देश का सबसे बड़ा शेयर बाजार नैशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में 6 से 7 लाख करोड़ रुपये के मूल्यांकन का लक्ष्य रख सकता है। अगर इसके ऊपरी दायरे पर मूल्यांकन हुआ तो एनएसई देश की 7 सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शुमार हो जाएगी। घटनाक्रम से अवगत लोगों ने इसकी जानकारी दी।
सूत्रों के अनुसार एनएसई का निर्गम भारत का सबसे बड़ा आईपीओ भी बन सकता है और यह अक्टूबर 2024 में आए ह्युंडै मोटर इंडिया के करीब 27,870 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निर्गम को पीछे छोड़ देगा। एनएसई का प्रस्तावित निर्गम पूरी तरह से बिक्री पेशकश (ओएफएस) होगा जिसमें मौजूदा निवेशक अपनी 4.5 से 5 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। एक निवेश बैंकर ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘ मौजूदा निवेशक आईपीओ में 4.5 से 5 फीसदी के बीच अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। 6 से 7 लाख करोड़ रुपये के मूल्यांकन पर निर्गम का आकार लगभग 28,000 करोड़ रुपये से 38,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है।’
इस आईपीओ का आकार ह्युंडै मोटर इंडिया के निर्गम से बड़ा हो सकता है मगर निवेश बैंकरों को इसमें ह्युंडै के निर्गम की तुलना में कम शुल्क मिलेगा। ह्युंडै मोटर इंडिया के निर्गम का प्रबंधन करने वाले निवेश बैंकरों ने 493 करोड़ रुपये का शुल्क कमाया था जो निर्गम आकार का करीब 1.77 फीसदी था।
इस प्रक्रिया से जुड़े लोगों ने बताया कि एनएसई शुल्क के तौर पर 300 करोड़ से 400 करोड़ रुपये के बीच रकम दे सकती है जिसे आईपीओ का प्रबंधन करने के लिए नियुक्त किए गए 20 बैंकरों के बीच बांटा जाएगा।
उम्मीद की जा रही है कि एनएसई अगले चार से छह हफ्तों के भीतर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास अपना आईपीओ मसौदा (डीआरएचपी) जमा कर देगी।
एनएसई ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के सवालों के जवाब में कहा, ‘सेबी द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर कंपनी के बोर्ड ने बिक्री पेशकश के जरिये आईपीओ लाने की मंजूरी 6 फरवरी को दी है।’ कंपनी ने कहा कि फिलहाल इससे ज्यादा कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। मगर अंतिम मूल्यांकन बाजार स्थितियों और निर्गम के समय एक्सचेंज के वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर बदल सकता है। निर्गम के इस साल अंत तक आने की उम्मीद है।
पिछले हफ्ते एनएसई ने शेयरों की बिक्री का काम संभालने के लिए रिकॉर्ड 20 निवेश बैंकर नियुक्त किए थे। इनमें से केवल चार वैश्विक ऋणदाता हैं जबकि बाकी घरेलू संस्थान हैं। एक्सचेंज ने 8 कानूनी सलाहकारों को भी नियुक्त किया है।
अगर एक्सचेंज का मूल्यांकन 7 लाख करोड़ रुपये होता है तो यह गैर-सूचीबद्ध बाजार में उसके मौजूदा मूल्यांकन (लगभग 5 लाख करोड़ रुपये) से लगभग 40 फीसदी अधिक होगा। एनएसई भारत के नकद इक्विटी खंड में अपना दबदबा बनाए हुए है और इस सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी लगभग 93 फीसदी है। फरवरी में एक्सचेंज ने नकद शेयर खंड में करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये का औसत दैनिक कारोबार दर्ज किया। इक्विटी डेरिवेटिव में औसत दैनिक कारोबार में इसका हिस्सा 57 फीसदी रहा।
यह आईपीओ ऐसे समय में आया है जब डेरिवेटिव मार्केट में नियामकीय सख्ती के बाद कारोबार की मात्रा में गिरावट के चलते एक्सचेंज का प्रदर्शन थोड़ा धीमा पड़ा है। सितंबर 2024 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद बाजार में आई गिरावट का असर भी इसकी गतिविधियों पर पड़ा है।
दिसंबर 2025 को समाप्त 9 महीनों में एनएसई ने 7,431 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध मुनाफा कमाया जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 9,538 करोड़ रुपये था। परिचालन आय 13,369 करोड़ रुपये से घटकर 11,634 करोड़ रुपये रह गई।