facebookmetapixel
Advertisement
West Asia War: पश्चिम एशिया युद्ध से भारत की अर्थव्यवस्था पर खतरा? सरकार ने जताई लंबी अनिश्चितता की आशंकाMiddle East crisis: युद्ध का असर एशिया पर भारी! ईंधन संकट से लंबी कतारें, बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई टेंशनरूस के तेल पर ढील दे सकता है अमेरिका, भारत को खरीद की अनुमति के बाद बड़ा संकेतLPG Price Hike: मिडिल ईस्ट संकट का असर भारत की रसोई तक, घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपये महंगाकर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगेगा प्रतिबंध‘महासागरों में भारत का दबदबा बढ़ेगा’, शक्ति केंद्र बनते समुद्र व बदलती भू-राजनीति पर राजनाथ सिंह का बयानT20 वर्ल्ड कप फाइनल का फीवर: भारत-न्यूजीलैंड भिड़ंत से होटल और रेस्तरां की चांदी, रेवेन्यू होगा दोगुनाWomens Day 2026: तरक्की के दावों के बीच प्रबंधन में घटी महिलाओं की हिस्सेदारी, लक्ष्य अब भी दूररायसीना डायलॉग में बोले ईरान के उप विदेश मंत्री खातिबजादेह: हमारे लिए यह लड़ाई ‘अस्तित्व की जंग’निर्यातकों को बड़ी राहत की तैयारी! बोले गोयल: पश्चिम एशिया संकट से निपटने को उठाएंगे ठोस कदम

Editorial: अंतरराष्ट्रीय मसलों पर शी चिनफिंग के संतुलनकारी कदम

Advertisement

अमेरिका ने चुनिंदा चीनी संस्थानों पर प्रतिबंध लगाया है। उसे आशंका है कि वे रूस को समर्थन मुहैया करा रहे हैं।

Last Updated- May 10, 2024 | 9:25 PM IST
Chinese President Xi Jinping will not participate in the G20 summit

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पांच वर्षों में जब पहली बार यूरोप की यात्रा की तो व्यापार और यूक्रेन के मुद्दे एजेंडे में शीर्ष पर जरूर रहे लेकिन इन दोनों ही मसलों पर किसी तरह की सहमति बनती नहीं नजर आई। अमेरिका और चीन के बीच बीते डेढ़ साल की थका देने वाली कूटनीति की तरह ही शी की छह दिवसीय यात्रा से भी ज्यादा कुछ हासिल नहीं हुआ। दोनों पक्षों ने अपने-अपने एजेंडे पर जोर देने के साथ संबद्धता बढ़ाने की बात कही। बहरहाल उनकी तीन देशों की यात्रा जिसमें सर्बिया और हंगरी भी शामिल थे, यूरोप की एकजुटता की पड़ताल करती प्रतीत हुई।

गत माह जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज की चीन यात्रा के तत्काल बाद हुई इस यात्रा के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तथा यूरोपीय संघ की चेयरपर्सन उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ त्रिपक्षीय बैठक में एजेंडे में सबसे अहम था यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में चीन का रूस को समर्थन।

लेयेन के अनुसार यूरोपीय संघ ने चीन से कहा कि वह रूस पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके युद्ध को समाप्त करे। हालांकि इस प्रकरण पर अपनी टिप्पणी को लेकर यूरोपीय संघ काफी हद तक सतर्क रहा। उसने अपने साझेदार अमेरिका का अनुसरण नहीं किया। अमेरिका ने चुनिंदा चीनी संस्थानों पर प्रतिबंध लगाया है। उसे आशंका है कि वे रूस को समर्थन मुहैया करा रहे हैं।

शी को देखकर ऐसा लगता नहीं है कि वह पुनर्विचार कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने कूटनीतिक अंदाज में मैक्रों के इस आह्वान में स्वर मिलाया कि पेरिस में आयोजित होने जा रहे ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक खेलों के दौरान वैश्विक शांति कायम हो। बहरहाल उन्होंने जून में यूक्रेन को लेकर आयोजित हो रहे शांति सम्मेलन में भाग लेने की प्रतिबद्धता नहीं जताई और कहा कि इस संकट का अंत बातचीत के जरिये होना चाहिए।

उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि युद्ध उन्होंने नहीं शुरू किया और न ही वह इसका हिस्सा थे और न ही उनकी इसमें शामिल होने की इच्छा है। व्यापार के मामले में यूरोपीय संघ के नेताओं की अधिक संतुलित व्यापार और बेहतर बाजार पहुंच की दलील पर प्रगति नहीं हुई।

चीन में बने इलेक्ट्रिक वाहनों की यूरोपीय संघ द्वारा जांच में फ्रांस की भूमिका का प्रतिरोध करते हुए उसने यूरोपीय ब्रांडी खासकर फ्रांसीसी कौगनैक को लेकर एंटी डंपिंग जांच शुरू कर दी। कौगनैक चीन में लोकप्रिय है। परंतु जर्मन बीफ और सेब पर से प्रतिबंध हटाने के अलावा शी ने यूरोपीय संघ के व्यापक बाजार पहुंच के प्रश्न का निराकरण नहीं किया।

इलेक्ट्रिक वाहनों को चीन की सरकारी सब्सिडी को लेकर यूरोपीय संघ की चिंता के मामले में शी चिनफिंग ने अपना पुराना रुख बरकरार रखा कि इस उद्योग ने जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने में अहम भूमिका निभाई है।

बहरहाल सर्बिया और हंगरी की उनकी यात्रा ने संभवत: यूरोप को असहज करने वाले संदेश दिए हों। हंगरी यूरोपीय संघ का सदस्य है जहां बढ़ता अधिनायकवाद यूरोपीय संघ की सदस्यता की परीक्षा ले रहा है। सर्बिया 2012 से सदस्यता का उम्मीदवार है। दोनों देशों का झुकाव रूस की ओर है और वे चीन की बेल्ट और रोड पहल (बीआरआई) पर हस्ताक्षर करने वाले आरंभिक देश हैं।

बेलग्रेड-बुडापेस्ट हाई स्पीड रेलवे इस पहल की प्रमुख योजना है। यह चीन की ‘16 प्लस वन’ पहल का हिस्सा है जिसके जरिये चीन मध्य और पूर्वी यूरोप के देशों के साथ कारोबारी और निवेश संबंधी रिश्ते बढ़ाना चाहता है।

माना जा रहा है इस दौरान ग्रीस तक संपर्क कायम करके जमीन से समुद्र के माध्यम से एक असाधारण मार्ग तैयार किया जाएगा जो पूर्वी यूरोप से भूमध्यसागर के बंदरगाहों तक जाएगी। इससे चीन को यूरोपीय संघ के बाजारों की करीबी हासिल होगी। कुल मिलाकर शी को शायद यूरोप की इस यात्रा से अपेक्षाकृत ज्यादा हासिल हुआ और मेजबान यूरोपीय संघ की तुलना में उन्होंने अपने देश के हितों का अधिक ध्यान रखा।

Advertisement
First Published - May 10, 2024 | 9:25 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement