुनौती

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के एक नये अध्ययन ‘इक्विटी डेरिवेटिव क्षेत्र में लाभ-हानि का विश्लेषण (वित्त वर्ष 22-24)’ से संकेत मिलता है कि डेरिवेटिव में कारोबार नुकसानदेह है। इसमें ब्रोकरेज और विनिमय शुल्क के कारण लेनदेन की लागत बढ़ती है और इनके कारण कुल मिलाकर डेरिवेटिव कारोबार ऐसे कारोबार में बदल जाता है […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: नई राह पर श्रीलंका, बाहरी विद्रोही या देश का भविष्य?

बीते सप्ताहांत संपन्न हुए श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनावों ने कई पुरानी मिसाल तोड़ी हैं और देश की दशकों पुरानी राजनीतिक परंपरा को भी उलट दिया। श्रीलंका में आमतौर पर सत्ता दो अलग-अलग शक्तियों के बीच बंटती रही है जिनका नेतृत्व मध्य-दक्षिण और मध्य-वामपंथी दल करते हैं। यहां तक कि पिछले ताकतवर लोगों मसलन राजपक्षे परिवार […]

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